Saturday, November 6, 2021

UNO ने भी कहा मीडिया के खिलाफ सभी तरह की हिंसा निंदनीय

पत्रकारों पर हमले के दोषियों को मिले सज़ा:संयुक्त राष्ट्र

Photo Courtesy:UNESCO


नई दिल्ली: 6 नवंबर 2021: (मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

मीडिया के खिलाफ हिंसा दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। इस तरह का निंदनीय रुझान दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ रहा है। इसकी गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस तरह के हमलों की सख्त निंदा की है। 

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्तावित मसौदे में पत्रकारों और मीडियाकर्मियों के खिलाफ सभी तरह के हमलों, प्रतिशोध और हिंसा की निंदा करने और सरकारों से इन अपराधों के दोषियों को दंडित करने के लिए कार्रवाई किये जाने का आग्रह किया गया है। महासभा के इस प्रस्तावित मसौदे में  उन पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई का आग्रह किया गया है जिन्हें मनमाने ढंग से गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है या बंधक बना लिया गया है या जिन्हें गायब कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के राजनयिकों के अनुसार,  प्रस्ताव यूनान, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, कोस्टा रिका और ट्यूनीशिया द्वारा तैयार किया गया है और ब्रिटेन, जर्मनी और कई अन्य यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ-साथ आइवरी कोस्ट और लेबनान सहित 34 सह-प्रायोजकों की सूची में शामिल है। इस दिशा में दुनिया के हर हिस्से से ज़ोरदार आवाज़ उतनी चाहिए। पूरी तरह बुलंद आवाज़। 

Friday, September 24, 2021

नहीं रहे आकाशवाणी के समाचार सुनाने वाले रामनुज प्रसाद सिंह

 दशकों तक जुड़े रहे रेडियो से रामानुज प्रसाद सिंह  

रेडियो की दुनिया//सोशल मीडिया : 23 सितंबर 2021: (मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन ब्यूरो)::


ये आकाशवाणी है! अब आप रामानुज प्रसाद सिंह से समाचार सुनिए! दशकों तक रेडियो समाचार के माध्यम से श्रोताओं को मुग्ध करने वाली ये दमदार, गहरी और ठहरी हुई आवाज़ आज थम गई। 

आकाशवाणी में समाचार वाचक कैडर के आखिरी स्तंभ और महाकवि रामधारी सिंह दिनकर के भतीजे रामानुज प्रसाद सिंह ने 86 साल की उम्र में आज यानी 22 सितंबर 21के दिन इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 

आकाशवाणी में समाचार वाचक कैडर की आखिरी चौकड़ी देवकी नंदन पांडेय, विनोद कश्यप, अशोक वाजपेयी और रामानुज प्रसाद सिंह की ही रही. इसके बाद ये कैडर समाप्त हो गया और बाद के समाचार वाचक अनुवादक सह समाचार वाचक की श्रेणी में ही आए. यह जानकारी मीडिया और साहित्य की दुनिया से जुडी शख्सियत मनविंदर भिंबर ने कल अर्थात 22 सितंबर 2021 की रात को 11:02 बजे दी। उन्होंने वाया राजेश चड्ढ़ा यह जानकारी दी। 

