Saturday, February 26, 2022

लड़ने वाले लड़ भी रहे हैं-देश की खातिर जल भी रहे हैं

देश पे संकट आन पड़ा तो जान न्योछावर कर भी रहे हैं 


सोशल मीडिया: 26 फरवरी 2022: (मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन डेस्क)::

श्याम मीरा सिंह 
ज़ुबां पर सच रखने की ज़िद जारी रखनी हो तो इसका खमियाज़ा भी भुगतना पड़ता है।युग कोई भी हो सत्ता कोई भी हो यह सिलसिला नहीं बदला। जानेमाने पत्रकार श्याम मीरा सिंह ने  बार बार सच बोला और इसका खमियाज़ा  कई कई बार भुगता भी है लेकिन सच का साथ नहीं छोड़ा। सच भी वही जो खुद को सच लगे। अब जबकि रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो जंग का विरोध बुलंद आवाज़ में करने वाले वामपंथी भी बहुत ही संकोच के बाद बहुत ही सोच सोच कर बोले। इस जंग पर श्याम मीरा सिंह ने जो नज़रिया सामने रखा उसे पढ़ कर साहिर लुधियानवी  साहिब याद आने लगते हैं। श्याम को पढ़ते हुए लगता है जैसे कोई जंग के मैदान में खड़ा हो कर कविता लिख रहा हो। वैसे शांति की बात सबसे ज़रूरी जंग के मैदान में ही होती है जहां एक दुसरे पर गोलियां चलाने वाले एक दुसरे को जानते भी नहीं होते लेकिन दुश्मनी की भावना उन्हें जान लेने पर उतारू बना देती है। यही है पूंजीवाद। यही है सियासत। श्याम साहिब लिखते हैं बहुत पते की बात है। 
आप पहले ज़रा ध्यान  से पढ़ लीजिए:

यूक्रेन अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है,
उसके छोटे-छोटे बच्चे भी संकट में हैं, निर्दोष लोगों की आँखों में अपमान की टीस और डर दोनों हैं। इस मुल्क में रहने वाले लोग, प्रवासियों को अपने-अपने जहाज़ पकड़ते हुए भी देख रहे होंगे। जिन्हें कभी चाय पिलाई होगी, जिन्हें बुनकर कपड़े दिए। जिनके बाथरूम साफ़ किए। आज वे अपने-अपने देश के झंडों वाले वाहनों में चल लिए। वे अपराधी नहीं हैं। असली अपराधी तो हमलावर देश है। पर खून से लथपथ यूक्रेन को देख बचपन की एक कविता अनायास ही याद आ गई। बचपन में कंठ पर ज़ोर लगा-लगाकर इस कविता को याद किया, जो आज लौट-लौट कर कानों तक आ रही है। कविता ऐसे ही किसी मुश्किल वक्त की थी-
"आग लगी इस वृक्ष में, जले डाल और पात,
तुम पंछी क़्यू जलो, जब पंख तुम्हारे पास।"
तब जलते हुए वृक्ष की डाली पर बैठे पक्षियों ने कहा-
"फल खाए इस वृक्ष के, गंदे कीने पात,
धर्म हमारा है यही, जलें इसी के साथ।"
—-
ऐसा नहीं है युद्ध ग्रस्त देश में बने रहना बुद्धिमानी है. लेकिन दो दिन से ये आँखें एक कम समझदार, थोड़े से बुद्धु, एक अकड़ूँ से आदमी की तलाश कर रहीं हैं। कोई एक ही आदमी थोड़ा बुद्धु सा निकल आता तो उस पर दिल भर आता। कोई एक आदमी ही कह देता कि मेरे मुल्क को कहना संकट की इस घड़ी में यूक्रेन छोड़ने का जी नहीं आ रहा। जन्म लिया ही देश क्या, जिसका पानी पिया, हवा ली, छत ओढ़ी, वही अपना देश. इस युद्ध में कमजोर आदमी की तरफ़ से गिलहरी का भी काम करने का अवसर मिले तो कर जाऊँ। अगर कोई आदमी ये दो-एक बात कह देता तो आज दिल चौड़ा हो जाता।
एक आदमी भी यूक्रेन रुक जाता तो इस कविता को सदियों बाल कंठों से गाए श्रम पर नाज़ हो आता। जैसे कि उस एक आदमी को देखने के लिए ही ये कविता अब तक जीवित थी। मगर यूक्रेन से अपने-अपने देशों के हवाई जहाज़ पर चढ़ते प्रवासियों को देख इस कविता की उमर कुछ और बढ़ गई, यह बढ़ी हुई उम्र ही इस कविता की मौत है। आदमी कभी अपनी लिखी कविताओं को सही नहीं होने देते। हर बार उम्मीद पर खरे उतरते हैं। इस दुनिया को चलते रहने के लिए कभी कभी एक बुद्धु की तलाश होती है।
Courtesy Photo 

