Friday, October 11, 2013

"इंडोनेशिया पड़ोस में सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी"

10-अक्टूबर-2013 19:24 IST
इंडोनेशिया के कोम्पास समाचार पत्र को प्रधानमंत्री का साक्षात्कार
प्र. भारत और इंडोनेशिया के बीच पुरानी सभ्यता से संबंध चले आ रहे हैं और हम

रणनीतिक साझेदार हैं। आपकी यात्रा से इंडोनेशिया को क्या मुख्य उम्मीदें हैं ?

उत्तर . हम इंडोनेशिया को अपने पड़ोस में सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी और भारत की पूर्व की ओर देखो नीति के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में मानते हैं। हमारे दोनों देश दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले देशों में भी शामिल हैं। हम दोनों बहुलवादी लोकतंत्र हैं जिनके समुद्री सुरक्षा और शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध एशिया के उद्भव सहित अनेक साझा हित हैं।  हमारे सभ्यतागत संबंधों पर आधारित जो सिर्फ कला और संस्कृति का ही संगम नहीं है बल्कि विचारों , मूल्यों और सामाजिक लोकाचार का एक संगम है, इसमें व्यापार और निवेश सहित अनेक व्यापक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। रामायण और महाभारत , प्राचीन मंदिरों और स्तूप की वास्तुकला , डिजाइन और हथकरघा वस्त्रों की रूपांकनों में समानता , बुजुर्गों और बुद्धिमानों के लिए सम्मान, सब हमारी साझा विरासत हैं। हमारे दोनों देशों के नेताओं ने भी हमारे अपने स्वतंत्रता संघर्ष , एफ्रो एशियाई एकजुटता के दौरान अपने अनुभवों को साझा किया और गुट निरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व किया।

     हमारे संबंध आज मजबूत , बहुआयामी सामरिक साझेदारी के रूप में निखरे हैं।  हम संयुक्त राष्ट्र , गुटनिरपेक्ष आंदोलन , जी -20 , ईएएस और अन्य आसियान तंत्र , आईओआर-एआरसी तथा विश्व व्यापार संगठन जैसे  क्षेत्रीय , बहुपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करते हैं।  2011 में राष्ट्रपति युधोयोनो की भारत यात्रा से हमारे संबंधों को अधिक गति मिली। मैं अपनी यात्रा से मजबूत और प्रगाढ़ सामरिक संबंधों, व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने  और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को व्यापक बनाने की उम्मीद कर रहा हूं।

प्र. भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार 20 अरब डॉलर का है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के संदर्भ में, आप क्या सोचते हैं कि हमारे देशों के बीच व्यापार/निवेश संबंधों पर कैसे सुधार किया जा सकता है ? एक उपयोगी भारत-इंडोनेशिया भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र कौन से हैं?

उत्तर . द्विपक्षीय व्यापार में रुझान सकारात्मक हैं, हालांकि वैश्विक वित्तीय स्थिति के कारण व्यापार में 2012-13 में मामूली गिरावट देखी गई  और 20 अरब डॉलर का हुआ। हमें 2015 तक 25 अरब अमरीकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने का पूरा भरोसा है। हमें विश्वास है कि हमारी क्षमता इससे बहुत अधिक है।

     हमें अपने व्यापार में विविधता लानी चाहिए, व्यापार और निवेश करने के लिए बाधाओं को सुलझाने और दोनों दिशाओं में निवेश के उच्च प्रवाह को प्रोत्साहित करना चाहिए।  द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) से पर दोनों पक्षों के लिए द्वार खुलेंगे और वृद्धि को मजबूत प्रोत्साहन मिलेगा।

     आसियान भारत सेवाओं और निवेश समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर करने, 2015 के अंत तक क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी पर वार्ता (आरसीइपी) और आसियान आर्थिक समुदाय के रूप में उभरने से  भी इंडोनेशिया के साथ हमारे व्यापार एवं निवेश संबंधों पर सकारात्मक असर होगा।

     इंडोनेशिया से हमारा आयात बड़े पैमाने पर होता रहा है जो विविधतापूर्ण चाहिए। भारत कृषि उत्पाद, ऑटोमोबाइल घटकों , इंजीनियरिंग सामान , आईटी , फार्मा, मांस और मांस उत्पादों तथा जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों सहित माल की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत हो सकता है।