रेडियो की यादें दिमाग में आते ही याद आ जाती है रामनुज प्रसाद सिंह जी की याद। बहुत ही अच्छा बोलते थे। उन्हें नमन। बहुत ही दमदार आवाज़ थी। भावों से भरी हुई प्रभावशाली आवाज़। समाचार सुनने को उत्सुक करती हु आवाज़। नींद से जगाती हुई आवाज़। हालात के चक्र की की दस्तक देती हुई आवाज़। आज तक ज़हन में सुनाई देती है। उनका जाना--एक युग का चले जाना है। उनका अतीत हो जाना सचमुच पीड़ादायिक है। रामानुज प्रसाद सिंह जी को श्रद्धासुमन अर्पित हैं। दिल भरा हुआ है। ऑंखें भीगी हुई हैं। अंतर्मन में रेडियो से जुडी यादों का बवंडर सा है। उन्हें एक बार फिर से नमन। काश जाने वालों से कभी दोबारा भेंट का कोई सुअवसर मिला करता। काश वहां भी आकाशवाणी होती और हम सुन पाते उनकी आवाज़ में वहां के समाचार। उनके जाने से जो सदमा हम कुछ लोग महसूस कर रहे हैं उस  महसूस करते हुए हमें मिलजुल कर एक प्रयास करना होगा। रेडियो की दुनिया से जुड़े जो लोग अभी भी हमारे दरम्यान हैं। उन्हें संभालना होगा। उनकी आवाज़ें, उनके अनुभव, उनके ख्याल, उनकी रचनाएं, उनकी तस्वीरें बहुत कुछः सहेजने वाला है। आवाज़ की दुनिया से जुड़े उनके गुर भी उनसे पूछने होंगें तांकि रेडियो की दुनिया अमीर बनी रहे। निश्चिन्त रहिए ,रेडियो समाप्त नहीं होगा हैं तकनीकी रूप चाहे बदलता रहे। रेडियो का जादू कुछ कम हुआ अवश्य लगता है लेकिन जल्द ही लौटेगा रेडियो का करिश्मा। लोग टीवी से अब ऊबने लगे हैं। आओ सुनते हैं ज़रा ध्यान दीजिए। आवाज़ आ रही है---ये आकाशवाणी है! अब आप रामानुज प्रसाद सिंह से समाचार सुनिए......!!!                     ---रेक्टर कथूरिया


Monday, August 16, 2021

दूरदर्शन ने "रग रग में गंगा" की दूसरी श्रृंखला का शुभारंभ किया

प्रविष्टि तिथि: 16 AUG 2021 6:32PM by PIB Delhi

 ‘रग रग में गंगा’की पहली श्रृंखला को 1.75 करोड़ लोगों ने देखा था 


नई दिल्ली
: 16 अगस्त 2021: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने आज केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय जल शक्ति एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल के साथ सफल यात्रा-वृत्तांत कार्यक्रम, ‘रग रग में गंगा’की दूसरी श्रृंखला का अनावरण किया।

इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि दूसरी श्रृंखला का शुभारंभ ही अपने आप में पहली श्रृंखला की सफलता का पैमाना है, जिसे लगभग 1.75 करोड़ दर्शकों ने देखा था। मंत्री ने कार्यक्रम की टीम को बधाई दी और कहा कि दूसरी श्रृंखला से उम्मीदें अधिक हैं; यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनभागीदारी से जन आंदोलन तक का एक प्रयास है।

गंगा के कायाकल्प में योगदान देने के लिए लोगों को आमंत्रित करते हुए मंत्री ने कहा कि गंगा का सभी भारतीयों के साथ भावनात्मक जुड़ाव है। भारतीयों के साथ गंगा का आध्यात्मिक संबंध होने के साथ-साथ इसका बहुत बड़ा आर्थिक महत्व भी है। मंत्री ने ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि आज की जलवायु चुनौतियों से निपटने के प्रयासों में बच्चों को भागीदार बनाया जाना चाहिए।         

मंत्री महोदय ने कहा कि अगले तीन-चार साल में दूरदर्शन सबसे अधिक देखा जाने वाला चैनल बन जाएगा। उन्होंने कहा कि चैनल दूरदर्शन के दर्शकों की संख्या को बढ़ाने के लिए उचित सामग्री का निर्माण करेगा।

श्री ठाकुर ने आज़ादी के अमृत महोत्सव से शताब्दी समारोह तक के लिए विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के तहत किए जा रहे प्रयासों में भाग लेने के लिए लोगों को आमंत्रित करते हुए, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को दोहराया।

