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Saturday, June 13, 2020

वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता ‘मेरा जीवन, मेरा योग’

13th June 2020 10:14AM  PIB Delhi
 प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि 21 जून, 2020 तक बढ़ाई  
नई दिल्ली: 13 जून 2020: (पीआईबी)::
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा हाल ही में घोषित वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता ‘मेरा जीवन, मेरा योग’ के लिए प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि 21 जून, 2020 तक बढ़ा दी गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह वैश्विक प्रतियोगिता आयुष मंत्रालय और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) द्वारा छठे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है।

इससे पहले इस प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2020 तय की गई थी। यह तिथि बढ़ाने के लिए देश-विदेश से मांग की जा रही थी, ताकि योग बिरादरी को वीडियो तैयार करने के लिए अधिक समय मिल सके। भारी मांग को ध्‍यान में रखते हुए ही मंत्रालय और आईसीसीआर ने प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस यानी 21 जून तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री ने 31 मई को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र को संबोधित करते हुए सभी से वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता ‘मेरा जीवन, मेरा योग’ में भाग लेने का आह्वान किया था। यह प्रतियोगिता लोगों के जीवन पर योग के उल्‍लेखनीय परिवर्तनकारी प्रभावों पर फोकस करती है और यह छठा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने से जुड़ी विभिन्‍न उत्‍कृष्‍ट गतिविधियों में से एक अहम गतिविधि के रूप में उभर कर सामने आई है।

इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को 3 योगाभ्यासों (क्रिया, आसन, प्राणायाम, बंध या मुद्रा) का 3 मिनट की अवधि वाला वीडियो अपलोड करना होगा, जिसमें इस आशय का एक लघु वीडियो संदेश भी शामिल करना होगा कि योगाभ्यासों से किस तरह उनके जीवन में उल्‍लेखनीय सकारात्‍मक परिवर्तन हुए हैं। वीडियो को प्रतियोगिता के हैशटैग #MyLifeMyYogaINDIA और उपयुक्त श्रेणी के हैशटैग के साथ फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम या माईगव प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा सकता है। इसमें भागीदारी के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश आयुष मंत्रालय के योग पोर्टल (https://yoga.ayush.gov.in/yoga/) पर उपलब्‍ध हैं।

यह प्रतियोगिता दो चरणों में होगी। प्रथम चरण में देश-वार वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिताएं शामिल हैं, जिनके विजेताओं का चयन देश के स्तर पर किया जाएगा। इसके बाद वैश्विक पुरस्कार विजेताओं का चयन किया जाएगा जिन्हें विभिन्न देशों के विजेताओं में से चुना जाएगा। यह प्रतियोगिता लोगों के जीवन पर योग के उल्‍लेखनीय परिवर्तनकारी प्रभावों का पता लगाने का एक अहम प्रयास है, जिसके बारे में प्रत्येक प्रतिभागी स्‍वयं के द्वारा प्रस्‍तुत किए जाने वाले वीडियो में बताएंगे।

इस प्रतियोगिता के लिए प्रतिभागियों द्वारा प्रविष्टियों को तीन श्रेणियों के तहत प्रस्तुत किया जा सकता है जिनमें युवा (18 वर्ष से कम आयु), वयस्क (18 वर्ष से अधिक उम्र) और योग प्रोफेशनल शामिल हैं और इसके साथ ही ये श्रेणियां पुरुष एवं महिला प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग होंगी। भारत के प्रतिभागियों के मामले में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार पाने वालों को प्रथम चरण में प्रत्येक श्रेणी के लिए 1 लाख रुपये, 50,000 रुपये और 25,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा, जबकि वैश्विक पुरस्कार प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार पाने वालों के लिए 2500 डॉलर, 1500 डॉलर और 1000 डॉलर के होंगे।  

आयुष मंत्रालय ने सभी को बढ़ी हुई अवधि का उपयोग करने और बिना अधिक विलंब किए वीडियो प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया है। (PIB)
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Sunday, August 25, 2013