     भारतीय कंपनियां इंडोनेशिया को आकर्षक निवेश राष्ट्र के रूप में देखती हैं।  हम पहले ही आपके देश में बुनियादी सुविधाओं , बिजली , कपड़ा , इस्पात , मोटर वाहन , खनन , बैंकिंग और एफएमसीजी के निर्माण में महत्वपूर्ण निवेश कर चुके हैं।   टाटा , बिड़ला , रिलायंस , एसबीआई , और कई अन्य सहित सभी प्रमुख भारतीय कंपनियों की इंडोनेशिया में उपस्थिति है।  इसकी तुलना में भारत में इंडोनेशिया के निवेश अपेक्षाकृत सीमित हैं। मैं इंडोनेशियाई कंपनियों को आमंत्रित करता हूं कि वे उन भारी निवेश के अवसरों को देखें जो भारत बुनियादी ढांचे, रसद , आतिथ्य सत्कार और सेवा क्षेत्रों में उपलब्ध कराता है।  यह दोनों देशों के आपसी हित में होगा यदि इंडोनेशिया शिक्षा, स्वास्थ्य , दवाइयों और बंदरगाह के विकास के क्षेत्र में भारतीय निवेश को आमंत्रित करे।

प्र. आपकी यात्रा के दौरान कौन से मुख्य करारों / समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने जा रहे है ?

उत्तर . दोनों पक्षों ने अनेक समझौता ज्ञापन तैयार किए हैं।  उनमें से कुछ सरकारी मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच हैं  और अन्य शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच हैं।  ये हमारे संबंध के बहुआयामी चरित्र को प्रतिबिंबित करेंगे।

प्र. आसियान समुदाय 2015 में अस्तित्व में आ जाएगा।  भारत ने दिसंबर, 2012 में भारत आसियान स्मारक शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी की। आप आसियान समुदाय में भारत की क्या भूमिका देखते हैं?

उत्तर . मैं ब्रुनेई से सीधे जकार्ता आ रहा हूं जहां हमने 11 वां आसियान भारत शिखर सम्मेलन आयोजित किया। मैंने कई अवसरों पर कहा है कि आसियान के साथ हमारे संबंध हमारी पूर्व की ओर देखो नीति पर आधारित हैं। हम आसियान सहयोग और एकीकरण में प्रगति और व्यापक क्षेत्रीय सहयोग और एकीकरण की कोशिश में आसियान नेतृत्व की प्रशंसा करते हैं। हमें दृढ़ विश्वास है कि इस प्रक्रिया में आसियान की केन्द्रीयता सहकारी , नियम आधारित खुली और समावेशी क्षेत्रीय संरचना के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

     हम आसियान और आसियान केंद्रित प्रक्रियाओं में इंडोनेशिया के नेतृत्व की भूमिका को महत्व देते हैं।  हम पिछले साल दिसंबर में नई दिल्ली में आयोजित स्मारक शिखर सम्मेलन के दौरान अपने संबंधों को सामरिक भागीदारी के स्तर तक लाए। आसियान के साथ हमारे संबंधों में  राजनीतिक , सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक, सांस्कृतिक सहयोग के व्यापक क्षेत्र शामिल हैं।

     हम 2015 तक आसियान समुदाय के विकास की बेसब्री से उम्मीद कर रहे हैं और हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा ध्यान क्षमता निर्माण पर और कनेक्टिविटी पर रहा है ।  हमने कई उद्यमिता विकास केंद्र, अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण के लिए केंद्र और सीएलएमवी देशों में आइटी केंद्र और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की है। हम आसियान देशों को 1000 से अधिक छात्रवृत्ति प्रदान करते हैं।  हम भारत और आसियान को और करीब लाने के लिए भारत - म्यांमार- थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग के निर्माण की अपनी पहल के जरिए और कनेक्टिविटी पर आसियान मास्टर प्लान को समर्थन दे के लिए सक्रिय रूप से भौतिक और संस्थागत कनेक्टिविटी की पहल में लगे हुए हैं।

प्र. चीन एशिया प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख भागीदार बन गया है।  इस संदर्भ में आप एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को कैसे देखते हैं? एशिया प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय विवादों, सीमा मुद्दों और जापान एवं चीन और भारत एवं चीन के बीच अन्य मुद्दों के बीच कैसे मजबूत संबंध बन सकता है ?

