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Friday, July 25, 2025

फिल्म उद्योग में डिजिटल पायरेसी पर सख्ती शुरू

प्रविष्टि तिथि: 25 JUL 2025 at 6:09 PM by PIB Delhi

सरकार ने अंकुश लगाने के लिए किए सुदृढ़ उपाय

नई दिल्ली: 25 जुलाई 2025: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन डेस्क)::

संकेतक तस्वीर 
सरकार मनोरंजन से जुड़े रचनात्मक सेक्टर पर डिजिटल पायरेसी के प्रतिकूल प्रभाव के प्रति निरंतर सचेत है। इस महत्वपूर्ण समस्या पर ध्यान देने के लिए निम्नलिखित सुधार लागू किए गए हैं:

  • 2023 में सरकार ने डिजिटल पायरेसी के विरुद्ध उपायों को शामिल करने के लिए सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 में संशोधन किया।
  • इन संशोधनों में न्यूनतम 3 महीने का कारावास और 3 लाख रुपये के आर्थिक दंड की सख्त सजा शामिल है, जिसे 3 साल की कैद और लेखापरीक्षित सकल उत्पादन लागत के 5 प्रतिशत तक जुर्माना तक बढ़ाया जा सकता है।
  • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 6एए और 6एबी फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और प्रसारण पर रोक लगाती है।
  • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की नई जोड़ी गई धारा 7(1बी)(ii) सरकार को पायरेटेड सामग्री की मेजबानी के लिए मध्यस्थों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अधिकार देती है।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को कॉपीराइट धारकों या अधिकृत व्यक्तियों से शिकायतें प्राप्त करने तथा ऐसे कंटेंट होस्ट करने वाले मध्यवर्ती संस्थाओं को आवश्यक निर्देश जारी करने का अधिकार दिया गया है।
  • पायरेसी कार्यनीतियों को सुदृढ़ करने और समन्वित कार्य योजनाएं विकसित करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति गठित की गई है।
  • विश्व ऑडियो विजुअल एंटरटेनमेंट शिखर सम्मेलन (वेव्स) 2025 के दौरान डिजिटल पायरेसी से निपटने के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने हेतु एक प्रतियोगिता आयोजित की गई थी।

सरकार डिजिटल पायरेसी के खतरे को रोकने और भारत के इंटरटेनमेंट इको-सिस्टम की अखंडता की रक्षा के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों सहित संबंधित हितधारकों के साथ संपर्क में है।

सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने राज्यसभा में यह जानकारी दी।

***एमजी/एके/केसी/एसकेजे/एचबी//(रिलीज़ आईडी: 2148538) 

Friday, January 6, 2023

28 क्षेत्रीय दूरदर्शन चैनल एचडी कार्यक्रम निर्माण में सक्षम होंगे

Posted On: 06 January 2023 at 3:52 PM by PIB Delhi

तेज़ी से फैलेगा आकाशवाणी और दूरदर्शन का दायरा 

बीआईएनडी योजना के तहत एफएम कवरेज का विस्तार 80 प्रतिशत से अधिक आबादी तक

नई दिल्ली: 06 जनवरी 2023: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

भारत सरकार ने सरकारी मीडिया से जुड़े सबसे पुराने संस्थानों आकाशवाणी और दूरदर्शन के विस्तार कार्य की घोषणाएं की हैं। इससे इनका दायरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाएगा। ऐसा होने से कवरेज का विस्तार जम्मू-कश्मीर की सीमाओं के साथ 76 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा और भारत-नेपाल सीमा के साथ इसका दायरा 63 प्रतिशत तक विकसित हो जाएगा। 

इस विस्तार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रसार भारती सुदूर, जनजातीय, एलडब्ल्यूई और सीमावर्ती क्षेत्रों में 8 लाख से अधिक डीडी डीटीएच रिसीवर सेटों का निःशुल्क वितरण भी करेगा। 

कैबिनेट ने 4 जनवरी, 2023 को ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के आधुनिकीकरण, उन्नयन और विस्तार के लिए 2539.61 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ "प्रसारण अवसंरचना नेटवर्क विकास (बीआईएनडी)" योजना को मंजूरी दी। यह योजना 2025-26 तक, अर्थात पांच साल की अवधि के लिए है। इस योजना में आकाशवाणी और दूरदर्शन की प्राथमिक परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें एफएम रेडियो नेटवर्क और मोबाइल टीवी कार्यक्रम निर्माण सुविधाओं के विस्तार और मजबूती पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिनके लिए 950 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं। इन परियोजनाओं को फास्ट-ट्रैक मोड पर पूरा किया जाएगा।