राष्ट्रीय मीडिया केंद्र: शुभारंभ पर यूपीए अध्यक्ष का भाषण

25-अगस्त-2013 17:35 IST
मीडिया और सरकार:दोनों के बीच आंतरिक विरोध की जरूरत नहीं
नई दिल्ली में 24 अगस्त 2013  का दिन एक ऐतिहासिक दिन था। ज्यों ही प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह ने नैशनल मीडिया सेंटर के उद्घाटन का पर्दा उठाया तो वहां मौजूद राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन सुश्री सोनिया गाँधी और सूचना व् प्रसारण मंत्री मुनीश तिवारी ने तालियाँ बजा कर अपना हर्ष व्यक्त किया। इस सुअवसर पर सूचना व प्रसारण मंत्रालय के सचिव बिमल शुल्क और पीआईबी की  प्रिंसिपल दयेरेक्त्र जनरल सुश्री नीलम कपूर भी नजर आ रही हैं।              फोटो: (PIB)
इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन सुश्री सोनिया गाँधी ने भी सम्बोधन किया।  इस मौके पर प्रधान मंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह, सूचना व प्रसारण मंत्रालय म्न्त्र्रे मुनीश तिवारी, मंत्रालय सचिव बिमल जुल्का भी मौजूद थे। (PIB)
यह कोई तुच्छ उपलब्धि नहीं है कि अनेक मुद्दों पर कितनी संतोषजनक और तेज सार्वजनिक बहस होती है। जाहिर है, सार्वजनिक बहस में परस्पर-विरोधी और विपरीत विचारों के लिए जगह होती है और भारतीय मीडिया निश्चित रूप से इस गुंजाइश को उपलब्ध न कराकर दोषी नहीं बन सकता। शायद कभी मीडिया चर्चा की भाषा और प्रतिष्ठा इच्छित जगह पहुंच जाए। मुझे यह भी मानना होगा कि मीडिया कभी-कभी राजनीतिक स्थापना को बेचैन कर देता है। शायद इसलिए हम किसी समय अपने विचारों को ज्यादा असरदार ढंग से आगे रखने में असमर्थ हो जाते हैं। 

आज हमें याद करना चाहिए कि संचार और सूचना की जरूरत सरकार की जिम्मेदारी जितनी बड़ी ही है। यह सही है कि मीडिया और सरकार प्रायः असहमत होते हैं। अखबारों के संपादकीय और मुख्य समाचारों पर दृष्टिकोण इस बात का प्रचुर प्रमाण उपलब्ध कराते हैं। लेकिन यह स्वस्थ हो सकता है तथा दोनों के बीच आंतरिक विरोध की जरूरत नहीं है। हम मीडिया की निगरानी वाली भूमिका और हमारी नीतियों एवं कार्यक्रमों की व्यवस्थित एवं सदाशयपूर्ण आलोचनाओं का का स्वागत करते हैं। हम मानते हैं कि कुछ ऐसी खामियां होंगी जो सामने लाने की जरूरत हैं। 

साथ ही, कार्यक्रमों, नीतियों, फैसलों और सूचना के प्रचार-प्रसार में सरकार और मीडिया के साझा हित हैं। ऐसे समय राष्ट्रीय प्रेस केंद्र जैसा संस्थान महत्वपूर्ण हो जाता है। मुझे उम्मीद है कि यह उस भागीदारी का प्रतिनिधित्व करेगा जिसमें दोनो पक्ष अपनी निर्धारित जिम्मेदारियां निभाने में समर्थ होंगे। 

मैं यह स्पष्ट करती हूं कि, हम महज सरकार के पाइंट बनाने के लिए प्रचार या प्रचार अभियानों के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन लोगों को अपने कानूनी और अन्य हक जानने का अधिकार है। उनहें सूचना हासिल करने का अधिकार है तथा उन्हें सूचना हासिल करने के बाद निर्णय लेने में सक्षम होने का अधिकार है। सिर्फ जागरूक और चेतन नागरिक ही उम्मीद कर सकता है कि सिस्टम अच्छे से काम करे और सरकार एवं राजनीतिक दलों को जिम्मेदार ठहरा सकता है। 