रग रग में गंगा यात्रा-वृत्तांत की दूसरी श्रृंखला में इस महान नदी के सांस्कृतिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और सामाजिक-आर्थिक विवरणों को शामिल किया जाएगा तथा यह निर्मलता व अविरलता के विषय पर केंद्रित होगा। यात्रा वृत्तांत एनएमसीजी द्वारा गंगा को बचाने के लिए किए जा रहे कार्यों को भी स्थापित करेगा और एनएमसीजी के सहयोग से इसे दूरदर्शन पर एक यात्रा वृत्तांत श्रृंखला 'रग रग में गंगा' के दूसरे सीजन को फिर से लेकर आएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा नदी की भव्यता और इसके संरक्षण की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करना है। काव्यात्मक रूप से फिल्माई गई श्रृंखला नदी की भव्यता और उसके परिदृश्य को गंगा नदी की आध्यात्मिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक विरासत और इसकी वर्तमान इकोलोजिकल स्थिति का लेखा-जोखा प्रस्तुत करेगी। यात्रा वृत्तांत, जिसमें 26 एपिसोड शामिल हैं, इस कार्यक्रम के एंकर जाने-माने अभिनेता राजीव खंडेलवाल है और 21 अगस्त 2021 से प्रत्येक शनिवार और रविवार को रात 8:30 बजे दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित किया जाएगा।

श्रोताओं को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार तीन साल की छोटी सी अवधि में इतनी लंबी गंगा नदी को दस सबसे अधिक स्वच्छ नदियों में स्थान दिलाने में सफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शुरू किए गए सभी कार्यक्रमों ने अपने लक्ष्यों को समय से पहले हासिल कर लिया है और यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 4 पी के मंत्र - राजनीतिक इच्छाशक्ति, सार्वजनिक खर्च, हितधारकों के साथ साझेदारी और लोगों की भागीदारी का परिणाम है।

श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि रग रग में गंगा की दूसरी श्रृंखला अर्थ-गंगा को समर्पित होगी, जिसने हमारी सभ्यता के विस्तार की नींव रखी। उन्होंने लोगों को अमृत महोत्सव की इस अवधि के दौरान गंगा के प्रति हुई अतीत की भूल को सुधारने के प्रयासों में योगदान देने का संकल्प लेने के लिए आमंत्रित किया।

पृष्ठभूमि:

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और दूरदर्शन ने गंगा की वर्तमान स्थिति तथा उसके अतीत के गौरव को फिर से जीवंत करने की जरूरत के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए आपस में भागीदारी की है।

फरवरी, 2019 में 'रग रग में गंगा', जोकि भारत की सबसे पवित्र नदी- गंगा पर आधारित एक यात्रा वृत्तांत है, का राष्ट्रीय प्रसारक दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर एक प्रमुख कार्यक्रम के रूप में शुभारंभ किया गया था। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा शुरू की गई 21-कड़ियों वाली इस श्रृंखला में शक्तिशाली गंगा की 2525 किलोमीटर लंबी यात्रा को उसके उद्गम स्थल गोमुख ग्लेशियर से लेकर गंगासागर, जहां वह बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है, तक कवर किया गया। जाने-माने अभिनेता राजीव खंडेलवाल की उद्घोषणा से लैस इस यात्रा वृत्तांत में गंगा के किनारे बसे सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक महत्व के 20 शहरों को शामिल किया गया था। इस नदी से जुड़े सांस्कृतिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक तथ्यों और इसके किनारे बसे लोगों से जुड़े विवरणों को कवर करने के क्रम में गंगा की सफाई से जुड़े संदेश, इस नदी को साफ रखने में जनता की भागीदारी और इस नदी की सफाई व इसका कायाकल्प करने के लिए एनएमसीजी द्वारा किए जा रहे कार्यों को इस यात्रा वृत्तांत की विषय-वस्तु और प्रारूप के रूप में गुंथकर प्रस्तुत किया गया।

पिछली श्रृंखला गंगासागर में समाप्त हुई थी, जहां गंगा बंगाल की खाड़ी में मिल गई थी। इस श्रृंखला का भाग-दो मुर्शिदाबाद जिले में समाप्त हो सकता है, जहां गंगा भारत को छोड़ती हुई बांग्लादेश में प्रवेश करती है और पद्मा नदी बन जाती है। 26 एपिसोड की इस श्रृंखला में दर्शकों को गंगा को फिर से जीवंत करने की जरूरत और इस नदी द्वारा सदियों से उन्हें दिए गए बहुमूल्य उपहारों के प्रति उनके कर्तव्यों का एहसास कराने से जुड़े कई संदेश अंतर्निहित हैं। व्यापक शोध पर आधारित, यह कार्यक्रम गंगा की स्वच्छता की दिशा में सरकार द्वारा किए गए विभिन्न उपायों के साथ-साथ इस संदर्भ में इसकी वर्तमान स्थिति के बारे में बतायेगा और लोगों से इसके लिए काम करने का आह्वान करेगा।