उत्तर . भारत और चीन दो सभ्यतागत पड़ोसी हैं। आर्थिक सहयोग हमारे संबंधों का बहुत महत्वपूर्ण भाग है और यह हमारी दो अर्थव्यवस्थाओं की विकास क्षमता को अधिक से अधिक सहयोग के लिए इंजन प्रदान कर सकता है और यह एशिया और उससे परे भी समृद्धि में योगदान कर सकता है।  हमारे बीच मतभेद हैं लेकिन हमने लगातार एक परिपक्व और पारस्परिक रूप से लाभप्रद संबंधों का निर्माण किया है।  हमने अपनी सीमाओं पर शांति और सौहार्द बनाए रखा है। हमने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग किया है।

     मैं मानता हूं कि आज दुनिया में अपनी जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी पक्षों से सहकारी प्रयासों के लिए पर्याप्त जगह है।  इस सदी में, जब वैश्विक और अंतर - निर्भरता क्षेत्रीय निर्भरता तेजी से बढ़ रही हैं तब सभी देशों की शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए  सहयोग , परामर्श और समन्वय , शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए मतभेद की अंतरराष्ट्रीय कानून और संकल्प के रूप में भी सम्मान अपरिहार्य हैं।  क्षेत्रीय मंचा इस प्रक्रिया में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।  इसलिए हम पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन , आसियान क्षेत्रीय मंच , एडीएमएम $ और क्षेत्र में अन्य सहकारी व्यवस्थाओं कोबहुत महत्वपूर्ण मानते हैं।  क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी भी हमारे क्षेत्र के लिए प्रमुख पहल है।

प्र. भारतीय अर्थव्यवस्था उच्च वृद्धि दर से नीचे आ रही है। ज्यादातर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करने वाली वैश्विक मंदी के अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था के सुस्त प्रदर्शन के लिए कौन से मुख्य कारण हैं ?

उत्तर . आप पिछले साल के आर्थिक प्रदर्शन को एक तरफ रख दें , तो पिछले नौ वर्षों में , भारतीय अर्थव्यवस्था प्रतिवर्ष लगभग 8 प्रतिशत की औसत वार्षिक दर से बढ़ी है।  यह किसी भी पिछले एक दशक में भारत द्वारा हासिल की गई उच्चतम वृद्धि दर है।  पिछले साल हमारी वृद्धि दर यूरो क्षेत्र और अमरीका एवं जापान में धीमी गति से वृद्धि सहित , आंशिक रूप क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण घटकर  5 प्रतिशत पर आ गई है।  भारत अपनी तेल की आवश्यकता का करीब 80 प्रतिशत आयात करता है और तेल की बढ़ती कीमतों एवं निर्यात घटने ने हमारे व्यापार संतुलन को चोट पहुँचाई है। भारत में कुछ आपूर्ति संबंधी बाधाएं भी हैं जिनसे हम नीति और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से निपट रहे हैं।

     हालांकि, हमारे आर्थिक बुनियादी कारक मजबूत बने हुए हैं।  हमारी बचत और निवेश दर अब भी सकल घरेलू उत्पाद के 30 प्रतिशत से अधिक है। अपने पूंजी उत्पादन अनुपात को देखते हुए हम मध्यम अवधि में प्रति वर्ष 8 प्रतिशत की वृद्धि दर को बहाल कर सकते हैं।  हमने घरेलू निवेश को बढ़ावा देने के लिए और अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करने, वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाने तथा कर व्यवस्था में सुधार लाने एवं उसे सरल करने के लिए अनेक उपाय किए हैं।  हमने अपनी आबादी के कमजोर वर्गों के लिए पात्रता कार्यक्रमों की एक विस्तृत रेंज शुरू की है जिसके लिए सरकार के विशेष ध्यान की जरूरत है।  हम राजकोषीय और चालू खाता घाटे से उद्देश्यपूर्ण ढंग से निपट रहे हैं। इसके साथ ही, हम अपनी उदार  व्यापार व्यवस्था बनाए रखेंगे। मुझे विश्वास है कि इन उपायों का असर जल्द दिखाई देगा।

प्र. भारतीय रुपये में तेज गिरावट चिंता का विषय रहा है। इंडोनेशियाई रुपिया भी गिरा है।  हमें कौन सी सावधानियों /उपायों की जरूरत है जो विकासशील देश मुद्रा में स्थिरता लाने के लिए कर सकते हैं?