श्याम मीरा सिंह की यह पोस्ट याद दिलाती है
सन 1947 की बंटवारे की जब पंजाब दो हिस्सों में बांट दिया गया था। दोनों तरफ रहने वाले अपने अपने भरे भराए घरों से उजड़ कर निकले तो बहुत से लोगों ने घरों की चाबियां अपने ही पड़ोसियों के हवाले कर दी थी। बहुत से इसी भूमि के साथ प्रेम करते हुए मर भी मिठे थे। लेकिन बंटवारा हो कर रहा। साम्राज्यवादी सियासतदान यही चाहते ठगे। उसकी तीस आज भी महसूस की जा सकती है। वृद्ध लोगों के मुँह से सुनी भी जा सकती है। इस दर्द को उनकी आँखों में देखा भी जा सकता है।
1947 के बाद भी ऐसे हालत बनते रहे अलग अलग हिस्सों में। लोग पलायन पर मजबूर होते रहे। राजनीति अट्हास करती रही। पीड़ित लोग रोते रहे-बिलखते रहे। शायद वही कुछ यूक्रेन में भी हो रहा है। इस बार कारण बना है रूस का हमला। रूस का हमला हुआ अमेरिकी-नाटो उकसाहट के कारण लेकिन इसमें यूक्रेन के नागरिकों का कोई कसूर नहीं था। बहुत से लोग डरे भी होंगें लेकिन बहुत से लोग डटने वालों में भी रहे।
Courtesy Photo 

79 वर्षीय वृद्धा वेलेंटीना कोन्स्टेंटिनोवस्का,
ऐसे ख़ास लोगों में विशेष है। मारियुपोल, डोनेट्स्क क्षेत्र पूर्वी यूक्रेन में आता है। रविवार, 13 फरवरी, 2022 को यूक्रेन के नेशनल गार्ड के विशेष बल यूनिट आज़ोव द्वारा आयोजित नागरिकों के लिए बुनियादी युद्ध प्रशिक्षण के दौरान इस वृद्धा ने भी जोश दिखाया। वह पूरे जोश के हथियार रखती है। इस फोटो को क्लिक किया जानीमानी एजेंसी एपी के फोटोग्राफर वादिम घिरदा ने और यह लगातार वायरल होती है रही है। दुनिया भर में इस की चर्चा हो रही है।
Courtesy Photo 

एक और तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई है।
यूक्रेन के एक मेयर की।
पूर्व हैवीवेट मुक्केबाजी चैंपियन विटाली क्लिट्स्को ने कहा कि वह अपने भाई और साथी हॉल ऑफ फेमर व्लादिमीर क्लिट्स्को के साथ हथियार उठा रहे हैं ताकि रूस के अपने देश यूक्रेन पर आक्रमण के चलते "खूनी युद्ध" में डट कर लड़ सकें।
लोग 80-80 वर्ष की उम्र में भी सेना में शामिल होने चले आ रहे हैं। वहां की महिलाएं भी नेतागिरी छोड़ कर बंदूक उठा कर सेना के साथ आ खड़ी हुई हैं। उनके जज़्बे को सलाम तो कहना ही पड़ेगा। इसको कहते हैं राष्ट्रवाद। इसको कहते हैं देशभक्ति। इसको कहते हैं मातृभूमि के लिए मर मिटने का जज़्बा।
कुछ और तस्वीरें भी सामने आई हैं जिनकी चर्चा हम अलग अलग पोस्टों में करते रहेंगे।