'रग रग में गंगा-II' में गंभीरता और मनोरंजन का एक संतुलित मिश्रण है। यह श्रृंखला शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाके को दर्शकों को गंगा की समृद्ध विरासत का स्वाद लेने के लिए प्रेरित करेगी। 'रग रग में गंगा-I' की अपार लोकप्रियता को देखते हुए, यह उम्मीद की गई है कि अनूठी और उच्च गुणवत्ता वाली यह श्रृंखला एक बार फिर दर्शकों के साथ भावनात्मक तौर पर जुड़ पायेगी। एक यात्रा वृत्तांत होने के साथ-साथ यह श्रृंखला जल संरक्षण और जल स्वच्छता (अविरलता और निर्मलता) के संदेश को फैलाने में भी मदद करेगी, जोकि समय की मांग है।

प्रसारण का समय



Wednesday, August 11, 2021

सोशल मीडिया के महत्व को फिर पहचाना लोक संपर्क विभाग ने

 11th August 2021 at 9:26 PM

सरकार की उपलब्धियों को सोशल मीडिया के पर प्रसारित करने की ज़रूरत-अनिंदिता मित्रा


चंडीगढ़
: 11 अगस्त 2021: (गुरजीत बिल्ला//मीडिया स्क्रीन)::

कोई ज़माना था जब सोशल मीडिया से जुड़े लोगों और मंचों को बहुत छोटा करके देखा जाता था। उस दौर में इसे  इससे सबंधित वर्ग को बहुत ज़्यादा अंडरएस्टिमेट किया गया। इसी नज़रअंदाज़ी के चलते धीरे धीरे इसने इतना ज़ोर पकड़ा लिया की यह मुख्य धरा के मीडिया को प्रभावित करने लगा। आज टवीटर और फेसबुक जैसे मंचों को बेहद महत्वपूर्ण घोषणाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यूटयूब पर छोटी छोटी फ़िल्में और गीतों की एल्बम रिलीज़ होने लगी हैं। कहा जा सकता है कि सोशल मीडिया ने अपन अलोहा मनवा लिया है। मुख्य ड्सरा का मीडिया भी अपने प्रचार प्रसार के लिए इसका सहारा ले रहा है। व्हाटसअप्प ने तो इसकी लोकप्रियता को चार चाँद लगा दिए हैं। ऐसे में पंजाब सरकार के लोक सम्पर्क विभाग ने भी इसके जादू को स्वीकार किया है। इसके इस्तेमाल की बाकायदा सिफारिशें होने लगीं हैं। 

आज के दौर में पंजाब सरकार की उपलब्धियों को घर-घर पहुँचाने के लिए सूचना एवं लोक संपर्क विभाग को नये युग के प्रचार साधन सोशल मीडिया का अधिकतम प्रयोग करना चाहिए। उक्त विचार विभाग की डायरैक्टर श्रीमती अनिंदिता मित्रा ने आज यहां विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग के दौरान व्यक्त किये। मीटिंग में इसकी चर्चा ने काफी समय लिया। इस सदुपयोग पर कई बातें हुईं। 

इस अवसर पर श्रीमती मित्रा ने कहा कि सूचना एवं लोक संपर्क विभाग सरकार और लोगों के बीच सेतु का काम करता है जो कि सरकार की जन कल्याण स्कीमें और सरकार द्वारा जनहित में लिए फ़ैसलें अखबारों, टी.वी., रेडियो के द्वारा प्रचार करता आ रहा है। परंतु अब दिन-प्रतिदिन सूचना प्रौद्यौगिकी के परिणामस्वरुप प्रचार साधनों में आ रही तबदीलियों को देखते हुए समय की मांग अनुसार सरकार के कामों का प्रचार सोशल मीडिया के द्वारा भी किया जाना चाहिए। इस तरह छुटपण या हिकारत की नज़र से देखा जाने वाला सोशल मीडिया अब सम्मान पा रहा है। सोशल मीडिया की अहमियत को एक तरह से मान्यता मिल रही है। 