उत्तर . उभरती अर्थव्यवस्थाएं  लंबे समय से वैश्विक आर्थिक संकट और इसके पटरी पर आने की गति असमान एवं अनिश्चित रहने से प्रभावित हुई हैं। हमारे निर्यात में और निवेश की आवक में मंदी ने वृद्धि और भुगतान संतुलन को प्रभावित किया है।  भारत और इंडोनेशिया जी -20 के हिस्सा हैं। नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय समन्वय और संचार बढ़ाने की जरूरत पर सितंबर में सेंट पीटर्सबर्ग में जी -20 शिखर सम्मेलन में बल दिया गया था। निरंतर वैश्विक आर्थिक सुधार से उभरती अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होगा।

     हालांकि, हम में से प्रत्येक को भी, आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए विदेशी निवेश आकर्षित करने और निर्यात को बढ़ावा देने , मुद्रा अवमूल्यन से उत्पन्न प्रतिस्पर्धा से लाभ उठाने सहित उपयुक्त राष्ट्रीय कदम उठाने की जरूरत है।

प्र. भारत और इंडोनेशिया में 2014 के चुनावों के लिए कमर कस रहे हैं । वे कौन से मुख्य मद्दें हैं जो भारत में मतदाताओं को प्रभावित करेंगे ?

उत्तर . हम दोनों ही मजबूत लोकतंत्र हैं और चुनाव दोनों के जीवन का एक हिस्सा है।  आज के भारत में करीब 800 मिलियन  मतदाताओं शिक्षित है और राजनीतिक रूप से अच्छी तरह से वाकिफ हैं।  कई युवा हैं और ऊर्जा से भरपूर हैं, उद्यमी और महत्वाकांक्षा से भरे हुए हैं।  उन्हें अवसरों , रोजगार, शिक्षा , कौशल विकास , भोजन और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच के जरिए अपने और अपने बच्चों के लिए बेहतर जीवन की तलाश है।  ये सभी मुद्दे आने वाले चुनावों में छाए रहने की उम्मीद है।

प्र. भारत विशेष रूप से व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों , प्रशिक्षण और शिक्षा की स्थापना में , विकास भागीदारी में बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आपकी नजर में और क्या किया जा सकता है ?

उत्तर . भारत विकासशील देश है, यह राष्ट्रीय विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार पर केंद्रित है। साथ ही,  हम अपने अनुभव , विशेषज्ञता और संसाधनों को साझा करके जिस हद तक भी हम कर सकते हैं, अन्य देशों के विकास के प्रयासों में भागीदार होने के लिए खुश हैं।  मानव संसाधन किसी देश की सफलता की कुंजी है। इसीलिए हमने अपने विकास के लिए साझेदारी में शिक्षा , प्रशिक्षण और संस्थाओं पर जोर दिया है। हम अपने साथी देशों में बुनियादी ढांचे के विकास में मामूली योगदान भी करते हैं। उदाहरण के लिए,  हम अफ्रीकी देशों को 9.5 अरब अमरीकी डॉलर की रियायती सहायता के लिए प्रतिबद्ध हैं।

     वर्तमान में, हम विभिन्न योजनाओं के तहत इंडोनेशिया के छात्रों और अधिकारियों को करीब 100 छात्रवृत्तियां प्रदान करते हैं और इंडोनेशिया भी इस तरह की छात्रवृत्तियां प्रदान करता है।  हमने भी इंडोनेशिया के विश्वविद्यालयों में भारतीय अध्ययन के लिए चेयर का गठन किया है।  हर साल, हम कई छात्रों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों , इंडोनेशिया से विद्वानों और मीडिया के लोगों को भारत की यात्रा करने के लिए आमंत्रित करते हैं। हमने  इंडोनेशिया में जकार्ता और बांदा आचे में दो वीटीसी की स्थापना की है जो अच्छा काम कर रहे हैं और हम पापुआ में इसी तरह का एक केंद्र स्थापित करने के लिए तैयार हैं। हमारे विदेश मंत्रालय में हाल ही में स्थापित विकास भागीदारी एजेंसी हमारे अंतरराष्ट्रीय विकास भागीदारी के प्रयासों के लिए नई दृष्टि प्रदान कर रही है।

     मुझे विश्वास है कि भारत और इंडोनेशिया के रूप में ऐसी गतिशील उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अपने विकास के अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करना चाहिए क्योंकि यह अधिक संवेदनशील क्षेत्रों और दुनिया के देशों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में अधिक प्रासंगिक और प्रभावी हो सकता है। (PIB)