इस योजना का उद्देश्य एलडब्ल्यूई, सीमावर्ती और रणनीतिक क्षेत्रों में बेहतर अवसंरचना तैयार करना और सार्वजनिक प्रसारक की पहुंच को बढ़ाना है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दर्शक -  दोनों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का विकास तथा अधिक चैनलों को समायोजित करने के लिए डीटीएच प्लेटफॉर्म की क्षमता के उन्नयन के जरिये विविध सामग्री की उपलब्धता, दर्शकों के लिए उपलब्ध विकल्पों का विस्तार करेगी। योजना का उद्देश्य मुख्य रूप से एलडब्ल्यूई और आकांक्षी जिलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए टियर II और टियर-III शहरों में एफएम नेटवर्क का विस्तार करना है।

प्रसार भारती के दो प्रमुख स्तंभों में, आकाशवाणी, देश में 501 आकाशवाणी प्रसारण केंद्रों के माध्यम से 653 आकाशवाणी ट्रांसमीटरों (122 मीडियम वेव, 7 शोर्ट वेव और 524 एफएम ट्रांसमीटर) के साथ विश्व सेवा, पड़ोस सेवाएं, 43 विविध भारती चैनल, 25 रेनबो चैनल और 4 एफएम गोल्ड चैनल की सुविधा देते हुए अपने श्रोताओं को सेवाएं प्रदान करता है।      

दूरदर्शन अपने दर्शकों को 66 दूरदर्शन केंद्रों के माध्यम से 36 डीडी चैनलों का प्रसारण करता है, जो विभिन्न वितरण प्लेटफार्मों, जैसे केबल, डीटीएच, आईपीटीवी "न्यूजऑनएयर" मोबाइल ऐप, विभिन्न यूट्यूब चैनलों और 190+ देशों में वैश्विक उपस्थिति वाले अपने अंतरराष्ट्रीय चैनल डीडी इंडिया के माध्यम से कार्यक्रम प्रसारित करते हैं।

बीआईएनडी योजना के तहत निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियों की योजना बनाई गई है

आकाशवाणी

भौगोलिक क्षेत्र और आबादी के हिसाब से देश में एफएम कवरेज को क्रमशः 58.83 प्रतिशत और 68 प्रतिशत से बढ़ाकर 66.29 प्रतिशत और 80.23 प्रतिशत करना।

भारत-नेपाल सीमा पर आकाशवाणी के एफएम के कवरेज को मौजूदा 48.27 प्रतिशत से बढ़ाकर 63.02 प्रतिशत करना।

जम्मू एवं कश्मीर सीमा पर आकाशवाणी के एफएम के कवरेज को 62 प्रतिशत से बढ़ाकर 76 प्रतिशत करना।

30,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करने के लिए रामेश्वरम में 300 मीटर उंचे टावर पर 20 किलोवाट क्षमता का एक एफएम ट्रांसमीटर स्थापित किया जाएगा।

दूरदर्शन

प्रसार भारती के केन्द्रों में नवीनतम प्रसारण एवं स्टूडियो उपकरण स्थापित करके दूरदर्शन और आकाशवाणी के चैनलों को नया स्वरूप देना।

डीडीके विजयवाड़ा और लेह स्थित अर्थ स्टेशनों का 24 घंटे प्रसारण वाले चैनलों के रूप में उन्नयन।

प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह/कार्यक्रमों और वीवीआईपी कवरेज को कवर करने के लिए फ्लाई अवे यूनिटों की शुरुआत।

28 क्षेत्रीय दूरदर्शन चैनलों को हाई-डेफिनिशन प्रोग्राम प्रोडक्शन में सक्षम केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

पूरे दूरदर्शन नेटवर्क में 31 क्षेत्रीय समाचार इकाइयों को कारगर तरीके से समाचार एकत्र करने के लिए नवीनतम उपकरणों के साथ उन्नत एवं आधुनिक बनाया जाएगा।

एचडीटीवी चैनलों को अपलिंक करने हेतु डीडीके गुवाहाटी, शिलांग, आइजोल, ईटानगर, अगरतला, कोहिमा, इंफाल, गंगटोक और पोर्ट ब्लेयर के अर्थ स्टेशनों का उन्नयन और प्रतिस्थापन।

इस योजना की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं: 