अंत में, यह याद रखिए कि जिस खूबसूरत इमारत का हम शुभारंभ कर रहे हैं वह सिर्फ ईंट और गारे से नहीं बनी हैं। यह आप, मीडिया प्रोफेशनलों, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों तथा अन्य पर है जो इसे लोगों की सेवा करने और उन्हें सशक्त बनाने के साधन के रूप में अमल में लाएंगे। मैं इस प्रयास में सफल होने के लिए आपको शुभकामना देती हूं। ” 

वि.कासोटिया/पी.के./एस.पी./एस.के./एस.एस./एस.बी.- 5803

Tuesday, March 19, 2013

खबरों को गलत बताया

19-मार्च-2013 12:43 IST
प्रधानमंत्री कार्यालय ने टू-जी मामले पर हिन्‍दू में छपी खबर को गलत बताया प्रधानमंत्री कार्यालय ने कल के हिन्दू समाचार पत्र में छपी उन खबरों को गलत बताया है कि जिनमें कहा गया है कि उसने टू-जी मामले से पहले 2007 में तत्‍कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा की कार्रवाइयों से सहमति जतायी थी। जिन दस्तावेजों के आधार पर खबर लिखी गई है, उनमें कोई नई सूचना नहीं थी और वे पहले से ही पब्लिक डोमेन में मौजूद थे। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी नोट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने महसूस किया था कि इस मामले का दूरसंचार विभाग द्वारा ट्राई और अन्‍य के साथ विस्‍तार से विचार-विमर्श करने की जरूरत है। 

बयान के अनुसार प्रधानमंत्री ने महसूस किया था कि इस विषय पर ट्राई और अन्‍य विभागों के साथ सलाह किए बिना कोई फैसला करना उचित नहीं होगा, इसीलिए प्रस्‍ताव को अनौपचारिक सुझाव के रूप में भेजा गया था। लेकिन इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कोई निर्देश जारी किया गया था। नोट में प्रस्‍ताव था कि नये ऑपरेटरों से सामान्‍य शुल्‍क लेकर ‘थ्रेशहोल्‍ड स्‍तर’ तक स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन किया जा सकता है। उसके बाद उन लोगों के बीच बाकी बचे स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी की जा सकती है जिनके पास न्‍यूनतम सीमा तक ही स्‍पेक्‍ट्रम हैं। 

प्रधानमंत्री संसद में इसके बारे में स्थिति पहले ही स्‍पष्‍ट कर चुके हैं और प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई थी। 

मीणा/शुक्‍ल/मधुप्रभा-1434

Friday, February 15, 2013

फ्रांस के राष्‍ट्रपति की राजकीय यात्रा

14-फरवरी-2013 17:23 IST
प्रधानमंत्री का मीडिया को दिया गया वक्‍तव्‍य 
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का, फ्रांस के राष्‍ट्रपति श्री फ्रांस्‍वा ओलांदे की भारत की राजकीय यात्रा पर, मीडिया को दिये गये वक्‍तव्‍य का मूल पाठ इस प्रकार है: 

मुझे फ्रांस के राष्‍ट्रपति फ्रांस्‍वा ओलांदे की भारत की राजकीय यात्रा पर स्‍वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। एशिया में भारत उनकी द्विपक्षीय यात्रा का पहला पडाव है। यह दोनों देशों के बीच संबंधों के महत्‍व को दर्शाता है। 

भारत फ्रांस को अपना बहुत महत्‍वपूर्ण सहयोगी मानता है। फ्रांस ने कठि‍नाई की घड़ी में हमें जबर्दस्‍त समर्थन दिया है। हमारे संबंध विभिन्‍न क्षेत्रों में सहयोग और बातचीत में गहनता से परिभाषि‍त होते हैं। आज जारी किया जाने वाला संयुक्‍त वक्‍तव्‍य हमारे आपसी हित की गतिविधियों को परिलक्षित करता है। 

मैंने और राष्‍ट्रपति ओलांदे ने आज अनेक द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुप‍क्षीय साझा और आपसी हित के मामलों पर विचार विमर्श किया। हमने जैतपुर परमाणु उर्जा परियोजना की प्रगति की समीक्षा की और वाणिज्‍यि‍क और तकनीकी बात‍चीत पूरी होने के बाद उसके शीघ्र क्रियान्‍वयन के लिए प्रतिबद्धता दौहराई। 