वि कासौटिया/प्रदीप/सागर-6581 

Sunday, August 25, 2013

राष्ट्रीय मीडिया केंद्र: शुभारंभ पर यूपीए अध्यक्ष का भाषण

25-अगस्त-2013 17:35 IST
मीडिया और सरकार:दोनों के बीच आंतरिक विरोध की जरूरत नहीं
नई दिल्ली में 24 अगस्त 2013  का दिन एक ऐतिहासिक दिन था। ज्यों ही प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह ने नैशनल मीडिया सेंटर के उद्घाटन का पर्दा उठाया तो वहां मौजूद राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन सुश्री सोनिया गाँधी और सूचना व् प्रसारण मंत्री मुनीश तिवारी ने तालियाँ बजा कर अपना हर्ष व्यक्त किया। इस सुअवसर पर सूचना व प्रसारण मंत्रालय के सचिव बिमल शुल्क और पीआईबी की  प्रिंसिपल दयेरेक्त्र जनरल सुश्री नीलम कपूर भी नजर आ रही हैं।              फोटो: (PIB)
इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन सुश्री सोनिया गाँधी ने भी सम्बोधन किया।  इस मौके पर प्रधान मंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह, सूचना व प्रसारण मंत्रालय म्न्त्र्रे मुनीश तिवारी, मंत्रालय सचिव बिमल जुल्का भी मौजूद थे। (PIB)
यह कोई तुच्छ उपलब्धि नहीं है कि अनेक मुद्दों पर कितनी संतोषजनक और तेज सार्वजनिक बहस होती है। जाहिर है, सार्वजनिक बहस में परस्पर-विरोधी और विपरीत विचारों के लिए जगह होती है और भारतीय मीडिया निश्चित रूप से इस गुंजाइश को उपलब्ध न कराकर दोषी नहीं बन सकता। शायद कभी मीडिया चर्चा की भाषा और प्रतिष्ठा इच्छित जगह पहुंच जाए। मुझे यह भी मानना होगा कि मीडिया कभी-कभी राजनीतिक स्थापना को बेचैन कर देता है। शायद इसलिए हम किसी समय अपने विचारों को ज्यादा असरदार ढंग से आगे रखने में असमर्थ हो जाते हैं। 

आज हमें याद करना चाहिए कि संचार और सूचना की जरूरत सरकार की जिम्मेदारी जितनी बड़ी ही है। यह सही है कि मीडिया और सरकार प्रायः असहमत होते हैं। अखबारों के संपादकीय और मुख्य समाचारों पर दृष्टिकोण इस बात का प्रचुर प्रमाण उपलब्ध कराते हैं। लेकिन यह स्वस्थ हो सकता है तथा दोनों के बीच आंतरिक विरोध की जरूरत नहीं है। हम मीडिया की निगरानी वाली भूमिका और हमारी नीतियों एवं कार्यक्रमों की व्यवस्थित एवं सदाशयपूर्ण आलोचनाओं का का स्वागत करते हैं। हम मानते हैं कि कुछ ऐसी खामियां होंगी जो सामने लाने की जरूरत हैं। 

साथ ही, कार्यक्रमों, नीतियों, फैसलों और सूचना के प्रचार-प्रसार में सरकार और मीडिया के साझा हित हैं। ऐसे समय राष्ट्रीय प्रेस केंद्र जैसा संस्थान महत्वपूर्ण हो जाता है। मुझे उम्मीद है कि यह उस भागीदारी का प्रतिनिधित्व करेगा जिसमें दोनो पक्ष अपनी निर्धारित जिम्मेदारियां निभाने में समर्थ होंगे। 

मैं यह स्पष्ट करती हूं कि, हम महज सरकार के पाइंट बनाने के लिए प्रचार या प्रचार अभियानों के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन लोगों को अपने कानूनी और अन्य हक जानने का अधिकार है। उनहें सूचना हासिल करने का अधिकार है तथा उन्हें सूचना हासिल करने के बाद निर्णय लेने में सक्षम होने का अधिकार है। सिर्फ जागरूक और चेतन नागरिक ही उम्मीद कर सकता है कि सिस्टम अच्छे से काम करे और सरकार एवं राजनीतिक दलों को जिम्मेदार ठहरा सकता है। 

अंत में, यह याद रखिए कि जिस खूबसूरत इमारत का हम शुभारंभ कर रहे हैं वह सिर्फ ईंट और गारे से नहीं बनी हैं। यह आप, मीडिया प्रोफेशनलों, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों तथा अन्य पर है जो इसे लोगों की सेवा करने और उन्हें सशक्त बनाने के साधन के रूप में अमल में लाएंगे। मैं इस प्रयास में सफल होने के लिए आपको शुभकामना देती हूं। ” 