Saturday, January 1, 2022

महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना 3 जनवरी को

Saturday 1st January 2022 at 11:45 AM

देश हित के लिए कृपया इस धरने में शामिल हो कर इसे सफल बनाएं 

भोपाल: 1  जनवरी 2022: (मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

राष्ट्रीय सेक्युलर मंच मौजूदा स्थितियों से बुरी तरह चिंतित है। केवल चिंतित ही नहीं इस स्थिति को बदलने के लिए भी पूरी तरह से सक्रिय है। इस संगठन के संयोजक हैं जानेमाने वयोवृद्ध पत्रकार एल. एस. हरदेनिया जो लोकतान्त्रिक अधिकारों और धर्मनिष्पक्षता को लेकर भी कुछ न कुछ रचनात्मक कार्य करते रहते हैं। अपनी लेखनी के साथ साथ समय समय पर धरने वगैरा जो कुछ भी सम्भव हो वह उसके लिए तैयार रहते हैं। अब उनका नया कार्यक्रम तीन जनवरी को होने वाला है। इसकी सफलता के लिए सभी लोगों को निमंत्रित करते हुए वह कहते हैं की आपको इसमें बढ़ चढ़ कर शामिल होना चाहिए। अपने निमंत्रण में उन्होंने इस आयोजन का कार्यक्रम बताते हुए कहा है:  

साथियों,

विगत कुछ वर्षों से प्रतिगामी ,साम्प्रदायिक ताकतों द्वारा धार्मिक आयोजनों तथा अन्य माध्यमों से महात्मा गांधी जी और अल्प संख्यकों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कर भ्रामक दुष्प्रचार करने की वारदातें बढ़ती ही जा रही हैं ।यह अनुचित और अनैतिक है ।यह भारत के संवैधानिक मूल्यों और गरिमा के खिलाफ है।यह दुखद और चिंताजनक है कि इस तरह की वारदातों में शामिल लोगों और संगठनों को भाजपा सरकार  का संरक्षण मिल रहा है।

इस संकटपूर्ण स्थिति का प्रतिरोध करने और भारत के संवैधानिक मूल्यों ,धर्म निरपेक्ष मूल्यों ,सहिष्णुता ,सदभाव , भाईचारा कायम रखने की अपील हेतु स्थानीय गांधी भवन , भोपाल में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना आयोजित किया गया है।

राष्ट्रीय सेक्युलर मंच, गांधी भवन तथा अन्य प्रगतिशील, जनवादी, धर्म निरपेक्ष संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस धरने की अध्यक्षता गांधी भवन न्यास के सचिव श्री दयाराम नामदेव जी करेंगे।

 देश हित में कृपया इस बेहद जरूरी धरने में शामिल हों ।

 दिनांक: 3 जनवरी 2022

 समय:   11 बजे से 1 बजे तक

 स्थान:   महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष, गांधी भवन ,भोपाल ।

 भवदीय

एल. एस. हरदेनिया (मो. 9425301582) शैलेन्द्र शैली, जावेद अनीस, आशा मिश्रा

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Quote: If India is not secular, then India is not India at all.

– Atal Bihari Vajpayee

Hindi Quote: अगर भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है, तो भारत, भारत ही नहीं है।

– अटल बिहारी वाजपेयी


Quote: Let no one challenge India’s secularism.

– Atal Bihari Vajpayee

Hindi Quote: कोई भी भारत की धर्मनिरपेक्षता को चुनौती न दें।

– अटल बिहारी वाजपेयी

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Saturday, November 6, 2021

UNO ने भी कहा मीडिया के खिलाफ सभी तरह की हिंसा निंदनीय

पत्रकारों पर हमले के दोषियों को मिले सज़ा:संयुक्त राष्ट्र

Photo Courtesy:UNESCO


नई दिल्ली: 6 नवंबर 2021: (मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

मीडिया के खिलाफ हिंसा दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। इस तरह का निंदनीय रुझान दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ रहा है। इसकी गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस तरह के हमलों की सख्त निंदा की है। 