देश के छह लाख वर्गमीटर से अधिक इलाके, मुख्य रूप से श्रेणी- II और श्रेणी - III शहरों, एलडब्ल्यूई और सीमावर्ती इलाकों तथा आकांक्षी जिलों में एफएम कवरेज को बढ़ाने के लिए 100 वाट  क्षमता वाले 100 ट्रांसमीटरों के अलावा 10 किलोवाट एवं उच्च क्षमता के 41 एफएम ट्रांसमीटर।

फ्री डिश की डीडी क्षमता को मौजूदा 116 चैनलों से बढ़ाकर लगभग 250 चैनलों तक पहुंचाना ताकि चैनलों का एक समृद्ध एवं विविध गुलदस्ता निशुल्क उपलब्ध कराया जा सके।

यहां यह बताना प्रासंगिक है कि डीडी फ्री डिश प्रसार भारती का फ्री-टू-एयर डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) प्लेटफॉर्म है, जिसके अनुमानित 4.30 करोड़ कनेक्शन हैं (फिक्की और ई एंड वाई रिपोर्ट 2022 के अनुसार) जो इसे भारत का सबसे बड़ा डीटीएच प्लेटफॉर्म बनाते हैं। डीडी फ्री डिश के दर्शकों को इस प्लेटफॉर्म के चैनल देखने के लिए किसी मासिक या वार्षिक शुल्क का भुगतान करने की जरूरत नहीं है। इस प्लेटफॉर्म के पास 167 टीवी चैनलों का समृद्ध गुलदस्ता है जिसमें 49 दूरदर्शन और संसद चैनल, प्रमुख प्रसारकों के 77 निजी टीवी चैनल (11 जीईसी, 14 मूवी, 21 समाचार, 7 संगीत, 9 क्षेत्रीय, 7 भोजपुरी, 1 खेल, 5 भक्ति चैनल, 3 विदेशी चैनल), 51 शैक्षिक चैनल और 48 रेडियो चैनल शामिल हैं।

आपदा या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में निर्बाध डीटीएच सेवा सुनिश्चित करने के लिए डीडी फ्री डिश डिजास्टर रिकवरी सुविधा की स्थापना।

सहज और कुशल निर्माण एवं प्रसारण के लिए फील्ड स्टेशनों की प्रसारण सुविधाओं का स्वचालन और आधुनिकीकरण। इसमें स्वचालित प्लेआउट सुविधाएं, न्यूज प्रोडक्शन प्रणाली के लिए समाचार कक्ष में कंप्यूटर प्रणाली, रियल टाईम प्रोडक्शन में संपादन और प्रसारण को पूरा करने के लिए फ़ाइल आधारित कार्य प्रवाह, नवीनतम स्टूडियो कैमरे, लेंस, स्विचर्स, राउटर्स आदि तथा पूरे देश भर में दूरदर्शन के फील्ड स्टेशनों के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रावधान शामिल हैं। यह क्षमता निर्माण उपाय दूरदर्शन को समय के अनुरूप प्रौद्योगिकी और आधुनिक टीवी स्टूडियो प्रोडक्शन की तकनीक से ताममेल करने में सक्षम बनाएगा।

मनोरंजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा, खेल और अन्य सार्वजनिक सेवा सामग्री पर ध्यान देने के साथ क्षेत्रीय भाषाओं सहित समृद्ध सामग्री उपलब्ध करना।

त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं के साथ समाचार एकत्र करने की सुविधाओं को मजबूत बनाना और स्थानीय समाचार कवरेज की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में इसका विस्तार करना।

दृष्टिगत रूप से आकर्षक कार्यक्रमों के कंटेंट निर्माण के लिए ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी जैसी नई तकनीकों का समावेश।

उपग्रह ट्रांसपोंडरों के कुशल उपयोग के लिए स्पेक्ट्रम कुशल प्रौद्योगिकी के साथ मौजूदा अप-लिंक स्टेशनों को अपग्रेड करना।

ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन नेटवर्क में डेटा प्रवाह के प्रभावी प्रबंधन के साथ गवर्नेंस में दक्षता और पारदर्शिता लाना।

घरेलू और वैश्विक दर्शकों दोनों के लिए डिजिटल पहुंच में महत्वपूर्ण बढ़ोत्तरी करना।

दूरस्थ, जनजातीय, एलडब्ल्यूई और सीमावर्ती क्षेत्रों में 8 लाख से अधिक डीडी डीटीएच रिसीवर सेटों के मुफ्त वितरण की योजना बनाई गई है ताकि इन क्षेत्रों में दर्शकों को टेलीविजन और रेडियो सेवाओं का उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सके।