वि.कासोटिया/पी.के./एस.पी./एस.के./एस.एस./एस.बी.- 5803

Saturday, June 22, 2013

मामला लुधियाना में एक डाक्टर को ब्लैकमेल करने का

ड्यूटी मेजिस्ट्रेट ने दिया एक दिन का पुलिस रिमांड
कई और खुलासे होने की सम्भावना 
लुधियाना में ई एस आई अस्पताल से सबंधित एक डाक्टर को ब्लैकमेल करने के मामले में सतीश प्रणामी को पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जहाँ  ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने पुलिस को सतीश परनामी का तो एक दिन का रिमांड दे दिया जबकि उसके साथ महिला साथी जसमीत कौर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल पुलिस इस सारे प्रकरण से सबंधित हर पहलू और व्यक्ति का पता लगाना चाहती है।  ूछताछ में कई और नए मामले भी सामने आने की सम्भावना है। सुविज्ञ सूत्रों के मुताबिक इस मामले में पकड़े गए सतीश प्रणामी का अतीत भी खंगाला जा रहा है। इसी बीच प्रणामी का शिकार बने कई लोग अब खुल कर सामने आने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही उन शिकायतों का भी पता लगाया जा रहा है जिन्हें आधार बनाकर इन तथाकथित पत्रकारों ने डाक्टर को ब्लैकमेल किय। शिकायत करने वालों के अते-पते भी पूरी गहराई से जांचे जा रहे हैं तांकि पता चल सके कि कहीं डाक्टर को दिखाए गए दस्तावेज़ फर्जी तो नहीं थे या फिर कहीं इन लोगों ने किसी की उकसाहट या दबाव में आकर तो अपनी शिकायतें नहीं दीं? शक की सूई ई एस आई अस्पताल की सबंधित डिस्पेंसरी नम्बर तीन के स्टाफ की तरफ भी घूम रही है। गौरतलब है कि इस स्टाफ में से भी कुछ लोग सबंधित डाक्टर के साथ किसी न किसी बहाने विवाद करते रहते थे। यह  विवाद ही किसी न किसी तरह बाहर पहुंचा और मामल ब्लैकमेलिंग तक पहुँच गया। प्रिंट मीडिया ने इस खबर को काफी प्रमुखता से कवरेज दी थी। पंजाब के प्रमुख समाचार पत्र पंजाब केसरी ने अपनी खबर का शीर्षक दिया था,"डाक्टर को ब्लैकमेल करने वाले 2 तथाकथित पत्रकार काबू" इसके बाद अख़बार ने पूरी खबर कुछ यूं दी।
लुधियाना: अपने आपको एक न्यूज चैनल का पत्रकार बताकर एक सरकारी डाक्टर को ब्लैकमेल करके पैसे मांगने वाले एक पुरूष व महिला को थाना डिवीजन नं. 7 की पुलिस ने काबू किया है। सरकारी डिस्पैंसरी में सेवारत डाक्टर द्वारा लोगों से पैसे लेकर इलाज करने की शिकायत मिलने पर तथाकथित पत्रकारों ने न्यूज चैनल पर खबर चलाने की धमकी देकर 10 हजार रुपए की मांग की थी।
ए.सी.पी. सतीश मल्होत्रा ने बताया कि बीते दिन फोकल प्वाइंट निकट रॉकमैन फैक्टरी स्थित ई.एस.आई. डिस्पैंसरी नं. 3 में बतौर डाक्टर काम कर रहे डा. स्वर्णजीत सिंह ने पुलिस को शिकायत दी कि एक महिला व पुरुष खुद को एम.एच. 1 चैनल का पत्रकार बताकर ब्लैकमेल कर पैसे मांग रहे हैं। डाक्टर ने शिकायत में बताया कि उक्त दोनों ने 17 जून को उसे फोन करके कहा कि तुम्हारे खिलाफ पैसे लेकर इलाज करने की शिकायत मिली है, जिस बारे हमने रिपोर्ट बना ली है व न्यूज चैनल पर चलाई जाएगी। यदि तुम हमें आकर मिलोगे तो न्यूज रोक सकते हैं। इसके बाद उन्होंने फिर 18 जून शाम को फोन करके मिलने के लिए धमकाया। इसके बाद डाक्टर ने एम.एच. 1 चैनल के स्टाफ रिपोर्टर हरमिन्द्र सिंह रॉकी से सम्पर्क किया व उक्त तथाकथित पत्रकारों बारे जानकारी मांगी जिस पर रॉकी ने ऐसे किसी भी पत्रकार के एम.एच. वन से न जुड़े होने की बात कही। 
ए.सी.पी. मल्होत्रा ने बताया कि इसके बाद थाना डिवीजन नं. 7 के इंचार्ज इंस्पैक्टर सुमित सूद की अगुवाई वाली पुलिस ने जांच शुरू करके डाक्टर से फोन की डिटेल लेकर मामले की जांच शुरू कर दी। इसके लिए स्टाफ रिपोर्टर ने भी उक्त जालसाजों को काबू करने के लिए पुलिस का साथ दिया। थाना पुलिस ने डा. स्वर्णजीत सिंह के बयानों पर सतीश परनामी पुत्र देसराज, वासी जोशी नगर, हैबोवाल व जसमीत कौर पत्नी कुलतार सिंह वासी एम.आई.जी. फ्लैट सैक्टर 32 पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
 इसी तरह दैनिक जागरण ने भी इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। दैनिक जागरण का शीर्षक था,"पत्रकार बन सरकारी डाक्टर को कर रहे थे ब्लैकमेल"यह तीन कालमी खबर जागरण सिटी के पृष्ठ नंबर सात पर प्रकशित की गयी। दैनिक भास्कर और अन्य अख़बारों ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया।
अब देखना यह है कि लगातार बढ़ रही इस तरह की घटनायों की तह तक जाने में कौन कौन निकलता है इसके लिए ज़िम्मेदार? कैसे बनते हैं इस तरह के लोग पत्रकार? कैसी मिलते हैं इनको पहचान पत्र? क्यूं झुकते हैं सही लोग इन गलत तत्वों के सामने? इस तरह के कई सवाल हैं जिनका जवाब तलाशने का प्रयास किया जायेगा किसी अलग पोस्ट में? मामला लुधियाना में एक डाक्टर को ब्लैकमेल करने का