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्तावित मसौदे में पत्रकारों और मीडियाकर्मियों के खिलाफ सभी तरह के हमलों, प्रतिशोध और हिंसा की निंदा करने और सरकारों से इन अपराधों के दोषियों को दंडित करने के लिए कार्रवाई किये जाने का आग्रह किया गया है। महासभा के इस प्रस्तावित मसौदे में  उन पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई का आग्रह किया गया है जिन्हें मनमाने ढंग से गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है या बंधक बना लिया गया है या जिन्हें गायब कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के राजनयिकों के अनुसार,  प्रस्ताव यूनान, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, कोस्टा रिका और ट्यूनीशिया द्वारा तैयार किया गया है और ब्रिटेन, जर्मनी और कई अन्य यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ-साथ आइवरी कोस्ट और लेबनान सहित 34 सह-प्रायोजकों की सूची में शामिल है। इस दिशा में दुनिया के हर हिस्से से ज़ोरदार आवाज़ उतनी चाहिए। पूरी तरह बुलंद आवाज़। 

आज के मीडिया पर रीतू कलसी की एक काव्य रचना

आज रुपया पत्रकारिता पर भारी पड़ गया क्या?


रीतू कलसी ने मीडिया में कुर्बानी का ज़माना देखा है। त्याग का ज़माना देखा है। साधना का ज़माना देखा है। अपनी कलम और सच के दम पर बड़ों बड़ों से आँख मिला कर बात करने का ज़माना देखा है। अफ़सोस अब वो बातें बहुत कम रह गई हैं। उस दर्द की बात करती है रीतू कलसी की यह रचना। वो दर्द जो हर सच्चे पत्रकार के मन में उठना चाहिए। -रेक्टर कथूरिया


बचपन से सुनते आये थे 

एक पत्रकार कितना महान होता 

रेडियो के स्टूडियो में रीतू कलसी 
कुछ भी हो जाए सच का साथ नहीं छोड़ता 

थैला लटकाये सच को भर उस में 

हर संभव कोशिश करता है हम सभी को बताने की 

गरीबी में जीता है 

मौत से हर समय आँख मिचोली खेलता है 

आज़ादी में भी पत्रकारों का अहम रहा योगदान 

पत्रकार का एक ही धर्म होता कर्म सच का कर्म 

पर अभी जो पत्रकारों को करते देखते हैं 

उनका कहा सुनते हैं क्या यह कर्म है 

सच को झूठ कैसे बनाना क्या यह काम हो गया 

क्या अब पैसा ही पत्रकार का धर्म हो गया।

 

राजनीति किसलिए हावी हो गयी पत्रकारिता पर 

या अब मौत से डर लगने लग गया।


कहाँ गए सीना तान कर चलने वाले 

कब कैसे पार किया रास्ता शालीनता से बतमीज़ी तक का 

चीखना चिलाना कब से हो गयी पत्रकारिता 

देखते ही देखते पत्रकारिता लोगों के लिए कॉमेडी हो गयी 

कैसे भूलें  पंडित जुगल किशोर सुकुल की पत्रकारिता 

 राम मोहन रॉय ने पत्रकारिता से किया कितनी कुरूतियो को दूर 

 बाल विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, पर्दा प्रथा का किया अंत 

अजीमुल्ला खां ने ली सीधी टककर अंग्रेज़ों से 

हेमंत, शिशिर, वसंत और मोतीलाल ने नया प्रणाली पर उठाये प्रश्न 

भगत सिंह को कौन नहीं जानता 

थे अख़बार प्रताप के तेज़ तरार निर्भीक एवं निष्पक्ष पत्रकार 

जाते थे लगातार अपने असूलों के लिए लगातार जेल 

कहाँ गए आज वह असूल 

आज रुपया पत्रकारिता पर भारी पड़ गया क्या 

क्या बताएं अपने बच्चों को 

कौन से कहानिया सुनाये कैसे समझाये उन्हें यह समय का हेर फेर 

कहाँ अँधेरे की तरफ बढ़ चले हैं हम 

जहाँ अब पत्रकार को इज़्ज़त की नज़र से नहीं देखा जा रहा।

                                  --रीतू कलसी 

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Friday, September 24, 2021

नहीं रहे आकाशवाणी के समाचार सुनाने वाले रामनुज प्रसाद सिंह

 दशकों तक जुड़े रहे रेडियो से रामानुज प्रसाद सिंह  

रेडियो की दुनिया//सोशल मीडिया : 23 सितंबर 2021: (मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन ब्यूरो)::