श्रीमती मित्रा ने विभाग के अधिकारियों को हिदायत की कि वह लोगों की समस्याओं संबंधी  फीडबैक तुरंत विभाग को दें जिससे सरकार इन समस्याओं को जल्द दूर कर सके।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा जन-समर्थकी नीतियों को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए 100 से अधिक अलग-अलग स्थानों पर एल.एफ.डी. स्थापित की गई हैं। यह एल.एफ.डीज़. स्थापित करने का कार्य अगस्त महीने के अंत तक मुकम्मल कर दिया जायेगा।

अतिरिक्त सचिव सूचना एवं लोक संपर्क विभाग सेनू दुग्गल, आई.ए.एस. ने मीटिंग को संबोधन करते हुये कहा कि कोविड -19 के कारण पैदा हुई स्थिति में सरकार द्वारा इस महामारी से निपटने के लिए समय-समय पर जारी हिदायतों और ऐडवायज़रियों को सोशल मीडिया के द्वारा ही बहुत कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना संभव हो सका है।

मीटिंग में विशेष तौर पर अतिरिक्त डायरैक्टर ओपिन्दर सिंह लांबा, ज्वाइंट डायरैक्टर अजीत कंवल सिंह हमदर्द, ज्वाइंट डायरैक्टर रणदीप सिंह आहलूवालीया, ज्वाइंट डायरैक्टर हरजीत सिंह ग्रेवाल, डिप्टी डायरैक्टर पी.एस. कालड़ा, डिप्टी डायरैक्टर इशविन्दर सिंह ग्रेवाल, डी.सी.एफ.ए. गगनदीप बस्सी और समूह जि़ला लोक संपर्क अधिकारी और मुख्यालय में तैनात लोक संपर्क अधिकारी उपस्थित थे।

Saturday, July 17, 2021

JMI की VC प्रो. नजमा अख्तर दानिश के परिवार से मिलीं

Saturday 17 July 2021 at 5:29 PM

 शोक व्यक्त करने फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी के घर पहुंची 


नई दिल्ली
: 17 जुलाई 2021: (मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन):: 

हर संवेदनशील वर्ग दानिश सिद्दीकी साहिब के चले जाने से आहत है। हर तरफ शोक की लहर है। हर सच्चे कलमकार के मन में उदासी है। हालांकि कुछ  लोग जश्न भी मना रहे हैं लेकिन वक़्त उनका भी हिसाब रख रहा है। एक समय आएगा जब लोगों को इनके जश्न की खबरें बताएंगी कि ये लोग हत्यारों के साथ खड़े थे। हर वर्ग दानिश साहिब के परिवार के साथ संवेदना और शोक व्यक्त कर रहा है। 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) की कुलपति प्रो. नजमा अख्तर; अफगान सशस्त्र बलों और तालिबान के बीच संघर्ष को कवर करते हुए अफगानिस्तान में मारे गए जामिया के पूर्व छात्र एवं फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी के घर गईं। 

जामिया नगर स्थित उनके आवास पर उन्होंने दानिश के पिता प्रो. अख्तर सिद्दीकी और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। उनके साथ कुलसचिव और विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।


कुलपति ने प्रो. सिद्दीकी को सांत्वना दी और दानिश के बारे में उनसे लगभग 40 मिनट तक कई बातें कीं। उन्होंने दानिश को अपने पिता की तरह एक सच्चा फाइटर करार दिया, जिसे वह काफी लंबे समय से जानती हैं।

प्रो. अख्तर ने कहा कि दानिश ने सच्चाई को दुनिया के सामने लाने के लिए लगन से काम किया और हमेशा गलत के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने कहा "दानिश का निधन न केवल उनके परिवार और जामिया बिरादरी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।"  

कुलपति ने प्रो. सिद्दीकी को बताया कि आने वाले मंगलवार को जामिया अपने विश्वविद्यालय परिसर में एक शोक सभा आयोजित करेगा| साथ ही उसी समय विश्वविद्यालय परिसर में दानिश के अनुकरणीय कार्यों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी ताकि छात्र इससे प्रेरणा ले सकें।