मामला लुधियाना में एक डाक्टर को ब्लैकमेल करने का

ਮੀਡੀਆ ਵਿੱਚ ਅਖੌਤੀ ਪੱਤਰਕਾਰਾਂ ਦੀ ਭਰਮਾਰ ਜਾਰੀ 


लुधियाना में ब्लैकमेलिंग के आरोपी का पुलिस रिमांड

Friday, May 10, 2013

25 मई से एक चैनल और

तीन और चैनलों की तैयारी भी अंतिम चरण में
इसी महीने अर्थात 25 मई तक आपके सामने आ रहा है एक नया चैनल-समाचार प्लस-राजस्थान। इस चैनल को आपके सामने ला रहे हैं बेस्ट मीडिया के बैनर से काम कर रहे इस क्षेत्र के कुछ अनुभवी लोग। इससे पूर्व समाचार प्लस उत्तराखंड/उत्तरप्रदेश के कार्य से अपना लोहा मनवा चुकी इस टीम ने इस बार और कमर कस ली है। पहले यह नया चैनल आना था 14 अप्रैल को लेकिन कुछ कारणों से अब इसकी तारीख है 25 मई। इसके बाद 15 जून को हरियाणा चैनल और 18 दिसम्बर को मध्यप्रदेश छतीसगढ़ के लिए विशेष चैनल। - इस मकसद के लिए न्यूज़ रूम तैयार हो चुका है, टीम का चयन भी कर लिया गया है, सम्पादकीय और प्रशासकीय जिम्मेदारियां भी शुरु हो चुकी हैं। इसके साथ ही शुरू हो चुके हैं टेस्ट सिग्नल। यानि सब तैयारियां मुक्कमल।

मासि‍क पत्रि‍का का वि‍मोचन

10-मई-2013 19:54 IST
कुमारी शैलजा ने कि‍या ‘सामाजि‍क न्‍याय संदेश’ का वि‍मोचन
सामाजि‍क न्‍याय और अधि‍कारि‍ता मंत्री कुमारी शैलजा ने आज यहां डॉ. अंबेडकर प्रति‍ष्‍ठान द्वारा प्रकाशि‍त ‘सामाजि‍क न्‍याय संदेश’ नामक मासि‍क पत्रि‍का का वि‍मोचन कि‍या। इस अवसर पर मंत्री महोदया ने कहा कि‍ भारत के इति‍हास में डॉ अंबेडकर का एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। भारतीय संवि‍धान का मसौदा तैयार करने में उनके व्‍यापक योगदान के बारे में सभी जानते है। उन्‍होंने कहा कि‍बाबासाहेब एक सच्‍चे राष्‍ट्रवादी थे जो समाज के सभी हि‍स्‍सों के कल्‍याण में और एक न्‍याय आधारि‍त समाज में वि‍श्‍वास करते थे। उन्‍होंने बताया कि‍यह पत्रि‍का बाबा साहेब के वि‍चारों और संदेशों को लोगों तक पहुंचाएगी। 