ये आकाशवाणी है! अब आप रामानुज प्रसाद सिंह से समाचार सुनिए! दशकों तक रेडियो समाचार के माध्यम से श्रोताओं को मुग्ध करने वाली ये दमदार, गहरी और ठहरी हुई आवाज़ आज थम गई। 

आकाशवाणी में समाचार वाचक कैडर के आखिरी स्तंभ और महाकवि रामधारी सिंह दिनकर के भतीजे रामानुज प्रसाद सिंह ने 86 साल की उम्र में आज यानी 22 सितंबर 21के दिन इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 

आकाशवाणी में समाचार वाचक कैडर की आखिरी चौकड़ी देवकी नंदन पांडेय, विनोद कश्यप, अशोक वाजपेयी और रामानुज प्रसाद सिंह की ही रही. इसके बाद ये कैडर समाप्त हो गया और बाद के समाचार वाचक अनुवादक सह समाचार वाचक की श्रेणी में ही आए. यह जानकारी मीडिया और साहित्य की दुनिया से जुडी शख्सियत मनविंदर भिंबर ने कल अर्थात 22 सितंबर 2021 की रात को 11:02 बजे दी। उन्होंने वाया राजेश चड्ढ़ा यह जानकारी दी। 

रेडियो की यादें दिमाग में आते ही याद आ जाती है रामनुज प्रसाद सिंह जी की याद। बहुत ही अच्छा बोलते थे। उन्हें नमन। बहुत ही दमदार आवाज़ थी। भावों से भरी हुई प्रभावशाली आवाज़। समाचार सुनने को उत्सुक करती हु आवाज़। नींद से जगाती हुई आवाज़। हालात के चक्र की की दस्तक देती हुई आवाज़। आज तक ज़हन में सुनाई देती है। उनका जाना--एक युग का चले जाना है। उनका अतीत हो जाना सचमुच पीड़ादायिक है। रामानुज प्रसाद सिंह जी को श्रद्धासुमन अर्पित हैं। दिल भरा हुआ है। ऑंखें भीगी हुई हैं। अंतर्मन में रेडियो से जुडी यादों का बवंडर सा है। उन्हें एक बार फिर से नमन। काश जाने वालों से कभी दोबारा भेंट का कोई सुअवसर मिला करता। काश वहां भी आकाशवाणी होती और हम सुन पाते उनकी आवाज़ में वहां के समाचार। उनके जाने से जो सदमा हम कुछ लोग महसूस कर रहे हैं उस  महसूस करते हुए हमें मिलजुल कर एक प्रयास करना होगा। रेडियो की दुनिया से जुड़े जो लोग अभी भी हमारे दरम्यान हैं। उन्हें संभालना होगा। उनकी आवाज़ें, उनके अनुभव, उनके ख्याल, उनकी रचनाएं, उनकी तस्वीरें बहुत कुछः सहेजने वाला है। आवाज़ की दुनिया से जुड़े उनके गुर भी उनसे पूछने होंगें तांकि रेडियो की दुनिया अमीर बनी रहे। निश्चिन्त रहिए ,रेडियो समाप्त नहीं होगा हैं तकनीकी रूप चाहे बदलता रहे। रेडियो का जादू कुछ कम हुआ अवश्य लगता है लेकिन जल्द ही लौटेगा रेडियो का करिश्मा। लोग टीवी से अब ऊबने लगे हैं। आओ सुनते हैं ज़रा ध्यान दीजिए। आवाज़ आ रही है---ये आकाशवाणी है! अब आप रामानुज प्रसाद सिंह से समाचार सुनिए......!!!                     ---रेक्टर कथूरिया


Monday, August 16, 2021

दूरदर्शन ने "रग रग में गंगा" की दूसरी श्रृंखला का शुभारंभ किया

प्रविष्टि तिथि: 16 AUG 2021 6:32PM by PIB Delhi

 ‘रग रग में गंगा’की पहली श्रृंखला को 1.75 करोड़ लोगों ने देखा था 


नई दिल्ली
: 16 अगस्त 2021: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने आज केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय जल शक्ति एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल के साथ सफल यात्रा-वृत्तांत कार्यक्रम, ‘रग रग में गंगा’की दूसरी श्रृंखला का अनावरण किया।

इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि दूसरी श्रृंखला का शुभारंभ ही अपने आप में पहली श्रृंखला की सफलता का पैमाना है, जिसे लगभग 1.75 करोड़ दर्शकों ने देखा था। मंत्री ने कार्यक्रम की टीम को बधाई दी और कहा कि दूसरी श्रृंखला से उम्मीदें अधिक हैं; यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनभागीदारी से जन आंदोलन तक का एक प्रयास है।

गंगा के कायाकल्प में योगदान देने के लिए लोगों को आमंत्रित करते हुए मंत्री ने कहा कि गंगा का सभी भारतीयों के साथ भावनात्मक जुड़ाव है। भारतीयों के साथ गंगा का आध्यात्मिक संबंध होने के साथ-साथ इसका बहुत बड़ा आर्थिक महत्व भी है। मंत्री ने ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि आज की जलवायु चुनौतियों से निपटने के प्रयासों में बच्चों को भागीदार बनाया जाना चाहिए।         

मंत्री महोदय ने कहा कि अगले तीन-चार साल में दूरदर्शन सबसे अधिक देखा जाने वाला चैनल बन जाएगा। उन्होंने कहा कि चैनल दूरदर्शन के दर्शकों की संख्या को बढ़ाने के लिए उचित सामग्री का निर्माण करेगा।

श्री ठाकुर ने आज़ादी के अमृत महोत्सव से शताब्दी समारोह तक के लिए विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के तहत किए जा रहे प्रयासों में भाग लेने के लिए लोगों को आमंत्रित करते हुए, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को दोहराया।

रग रग में गंगा यात्रा-वृत्तांत की दूसरी श्रृंखला में इस महान नदी के सांस्कृतिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और सामाजिक-आर्थिक विवरणों को शामिल किया जाएगा तथा यह निर्मलता व अविरलता के विषय पर केंद्रित होगा। यात्रा वृत्तांत एनएमसीजी द्वारा गंगा को बचाने के लिए किए जा रहे कार्यों को भी स्थापित करेगा और एनएमसीजी के सहयोग से इसे दूरदर्शन पर एक यात्रा वृत्तांत श्रृंखला 'रग रग में गंगा' के दूसरे सीजन को फिर से लेकर आएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा नदी की भव्यता और इसके संरक्षण की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करना है। काव्यात्मक रूप से फिल्माई गई श्रृंखला नदी की भव्यता और उसके परिदृश्य को गंगा नदी की आध्यात्मिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक विरासत और इसकी वर्तमान इकोलोजिकल स्थिति का लेखा-जोखा प्रस्तुत करेगी। यात्रा वृत्तांत, जिसमें 26 एपिसोड शामिल हैं, इस कार्यक्रम के एंकर जाने-माने अभिनेता राजीव खंडेलवाल है और 21 अगस्त 2021 से प्रत्येक शनिवार और रविवार को रात 8:30 बजे दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित किया जाएगा।

श्रोताओं को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार तीन साल की छोटी सी अवधि में इतनी लंबी गंगा नदी को दस सबसे अधिक स्वच्छ नदियों में स्थान दिलाने में सफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शुरू किए गए सभी कार्यक्रमों ने अपने लक्ष्यों को समय से पहले हासिल कर लिया है और यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 4 पी के मंत्र - राजनीतिक इच्छाशक्ति, सार्वजनिक खर्च, हितधारकों के साथ साझेदारी और लोगों की भागीदारी का परिणाम है।

श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि रग रग में गंगा की दूसरी श्रृंखला अर्थ-गंगा को समर्पित होगी, जिसने हमारी सभ्यता के विस्तार की नींव रखी। उन्होंने लोगों को अमृत महोत्सव की इस अवधि के दौरान गंगा के प्रति हुई अतीत की भूल को सुधारने के प्रयासों में योगदान देने का संकल्प लेने के लिए आमंत्रित किया।

पृष्ठभूमि:

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और दूरदर्शन ने गंगा की वर्तमान स्थिति तथा उसके अतीत के गौरव को फिर से जीवंत करने की जरूरत के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए आपस में भागीदारी की है।

फरवरी, 2019 में 'रग रग में गंगा', जोकि भारत की सबसे पवित्र नदी- गंगा पर आधारित एक यात्रा वृत्तांत है, का राष्ट्रीय प्रसारक दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर एक प्रमुख कार्यक्रम के रूप में शुभारंभ किया गया था। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा शुरू की गई 21-कड़ियों वाली इस श्रृंखला में शक्तिशाली गंगा की 2525 किलोमीटर लंबी यात्रा को उसके उद्गम स्थल गोमुख ग्लेशियर से लेकर गंगासागर, जहां वह बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है, तक कवर किया गया। जाने-माने अभिनेता राजीव खंडेलवाल की उद्घोषणा से लैस इस यात्रा वृत्तांत में गंगा के किनारे बसे सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक महत्व के 20 शहरों को शामिल किया गया था। इस नदी से जुड़े सांस्कृतिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक तथ्यों और इसके किनारे बसे लोगों से जुड़े विवरणों को कवर करने के क्रम में गंगा की सफाई से जुड़े संदेश, इस नदी को साफ रखने में जनता की भागीदारी और इस नदी की सफाई व इसका कायाकल्प करने के लिए एनएमसीजी द्वारा किए जा रहे कार्यों को इस यात्रा वृत्तांत की विषय-वस्तु और प्रारूप के रूप में गुंथकर प्रस्तुत किया गया।

पिछली श्रृंखला गंगासागर में समाप्त हुई थी, जहां गंगा बंगाल की खाड़ी में मिल गई थी। इस श्रृंखला का भाग-दो मुर्शिदाबाद जिले में समाप्त हो सकता है, जहां गंगा भारत को छोड़ती हुई बांग्लादेश में प्रवेश करती है और पद्मा नदी बन जाती है। 26 एपिसोड की इस श्रृंखला में दर्शकों को गंगा को फिर से जीवंत करने की जरूरत और इस नदी द्वारा सदियों से उन्हें दिए गए बहुमूल्य उपहारों के प्रति उनके कर्तव्यों का एहसास कराने से जुड़े कई संदेश अंतर्निहित हैं। व्यापक शोध पर आधारित, यह कार्यक्रम गंगा की स्वच्छता की दिशा में सरकार द्वारा किए गए विभिन्न उपायों के साथ-साथ इस संदर्भ में इसकी वर्तमान स्थिति के बारे में बतायेगा और लोगों से इसके लिए काम करने का आह्वान करेगा।

'रग रग में गंगा-II' में गंभीरता और मनोरंजन का एक संतुलित मिश्रण है। यह श्रृंखला शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाके को दर्शकों को गंगा की समृद्ध विरासत का स्वाद लेने के लिए प्रेरित करेगी। 'रग रग में गंगा-I' की अपार लोकप्रियता को देखते हुए, यह उम्मीद की गई है कि अनूठी और उच्च गुणवत्ता वाली यह श्रृंखला एक बार फिर दर्शकों के साथ भावनात्मक तौर पर जुड़ पायेगी। एक यात्रा वृत्तांत होने के साथ-साथ यह श्रृंखला जल संरक्षण और जल स्वच्छता (अविरलता और निर्मलता) के संदेश को फैलाने में भी मदद करेगी, जोकि समय की मांग है।

प्रसारण का समय



Wednesday, August 11, 2021

सोशल मीडिया के महत्व को फिर पहचाना लोक संपर्क विभाग ने

 11th August 2021 at 9:26 PM

सरकार की उपलब्धियों को सोशल मीडिया के पर प्रसारित करने की ज़रूरत-अनिंदिता मित्रा


चंडीगढ़
: 11 अगस्त 2021: (गुरजीत बिल्ला//मीडिया स्क्रीन)::