यह योजना प्रसारण उपकरणों की आपूर्ति और स्थापना से संबंधित विनिर्माण और सेवाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन भी करेगी। विभिन्न मीडिया क्षेत्रों के सामग्री उत्पादन क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी उपलब्ध होंगे।

*** एमजी/एएम/जेके/आर/आईपीएस/ओपी (रिलीज़ आईडी: 1889219)

Friday, July 16, 2021

जामिया ने दानिश सिद्दीकी की दुखद मौत पर शोक व्यक्त किया

 16 जुलाई, 2021

फोटो पत्रकार दानिश जामिया के पूर्व छात्र थे और पुरस्कार विजेता भी
नई दिल्ली: 16 जुलाई 2021: (मीडिया स्क्रीन Online)::
जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) ने कंधार के स्पिन बोल्डक जिले में हिंसा में मारे गए रॉयटर्स के फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी के दुखद और असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। इस खबर से जामिया एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर (एमसीआरसी) में शोक की लहर दौड़ गई, जहां दानिश ने 2005-2007 तक पढ़ाई की और मास कम्युनिकेशन में परास्नातक किया।
जामिया की कुलपति ने इसे पत्रकारिता और जामिया बिरादरी के लिए एक बड़ी क्षति बताया. इस दुखद घटना की खबर मिलते ही उन्होंने दानिश के पिता प्रो. अख्तर सिद्दीकी से बात की। उन्होंने बताया कि दानिश ने दो दिन पहले उन से बात की थी और अफगानिस्तान में वह जो काम कर रहा था, उसके बारे में चर्चा की थी।
जामिया से सेवानिवृत्त प्रो. अख्तर सिद्दीकी शिक्षा संकाय के डीन थे। वह राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के निदेशक भी थे।
2018 में एमसीआरसी ने दानिश को विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया था। प्रोफेसर और कार्यवाहक निदेशक शोहिनी घोष कहती हैं: “यह एमसीआरसी के जीवन के सबसे दुखद दिनों में से एक है। दानिश हमारे हॉल ऑफ फ़ेम में सबसे चमकीले सितारों में से एक थे और एक सक्रिय पूर्व छात्र थे जो छात्रों के साथ अपने काम और अनुभवों को साझा करने के लिए अपने अल्मा मेटर में लौटते रहे। हम उनकी कमी पूरी नहीं क्र सकते लेकिन उनकी याद को जिंदा रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
दानिश ने अपने काम के लिए 2018 में पुलित्जर पुरस्कार सहित सात सदस्यीय रॉयटर्स टीम के हिस्से के रूप में अपने काम के लिए कई पुरस्कार जीते, जिसने म्यांमार के अल्पसंख्यक रोहिंग्या समुदाय द्वारा सामना की गई हिंसा और अगस्त 2017 से बांग्लादेश में उनके सामूहिक पलायन का दस्तावेजीकरण किया। एक शरणार्थी महिला को बंगाल की खाड़ी के तट पर अपने घुटनों के बल डूबते हुए, थका हुआ और उदास दिखाया गया है। कुछ ही दूरी पर, पुरुषों का एक समूह अपने साथ एक छोटी नाव में अपने साथ लाए गए सामानों को उतार देता है, जब वे म्यांमार में अपने घरों से सुरक्षा के लिए बांग्लादेश गए थे इस फोटो के लिए उन्हें पुलित्जर दिया गया था।
एमसीआरसी के छात्रों के साथ उनकी आखिरी बातचीत 26 अप्रैल, 2021 को हुई थी, जब सोहेल अकबर ने उन्हें कन्वर्जेंट जर्नलिज्म के छात्रों से बात करने के लिए आमंत्रित किया था। सोहेल अकबर याद करते हैं, "कोविड-19 दूसरे उछाल के घातक चरम पर था और दानिश बहुत व्यस्त था" लेकिन हमेशा की तरह, उन्होंने एमसीआरसी के छात्रों के लिए समय निकाला।
एक फोटो जर्नलिस्ट के रूप में, दानिश ने एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप में कई महत्वपूर्ण कहानियों को कवर किया है। उनके कुछ कार्यों में अफगानिस्तान और इराक में युद्ध, रोहिंग्या शरणार्थियों का संकट, हांगकांग विरोध, नेपाल भूकंप, उत्तर कोरिया में सामूहिक खेल और स्विट्जरलैंड में शरण चाहने वालों की रहने की स्थिति शामिल है। उन्होंने इंग्लैंड में धर्मान्तरित मुस्लिमों पर एक फोटो श्रृंखला भी तैयार की है। उनका काम व्यापक रूप से पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, स्लाइडशो और दीर्घाओं में प्रकाशित हुआ है - जिसमें नेशनल ज्योग्राफिक पत्रिका, न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्जियन, द वाशिंगटन पोस्ट, वॉल स्ट्रीट जर्नल, टाइम मैगज़ीन, फोर्ब्स, न्यूज़वीक, एनपीआर, बीबीसी, सीएनएन शामिल हैं। अल जज़ीरा, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट, द स्ट्रेट्स टाइम्स, बैंकॉक पोस्ट, सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड, द एलए टाइम्स, बोस्टन ग्लोब, द ग्लोब एंड मेल, ले फिगारो, ले मोंडे, डेर स्पीगल, स्टर्न, बर्लिनर ज़ितुंग, द इंडिपेंडेंट, द टेलीग्राफ , गल्फ न्यूज, लिबरेशन और कई अन्य प्रकाशन शामिल हैं।
जनसंपर्क कार्यालय
जामिया मिल्लिया इस्लामिया