इस अवसर पर उपस्‍थि‍त लोगों में सचि‍व श्री सुधीर भार्गव, अपर सचि‍व श्री अनूप कुमार श्रीवास्‍तव, संयुक्‍त सचि‍व और डॉ. अंबेडकर प्रति‍ष्‍ठान के सदस्‍य सचि‍व श्री संजीव कुमार, डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के नि‍देशक श्री वि‍नय कुमार पॉल आदि‍शामि‍ल थे। (PIB)

वि.कासोटिया/सुधीर/राजीव-2324

Tuesday, April 16, 2013

द संडे इंडियन का नया अंक

चीन साईबर युद्ध की पूरी तैयारी में है
द संडे इंडियन का नया अंक भी बाज़ार में है। हमेशां की तरह हर बात अर्थ पूर्ण और हर बात तथ्यों और आंकड़ों के साथ। अंदाज़ भी दिलचस्प यानि कि हर अंक की तरह यह अंक भी विशेषांक। इस अंक में सुखदेव के नाम भगत सिंह का पत्र भी है और साथ ही चेतावनी भी कि चीन साईबर युद्ध की पूरी तैयारी में है। समाज में शुरू हो चुके नए ट्रेंड सेक्स कोचिंग की भी चर्चा भी इसी अंक में है और तेज़ी से गधी जा रही एक अद्भुत मानव जाति का विस्तृत विवरण भी। घरों में काम करने वाली बाई के असंगठित श्रमिक होने का दर्द भी और देश में लगातार बढ़ रहे टैक्स चोरों का दर्द भी। बारबार एफ आई आर के बावजूद लगातार जारी खनन। यूपी में अखिलेश यादव के दावों और वादों की चर्चा भी दिलचस्प है।रियासत की बिसात पर नीतीश कुमार की चाल को भी विशेष जगह मिली है और मध्यप्रदेश में इंटरनेट के विकास की बात भी।भरपेट भोजन फिर भी कुपोषण नामक रिपोर्ट में काफी कुछ है। अपराध, खेल और साहित्य की चर्चा भी है। --रेक्टर कथूरिया 

ताज़ा हवा के झोंके की तरह--मुस्लिम टुडे

कुछ ऐसा करें जिससे मीरा के आंसू मीर के आँखों से निकलें
लगातार बढ़ रहीं साम्प्रदायिक भावनायों की घुटन में एक हिंदी मासिक पत्रिका मुस्लिम टुडे ताज़ा हवा के झोंके की तरह आई है।सदभावना का संदेश लेकर आई इस पत्रिका (वर्ष-3 अंक 9) का कहना है कि  हिन्दू व मुसलमान हमारे देश की दो आँखें हैं। दोनों समुदाय सदियों से एक साथ रहते चले आ रहे हैं लेकिन इतनी सदियों के बाद भी दोनों के बीच एक दुसरे के बारे में बहुत सी भ्रांतियां फैली हुई हैं। वर्तमान समय में तो यह दूरिय और भी बढ़ गईं है। अब समय आ गया है कि मुस्लिम समुदाय इस क्षेत्र में विशेष कार्य करे। मुस्लिम टुडे का यही प्रयास है कि वह दोनों समुदायों को क़रीब लाने का भरकस प्रयास करे जिससे देश की एकता और अखंडता पर कोई सवालिया निशान न लगे। गंगा जमुनी सभ्यता को बढ़ावा देकर ऐसा वातावरण पैदा करे जिससे मीरा के आंसू मीर के आँखों से निकलें। मुस्लिम टुडे ऐसे प्रयासों के लिए वचनबद्ध है।पत्रिका में नर्म हिंदुत्व---गर्म हिंदुत्व जैसे कई महत्वपूर्ण आलेख भी हैं और राजनीति के साथ साथ अपराध पर भी चर्चा है और बहुत से दुसरे मुद्दों के साथ ही गजल का रंग भी मिलता है। कुल 62 पृष्ठों की पत्रिका का मूल्य है केवल 15 रुपये। बहुत ही खूबसूरती से प्रकाशित इस पत्रिका सफलता की उंचाईयों पर पहुंचे इसी कामना के साथ।--रेक्टर कथूरिया