कोई ज़माना था जब सोशल मीडिया से जुड़े लोगों और मंचों को बहुत छोटा करके देखा जाता था। उस दौर में इसे  इससे सबंधित वर्ग को बहुत ज़्यादा अंडरएस्टिमेट किया गया। इसी नज़रअंदाज़ी के चलते धीरे धीरे इसने इतना ज़ोर पकड़ा लिया की यह मुख्य धरा के मीडिया को प्रभावित करने लगा। आज टवीटर और फेसबुक जैसे मंचों को बेहद महत्वपूर्ण घोषणाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यूटयूब पर छोटी छोटी फ़िल्में और गीतों की एल्बम रिलीज़ होने लगी हैं। कहा जा सकता है कि सोशल मीडिया ने अपन अलोहा मनवा लिया है। मुख्य ड्सरा का मीडिया भी अपने प्रचार प्रसार के लिए इसका सहारा ले रहा है। व्हाटसअप्प ने तो इसकी लोकप्रियता को चार चाँद लगा दिए हैं। ऐसे में पंजाब सरकार के लोक सम्पर्क विभाग ने भी इसके जादू को स्वीकार किया है। इसके इस्तेमाल की बाकायदा सिफारिशें होने लगीं हैं। 

आज के दौर में पंजाब सरकार की उपलब्धियों को घर-घर पहुँचाने के लिए सूचना एवं लोक संपर्क विभाग को नये युग के प्रचार साधन सोशल मीडिया का अधिकतम प्रयोग करना चाहिए। उक्त विचार विभाग की डायरैक्टर श्रीमती अनिंदिता मित्रा ने आज यहां विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग के दौरान व्यक्त किये। मीटिंग में इसकी चर्चा ने काफी समय लिया। इस सदुपयोग पर कई बातें हुईं। 

इस अवसर पर श्रीमती मित्रा ने कहा कि सूचना एवं लोक संपर्क विभाग सरकार और लोगों के बीच सेतु का काम करता है जो कि सरकार की जन कल्याण स्कीमें और सरकार द्वारा जनहित में लिए फ़ैसलें अखबारों, टी.वी., रेडियो के द्वारा प्रचार करता आ रहा है। परंतु अब दिन-प्रतिदिन सूचना प्रौद्यौगिकी के परिणामस्वरुप प्रचार साधनों में आ रही तबदीलियों को देखते हुए समय की मांग अनुसार सरकार के कामों का प्रचार सोशल मीडिया के द्वारा भी किया जाना चाहिए। इस तरह छुटपण या हिकारत की नज़र से देखा जाने वाला सोशल मीडिया अब सम्मान पा रहा है। सोशल मीडिया की अहमियत को एक तरह से मान्यता मिल रही है। 

श्रीमती मित्रा ने विभाग के अधिकारियों को हिदायत की कि वह लोगों की समस्याओं संबंधी  फीडबैक तुरंत विभाग को दें जिससे सरकार इन समस्याओं को जल्द दूर कर सके।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा जन-समर्थकी नीतियों को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए 100 से अधिक अलग-अलग स्थानों पर एल.एफ.डी. स्थापित की गई हैं। यह एल.एफ.डीज़. स्थापित करने का कार्य अगस्त महीने के अंत तक मुकम्मल कर दिया जायेगा।

अतिरिक्त सचिव सूचना एवं लोक संपर्क विभाग सेनू दुग्गल, आई.ए.एस. ने मीटिंग को संबोधन करते हुये कहा कि कोविड -19 के कारण पैदा हुई स्थिति में सरकार द्वारा इस महामारी से निपटने के लिए समय-समय पर जारी हिदायतों और ऐडवायज़रियों को सोशल मीडिया के द्वारा ही बहुत कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना संभव हो सका है।

मीटिंग में विशेष तौर पर अतिरिक्त डायरैक्टर ओपिन्दर सिंह लांबा, ज्वाइंट डायरैक्टर अजीत कंवल सिंह हमदर्द, ज्वाइंट डायरैक्टर रणदीप सिंह आहलूवालीया, ज्वाइंट डायरैक्टर हरजीत सिंह ग्रेवाल, डिप्टी डायरैक्टर पी.एस. कालड़ा, डिप्टी डायरैक्टर इशविन्दर सिंह ग्रेवाल, डी.सी.एफ.ए. गगनदीप बस्सी और समूह जि़ला लोक संपर्क अधिकारी और मुख्यालय में तैनात लोक संपर्क अधिकारी उपस्थित थे।