Monday, March 23, 2020

हो सकता है अब ज़्यादा दिनों तक अख़बार घरों में न आये

मुंबई, चंडीगढ़ और अन्य क्षेत्रों के हॉकरों में भी बेचैनी
मुंबई//चंडीगढ़//लुधियाना: 23 मार्च 2020: (मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::
कोरोना का कहर टूटा तो पूरी दुनिया सतर्क हो गई।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक आह्वान किया तो पूरा देश जनता कर्फ्यू के लिए तैयार हो गया। देश के हर वर्ग ने इसे सफल भी बनाया। उसके बाद 31 मार्च 2020 तक लॉकडाउन का एलान भी हुआ। लोकल डाउन जारी है। इस सारे संकट में जो वर्ग उपेक्षित से रह गए उनमें अख़बार को घर घर पहुंचने वाला हॉकर वर्ग भी शामिल है। अख़बार को सुबह सुबह हर घर और दफ्तर में पहुंचाने वाला हॉकर कोरोना से कैसे बचे? इस की चिंता किसी ने नहीं की। न सरकार ने, न अख़बारों के मालिकों ने और न ही समाज ने। रोज़ की खबरें पढ़ने के बाद कोरोना की मार का डर हॉकर और उसके परिवार को भी सता रहा है। वह कैसे बचे इससे उसे समझ नहीं आ रहा। एक मास्क और कम से कम एक सैनिटाईज़र की कीमत बाजार में जितनी कम से कम भी वसूली जा रही है उससे कहीं कम पैसे उसे उसके किसी एक ग्राहक के घर या दुकान से मिलते हैं वह भी महीना अख़बार देने के बाद। कितने मास्क और सैनिटाईज़र वह बाजार से खरीदे और अख़बार का पैसा कहाँ से पूरा करे? तंग आ कर उसने भी कहा हर ज़ोर ज़ुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है।
मुंबई में हॉकरों ने हड़ताल शुरू की तो सोमवार को बहुत से अख़बारों के प्रिंट एडिशन नहीं छपे। उन्होंने कहा कि  हमारे पाठक अब हमारे डिजिटल एडिशन में ही सारा पेपर पढ़ें। इसी तरह कल को बहुत  में छपने वाले साप्ताहिकों, पाक्षिक पत्रों और मासिक पत्रिकाओं की बारी भी आनेवाली है जो बहुत बड़ी संख्या में छपते और प्रसारित होते हैं। बहुत बड़े बड़े मीडिया हाऊस इन्हें चलाते हैं। किसी ने भी हॉकरों की की। 
चंडीगढ़, खरड़, मोहाली और अन्य क्षेत्रों में भी यही दर्द महसूस किया गया। चंडीगढ़ के हाकर वितरक संगठन के अध्यक्ष मदन शर्मा ने "जरूरी सूचना" शीर्षक से एक ब्यान व्हाट्सप्प पर जारी किया। उसमें उन्होंने कहा,"सभी प्रसार संस्थानों,,,वितरक साथियो एव एजेंट भाइयो को सूचित किया जाता है कि चंडीगढ़ वितरक संघ कोरोना महामारी के विकराल रूप लेने एवं चण्डीगढ़ प्रसाशन की लॉक डाउन की नोटिफिकेशन जारी होने हालांकि बन्द होने की श्रेणी में अखबार वितरण नही है फिर भी वितरक संघ अपने वितरक साथियो काम करने वाले हमारे सह वितरको,,एजेंटों,, प्रसार परिवार के हर साथियो की सुरक्षा एव कुशलता,,,उनकी भावनाओ के अनुरूप  कल से यानी 23/03/2020 से किसी भी प्रकार का अखबार वितरण संघ की अगली नोटिफिकेशन तक नही कर पायेगा,सभी संस्थानों से विनम्रतापूर्वक निवेदन है,की उक्त नोटिफिकेशन का सज्ञान लेते हुए कल से किसी भी प्रकार की वितरण सामग्री प्रकाशित ना करे,वितरक संघ आप सभी से सहयोग की अपेक्षा करता है। 
इसी मुद्दे को लेकर लुधियाना में भी मीटिंगों का सिलसिला जारी है। जब सोमवार को लोगों के घरों में "दैनिक भास्कर" अख़बार नहीं पहुंचा तो बहुत से घरों ने अपने अपने हाकर  फोन पर सम्पर्क किया। जवाब था आज भास्कर नहीं आया क्यूंकि  हॉकरों ने उसे उठाने से मना कर दिया। अन्य अखबारों से भी बात चल रही है। अब देखना है कि इस हड़ताल के दूरगामी प्रभाव क्या नज़र आते हैं। अगर समाज में संवेदनशीलता बची है तो उसे समाज का महत्वपूर्ण अंग बने हुए हॉकर वर्ग का ध्यान रखना ही होगा। सुबह सुबह जब हम सब सो रहे होते हैं तो होकर जाग रहा होता है तांकि हमें दिन भर की खबरों वाला अख़बार पहुंचा सके। क्या हमारा सब का कोई फ़र्ज़ नहीं उसके प्रति?