दानिश साहिब यहीं हैं हमारे आसपास-हमारे दरम्यान

 लानत है उनकी मौत का जश्न मनाने वालों पर 


नयी दिल्ली
: 17 जुलाई 2021: (मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन+मित्र लोग)::

प्रेस क्लब आफ इण्डिया ने दानिश सिद्दीकी साहिब के याद में आज रात करीब 7:25 पर कैंडल मार्च किया है। उनकी चर्चा करनी ज़रूरी है शायद इसी बहाने उन लोगों की अंतरात्मा जाग उठे जो खुद को पत्रकार समझते  हैं लेकिन साडी उम्र भांड बने रहते हैं। पत्रकारिता की समझ उन्हें उम्र भर समझ नहीं आ पाती। काश ऐसे लोग दानिश साहिब की कुर्बानी के इस मौके पर अपनी डयूटी के प्रति सजग हो सकें। 

दुःखद है लेकिन सच है कि जब खुद को मीडिया का सरगर्म और बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा समझने और कहने वाले बहुत से लोग अपने अपने राजनीतिक आकाओं की चमक दमक को दर्शाते हुए अपने अपने कैमरे और कलम   सेट करने में व्यस्त थे, उनके आगे पीछे घूम रहे थे उस समय भी दानिश सिद्दीकी एक गौरवशाली सच्चे मुस्लिम होने के के साथ साथ प्रतिबद्ध पत्रकार का फ़र्ज़ भी निभा रहे थे। 

अलग अलग मामलों  में अलग अलग जगहों पर अलग अलग वक़्तों में दानिश साहिब ने दिखाया कि अगर कलम और कैमरा पकड़ो तो उसकी लाज कैसे रखी जाती है। जान हथेली पर और हौंसला दिल व दिमाग में दानिश साहिब ने बहुत पहले सीख लिया था। दानिश साहिब ने 40 की उम्र तक पहुँचने से पहले ही बहुत कुछ ऐसा क्लिक किया जो दस्तावेज़ी की तरह है। आने वाले वक्तों में  और बढ़ जाएगी। 

उल्लेखनीय है कि पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता के क्षेत्र का अमेरिका का सर्वोच्च पुरस्कार है। इसकी शुरुआत 1917 से हुई थी। 2021 के लिए भारतीय मूल की पत्रकार मेघा राजगोपालन को भी अंतरराष्ट्रीय रिपोटिंग के दिया जाएगा। दानिश सिद्दीकी साहिब को साल 2018 में  पुलित्जर पुरस्कार  से नवाजा गया था, ये अवॉर्ड उन्हें रोहिंग्या मामले में कवरेज के लिए मिला था। बहुत बड़ी कवरेज थी यह। 

गौरतलब है कि दानिश सिद्दीकी ने अपने करियर की शुरुआत एक टीवी जर्नलिस्ट के रूप में की थी, बाद में वह फोटो पत्रकार बन गए थे। आज भी बहुत से लोग मीडिया का कार्ड जेब में दाल कर और कैमरा उठा कर समझते हैं कि वे फोटोग्राफर बने हुए हैं लेकिन उन्हें कुछ भूलता है तो बस अपनी डयूटी। या फिर अपने अपने फ़र्ज़। अपने आकाओं की तरफ से होती आवभगत और सेवा सम्मान उन्हें सपनों में नहीं भूलता। 

बस यही फरक है दानिश साहिब ने हर वक़्त अपनी ड्यूटी याद रखी। जान तक कुर्बान कर दी और अमन हो गए। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने दानिश सिद्दीकी के निधन पर शोक जताया है। ठाकुर ने कहा कि वह अपने पीछे अपना शानदार काम छोड़ गए हैं। हकीकत भी यही है। 

उन्हें याद करते हुए, उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए पुलित्जर पुरस्कार विजेता भारतीय फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और जामिया मिलिया इस्लामिया में शनिवार को कैंडल लाइट मार्च निकाला गया। अन्य हमदर्द लोग भी इसमें पहुंचे। सब के मन में दर्द था। करीब 40 साल के सिद्दीकी की शुक्रवार को अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में स्पिन बोल्डक जिले में अफगान बलों और तालिबान के बीच संघर्ष के दौरान मृत्यु हो गयी। वह कंधार के मौजूदा हालात की कवरेज कर रहे थे। बहुत से दुसरे मामलों की तरह यह भी उनका मिशन था। 