हमने सुरक्षा सहयोग में प्रगति पर संतोष व्‍यक्‍त किया, जो गुणवत्‍ता की दृष्‍टि‍ से नई उंचाइयों पर पहुचने वाला है। एमएमआरसीए अनुबंध पर चर्चाओं में अच्‍छी प्रगति हो रही है। हमने कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के बारे में बातचीत पूरी कर ली है, जिसे सरकार द्वारा स्‍वीकृ‍ति‍ मिलने पर भारत में ही विकसि‍त और निर्मित किया जाएगा। रक्षा व्‍यापार में भारत में ही रक्षा उपकरणों का सहविकास और सहनिर्माण एक स्‍वागत योग्‍य बदलाव है। इससे हमारा घरेलू उत्‍पादन आधार बढ़ेगा और भारत फ्रांस भागीदारी मजबूत होगी। 

हमारे बीच आतंक विरोधी और खुफिया क्षेत्रों में और मजबूती लाने पर भी सहमति हुई। फ्रांस हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम में लंबे समय से भागीदार है। मुझे सितम्‍बर 2012 में इसरो के 100वें मिशन को देख कर खुशी हुई, जिसमें फ्रांससी उपग्रह को कक्षा में सफलता पूर्वक स्‍थापित किया गया। इसी महीने बाद में इसरो एकीकृत सरल उपग्रह का प्रक्षेपण करेंगा, जो फ्रांस के नेशनल स्‍पेस एजेंसी के पेलोड अल्‍टिका और अरगोस को साथ ले जाएगा। 

राष्‍ट्रपति ओलांदे और मेरे बीच द्विपक्षीय आर्थिक सहायोग बढ़ाने की दिशा में भी सहमति हुई। हम भारत के साथ आर्थिक संबंधों के लिए फ्रांस के विशेष प्रतिनिधि की नियुक्‍ति‍ का स्‍वागत करते है। हम अपने आर्थिक संबंधों को उर्जित करने के लिए भारत फ्रांस सीईओ फोरम की सिफारिशों का इंतजार कर रहें हैं। 

व्‍यापक आधार वाले भारत/ईयू व्‍यापार और निवेश समझौता, जिस पर बातचीत चल रही है, दोनों देशों के बीच व्‍यापार और निवेश की नई संभावनाएं बढ़ायेगा। मैने राष्‍ट्रपति ओलांदे से एक संतुलित और आपसी हित वाला समझौता शीघ्र करने के लिए समर्थन का आग्रह किया है। भारत और फ्रांस के बीच संस्‍कृति संबंधों को मजबूत करने में महत्‍वपूर्ण है। ‘बोंजोर इंडिया’ का दूसरा संस्‍करण शीघ्र ही आयोजित किया जाएगा। आज हस्‍ताक्षरित नया सांस्‍कृतिक आदन प्रदान कार्यक्रम और केंस फेस्‍टिवल सहित फ्रेंच फिल्‍म फेस्टिवल्‍स का भारतीय सिनेमा के शताब्‍दी समारोह के आयोजन के निर्णय से हमारे सांस्‍कृतिक संबंध और मजबूत होंगे। 

राष्‍ट्रपति ओलांदे और मैंने क्षेत्रीय और वैश्‍विक मुद्दों पर सार्थक चर्चायें की। वैश्‍विक अर्थव्‍यवस्‍था और आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष जैसे अनेक मुद्दों पर फ्रांस और भारत के विचार एक समान हैं। हमने माली की स्थिति पर भी चर्चा की। माली की रक्षा सेनाओं और अफ्रीका के नेतृत्‍व में इंटरनेशनल सपोर्ट मिशन के समर्थन में भारत ने हाल ही में अदिस अबाबा में हुए डोनर्स सम्‍मेलन में 10 लाख अमरीकी डॉलर सहायता देने की घोषणा की है। 

मैं एक बार फिर भारत में राष्‍ट्रपति ओलांदे का स्‍वागत करता हूं और अपने विशेष द्विपक्षीय संबंधों को व्‍यापक और मजबूत बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करूंगा। (PIB)
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वि.कासोटिया/राजेन्‍द्र/रामकिशन-585