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कर्फ्यू के दौरान छूट अब बुधवार 25 मार्च को ही मिलेगी

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Curfew Relaxation Starts From 25th March Wednesday

ਪੰਜਾਬ ਸਕਰੀਨ ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਵੀ ਪੜ੍ਹੋ ਇਹੀ ਖਬਰ 
ਕਰਫਿਊ ਦੌਰਾਨ ਖੁੱਲ੍ਹ 25 ਮਾਰਚ (ਬੁੱਧਵਾਰ) ਤੋਂ ਹੀ ਮਿਲੇਗੀ


Wednesday, February 12, 2020

आज का मीडिया किसके दम पर ऐसा कर जाता है

एक जरूरी बात बता रहे हैं श्याम मीरा सिंह 
दिल्ली की जनता को कोसने वाले
जानेमाने एंकर सुधीर चौधरी 
लेखक श्याम मीरा सिंह 
जी न्यूज का एंकर दिल्ली की पूरी जनता को नल्ला कह रहा है, क्योंकि उसके मालिक को जनता ने वोट नहीं किया। मीडिया के एक एंकर को ये ताकत कहां से मिलती है? नेता से?? नहीं... बिल्कुल नहीं, केवल नेता से नहीं मिलती, बल्कि बाकी देश की जनता जो दिल्ली में वोट नहीं कर सकती, उससे भी मिलती है। वह विशेष जनता, इस एंकर को अपने नायक की तरह देखती है। उन्हें पत्रकार नहीं चाहिए, उन्हें उनके अंदर के जहर के लिए एक कुशल प्रवक्ता चाहिए, जो सुधीर चौधरी अपने आप में है। सुधीर चौधरी वही कर रहा है, जो बाकी देश की जनता सुनना चाहती है। यही वो बैटल फील्ड है जो आप और हम हार चुके हैं। मीडिया की बराबरी हम नहीं कर सकते।  मीडिया के द्धारा तैयार उस "विशेष जनता" को समझाना आसान नहीं है। हम इतने कमजोर हैं कि समानांतर मीडिया खड़े करने की स्थिति में भी नहीं हैं। 
इसलिए ये वक्त, स्वमैथुन की मारी लेखनी के दम्भ और मठाधीशी को छोड़ने का वक्त है। मेरी, आपकी लिस्ट में ऐसे बहुत से लोग हैं जो बेहद प्रभावी लिखते हैं, अच्छा लिखते हैं। सबसे पहले इन सबका आपस में जुड़ना बेहद जरूरी है। फिलहाल इन्हें पढ़ने वाले बस पांच सौ से हजार के बीच में लोग होते हैं। ये संख्या बढ़ानी है, ताकि टीवी के ज़हर को सोशल मीडिया के माध्यम से हर रोज न्यूट्रलाइज़ किया जा सके। 
इसलिए हमें अपनी मठाधीशियां त्यागनी होगीं, अपनी आत्ममुग्धता थोड़ी ढीली करनी होगी, ताकि अन्य राइटर्स, स्टूडेंट्स, पोएट्स, एक्टिविस्ट, आर्टिस्ट को भी लोग, आपके-हमारे जरिए जान सकें। इत्तेफाक से मुझे यहां ऐसे अच्छे लोग मिलें हैं जिनकी मदद से मेरी पोस्ट लोगों तक पहुंच सकीं। मुझसे भी अच्छे बहुत से ऐसे नए नए लड़के-लड़कियां हैं जिनकी समझ व्यापक है, प्रगतिशील है। जिनका कंटेंट लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्हें प्रोत्साहित करने की जरूरत है, अपने से आगे करने का वक्त है। 