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में कैंडल लाइट मार्च के दौरान वर्किंग न्यूज कैमरामैन एसोसिएशन (डब्ल्यूएनसीए) के अध्यक्ष एस. एन. सिन्हा ने कहा कि युद्ध, दंगों और लोगों की तकलीफें तस्वीरों के जरिए सभी तक पहुंचा कर सिद्दीकी अपने पेशे में शीर्ष पर पहुंचे थे। शीर्ष सभी की किस्मत में भी नहीं होता। हर किसी के जज़्बे में दानिश साहिब जैसा जूनून भी नहीं होता। एस. एन. सिन्हा ने कहा कि उन्होंने पूरे जुनून और समर्पण के साथ सभी तस्वीरें लीं, खबरों का कवरेज किया और हमेशा मुश्किल में फंसे लोगों पर ध्यान दिया। जो कुछ सिन्हा साहिब ने कहा इससे बड़ा समान शायद कोई न हो। उनके मित्र और उनके पुराने साथी भी आहत हैं इस शहादत से। जामिया मिलिया के पुराने छात्र मोहम्मद मेहरबान ने मास कम्युनिकेशन के छात्र सृजन चावला के साथ मिलकर विश्वविद्यालय के गेट नंबर 17 पर कैंडल लाइट मार्च का आयोजन किया जिसमें 500 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।मोहम्मद मेहरबान ने कॉलेज में अपने सीनियर दानिश सिद्दीकी को याद किया। कभी कभी सीनियर लोग   जो किताबों में भी नहीं मिलता। 

दानिश साहिब को आर्थिक स्थितियों की भी पूरी समझ थी। देश कीध जा रहा है उन्हें मालुम था। सिद्दीकी ने अर्थशास्त्र विषय से स्नातक की पढ़ाई की थी। उन्होंने 2007 में जनसंचार विषय में स्नात्कोत्तर किया था। दानिश सिद्दीकी 2011 से समाचार एजेंसी रॉयटर्स के साथ बतौर फोटो पत्रकार काम कर रहे थे। उन्होंने अफगानिस्तान और ईरान में युद्ध, रोहिंग्या शरणार्थी संकट, हांगकांग में प्रदर्शन और नेपाल में भूकंप जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं की तस्वीरें ली थीं। इन कहानियों का सिलसिला काफी लम्बा है। दानिश साहिब तो रुखसत हो गए लेकिन ु का काम लगातार अपनी मौजूदगी दर्शाता रहेगा। 

आखिर में लानत उन लोगों पर ज़रूरी है जो दानिश साहिब की मौत का जश्न मना रहे हैं। शर्म आनी चाहिए ऐसे बेशर्म लोगों को। इस तरह के जश्न मना कर वे अपनी औकात ही दिखा रहे हैं। बता रहे हैं की वे सचमुच साम्प्रदायिकता की ज़हर से भरे हुए खतरनाक लोग हैं। इन लोगों को याद रखना कि  रहेंगे रंग बदल कर रूप बदल कर।  किसी न किसी के हाथ में कोई न कोई कैमरा  इन लोगों को डराता भी रहेगा और भी  बेनकाब भी करता रहेगा।  दानिश साहिब यहीं हैं हमारे आसपास। हमारे दरम्यान। 

जामिया ने दानिश सिद्दीकी की दुखद मौत पर शोक व्यक्त किया

अब पत्रकार कमेंटेटर बन गए हैं-डा. सिमरन सिद्धू

Saturday 17th July 2021 at 1:57 PM

 जीजीएन खालसा कालेज के वेबिनार में हुई बहुत ही अर्थपूर्ण बातें  

लुधियाना:16 जुलाई 2021: (कार्तिका सिंह//मीडिया स्क्रीन Online)::