आज से मैं अपनी वॉल पर हर रोज किसी अन्य राइटर, पोएट, एक्टिविस्ट, खासकर नए स्टूडेंट्स की पोस्ट शेयर किया करूँगा जो अभी अभी सोशल मीडिया पर नए हैं ताकि उनकी पहुंच कुछ बढ़ सके। जिससे कि एक हद तक टीवी के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके.. टीवी के अलावा भी लोगों के पास अन्य विचार पहुंच सकें। 
आपकी प्रतिक्रिया क्या है? ---श्याम मीरा सिंह 

Sunday, June 23, 2019

दिल्ली में खोजी महिला पत्रकार मिताली चंदोला पर हमला

लगातार असुरक्षित होती जा रही है दिल्ली 
नई दिल्ली: 23 जून 2019: (मीडिया स्क्रीन ब्यूरो):: 
जिस दिल्ली के बारे में कभी गीत लिखे गए थे कि दिल्ली है दिल हिंदुस्तान का..वह दिल्ली लगातार असुरक्षित होती जा रही है। न महिलाएं सुरक्षित हैं नहीं दुसरे लोग। यहाँ तक की पत्रकार भी असुरक्षित हो गए हैं। कोई भी किसी पर हमला करके साफ़ बच।  अब नई घटना हुई है दिल्ली के जानेमाने इलाके वसुंधरा एन्क्लेव में। हमला रात 12:30 हुआ जब वह नोयडा की तरफ जा रही थी। यह सारी घटना देश की राजधानी दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव इलाके में शनिवार देर रात को हुई। नकाबपोश बदमाशों ने एक खोजी महिला पत्रकार मिताली चंदोला को गोली मार दी। आरम्भिक सूचनाओं के मुताबिक उस पर कम से कम तीन गोलियां चलायीं गयी। पूर्व क्राइम रिपोर्टर मिताली चंदोला शनिवार देर रात करीब 12.30 बजे पूर्वी दिल्ली के धर्मशीला कैंसर अस्पताल रोड़ पर अपनी कार ड्राइव करते हुए आ रही थी कि तभी रेड लाइट के पास बाइक सवार दो नकाबपोश बदमाशों ने उसकी कार पर फेंकें। वह नहीं रुकी तो उस पर सामने से  गोलियां चलायीं गयीं। उस पर कम से कम तीन फायर हुए। बदमाशों ने महिला को तीन गोलियां मारी, जिनमें से एक गोली महिला को लगीं और दो कार के फ्रंट विंडशील्ड में जा लगी। गोली महिला के दाहिने हाथ में लगी। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस द्वारा महिला को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। गाड़ी के फ्रंट शीशे पर दो गोलिया मारी गई हैं, ड्राइवर व साइड शीशे पर अंडों से भी हमला किया गया है। शुरुआती जांच में यह मामला व्यक्तिगत दुश्मनी का लग रहा है। इस हमले के पीछे पारिवारिक विवाद है या कोई अन्य मकसद यह जांच के बाद ही साफ़ हो पाएगा।