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गुरु नानक खालसा कॉलेज, गुजरांवाला, पत्रकारिता विभाग, लुधियाना ने "भारतीय पत्रकारिता:मुद्दे और चुनौतियां" पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। प्रो. जसमीत कौर, पी.जी. पत्रकारिता विभाग द्वारा वेबिनार शुरू किया गया था और विभाग के समन्वयक डॉ. सुषमिंदरजीत कौर ने इस वेबिनार के विषय और इसके महत्व से दर्शकों को अवगत कराने के लिए अपने दूरदर्शी शब्दों को बहुत ही खूबसूरती से उपयोग किया। 

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के पूर्व कुलपति डॉ एस. पी. सिंह जो गुजरांवाला खालसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष भी हैं ने विशिष्ट अतिथियों, प्रख्यात वक्ताओं और ज्ञानवर्धक श्रोताओं का स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में महामारी के इस कठिन समय में ऐसे वेबिनार आयोजित करने में विभाग के प्रयासों की सराहना की। अपने बहुमूल्य विचार सभी  सांझे करते हुए उन्होंने कहा कि आज का परिदृश्य ऐसा है कि न केवल भारतीय पत्रकारिता बल्कि दुनिया भर की पत्रकारिता भी विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों का सामना कर रही है। 

उन्होंने आगे कहा कि पत्रकारिता का क्षेत्र सूचना को 'संक्रमित' करने के बजाय तथ्यात्मक सूचना के प्रसार के अपने मूल मार्ग से भटक गया है। वेबिनार का नेतृत्व पत्रकारिता और जनसंचार विभाग, दोआबा कॉलेज, जालंधर की प्रमुख डॉ. सिमरन सिद्धू  ने बहुत ही समझदारीऔर दूरदर्शिता पूर्ण बातें कह कर किया और बहुत ही अर्थपूर्ण शब्दों के साथ बहुत ही काम की बातें कहीं।  

उन्होंने कहा कि पत्रकार कमेंटेटर बन गए हैं क्योंकि वे केवल 'दृश्य' की बहुत गहराई से व्याख्या करते हैं।  उसी व्याख्या में डॉ. अ. स. नारंग प्रोफेसर राजनीति विज्ञान और मानवाधिकार शिक्षा के पूर्व समन्वयक, इग्नू ने पत्रकारों के सामान्य दृष्टिकोण पर जोर दिया क्योंकि "पत्रकारों के लिए यह कहना आसान नहीं है कि क्या कहना है और क्या नहीं कहना है।" 

कारोबारी एप्रोच लगातार बढ़ने से सप्लिमेंटों का जो दबाव पत्रकारों और समाज पर बढ़ा है अक्सर उसकी चर्चा कम होती है। सभी अख़बारों को विज्ञापन चाहिएं। कोई भी उनसे नाराज़गी मौल नहीं लेना चाहता। इस लिए अक्सर इस पर ख़ामोशी छ जाती है। लेकिन कटु सत्य है की इसने खबर की निष्पक्षता और तलाश को प्रभावित किया है। किसी भी ऐसे इन्सान का पत्रकार बनना मुश्किल हो गया है जो विज्ञापन नहीं जुटा सकता। ऐसी निराशाजनक स्थिति के बावजूद आशाभरी बातें की मैडम चित्लीन सेठी ने। उन्होंने तकनीकी विकास का फायदा उठाने की सलाह दी। यह बहुत ही नई उम्मीद है। 

श्रीमती चितलीन कौर सेठी, एसोसिएट एडिटर, द प्रिंट ने टिप्पणी की कि जिनके हाथ में मोबाइल फोन है, वे वास्तव में एक संभावित पत्रकार हैं। युवाओं से ऐसी उम्मीद को सुसव्ग्तं कहना बनता है। आम नागरिकों को यह बात एक नहीं हिम्मत देगी। कुर्प्ष्ण के खिलाफ उनका हौंसला बढ़ाएगी। 

इसी बीच मिस्टर हरप्रीत सिंह, टीवी एंकर, द हरप्रीत सिंह शो, कनाडा ने बताया कि पत्रकार बनना चाहने वालों की ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग धीरे-धीरे किया जा सकता है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंदर सिंह ने सभी गणमान्य वक्ताओं और दर्शकों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि सटीक जानकारी के प्रसार में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर देने के लिए विभाग ने हमेशा अथक और नए प्रयास किये हैं।