Thursday, June 20, 2019

प्रेस निमंत्रण: जत्थेदार कुलदीप सिंह भोगल की मीडिया से भेंट 21 को

बहुप्रतीक्षित बाला साहिब हस्पताल के निर्माण पर होगी चर्चा 
नई दिल्ली: 19 जून 2019: (मीडिया स्क्रीन ब्यूरो):: 
वरिष्ठ अकाली नेता तथा सामाजिक कार्यकर्ता जत्थेदार कुलदीप सिंह भोगल, सिख कौम के बहुप्रतीक्षित बाला साहिब हस्पताल के निर्माण,विस्तार, आर्थिक स्रोत व  संचालन की राह में खड़े गतिरोध तथा उसके हल को लेकर जरूरी रोडमैप की मीडिया को जानकारी देंगे। 
समय: 2.30 बजे दोपहर, 21 जून 2019
स्थान: रशियन कल्चर सैंटर, फिरोजशाह रोड।

Sunday, December 9, 2018

विश्व मानवाधिकार दिवस के मौके पर कवरेज निमन्त्रण

9 दिसम्बर 2018 सांय 7:31 par पोस्ट किया  (WM)
करीब 1000 अति विशिष्ट लोग शामिल होंगे
सेवा में
संपादक महोदय/मुख्य संवाददाता/ डेस्क/ बियूरो चीफ
विषय अंतरराष्ट्रीय ह्यूमन राइट दिवस पर 1987 से आयोजित किया जाने वाला कार्यक्रम कवरेज करवाने हेतु
महोदय
आपको बताते हुए हमें ख़ुशी महसूस हो रही है कि विश्व मानवाधिकार दिवस के मौके पर देश को सभी के लिए समान न्याय और अधिकार प्राप्त हों जिसके लिए व्यवस्था परिवर्तन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम  का आयोजन दस दिसम्बर को प्रातः 10 बजे से किया जा रहा है, जिसमे अलग अलग देशों, प्रदेशों, संस्थाओं से करीब 1000 अति विशिष्ट लोग शामिल होंगे।

अतः कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कार्यक्रम कवरेज हेतु कृपया अपने सम्मानित मीडिया बैनर से रिपोर्टर एवं फोटोग्राफर को भेजने का कष्ट करें एवं स्वयं भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लें।

कार्यक्रम दिनांक-10 दिसम्बर
कार्यक्रम समय-प्रातः 11 बजे से
मीडिया हेतु समय-प्रातः 11 से 3 बजे
कार्यक्रम स्थल संसद मार्ग दिल्ली

कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से 3 बजे तक चलेगा।
उसके बाद सभी के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। शुरू हो किन्तु मीडिया को असुविधा न हो इसलिए कृपया 11 बजे पधारें ताकि किसी प्रकार की देरी न हो*

संपर्क
डॉ एम यू दुआ
नेशनल प्रेजिडेंट
आल इन्डिया ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन

मीडिया प्रभारी
9213247209

Wednesday, June 13, 2018

14 जून, 2018 के लिए मीडिया निमंत्रण

 स्थान:तीसरा तल,सम्मेलन कक्ष,निर्माण भवन,नई दिल्ली
 महोदय/महोदया,
आप निम्नलिखित कार्यक्रम को कवर करने के लिए सादर आमंत्रित हैं:
कार्यक्रम
:
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जे. पी. नड्डा  राज्यों के साथ आयुष्मान भारत-एनएचपीएम के कार्यान्यन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करेंगे। 
दिनांक
:
14 जून, 2018 (बृहस्पतिवार)  
समय
:
शाम 3.15 बजे
स्‍थान
:
तीसरा तल,सम्मेलन कक्ष,निर्माण भवन,नई दिल्ली
 भवदीय
(डॉ. मनीषा वर्मा)

Saturday, February 3, 2018

राष्ट्रीय मीडिया रत्न पुरस्कार

नामांकन भेजे जा सकते हैं 10 फरवरी 2017 तक 
पत्रकार व पीआर मित्रो,
    जैसा आप जानते हैं मीडिया प्रेस क्लब प्रत्येक वर्ष ऐसे महानुभाव जो मीडिया मे मशहुर हों और मीडिया कर्मीयों को हर सम्भव सहयोग देते हों उनको राष्ट्रीय  मीडिया रत्न पुरस्कार से सम्मानित करते हैं। यह पुरस्कार मीडिया कर्मीयों की तरफ से दिये जाने वाला देश का सबसे बड़ा सम्मान होता है!
    इस वर्ष भी 09 मार्च 2018 को सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम,नई दिल्ली में राष्टीय मीडिया रत्न 2016 पुरस्कार दिया जा रहा है!
   अगर आप ऐसे महानुभाव को जानते हैं जो इस पुरस्कार के हकदार हैं और आप उनको यह पुरस्कार दिलवाना चाहतें हैं तो 10 फरवरी 2017 से पहले उनका नाम सहित पूरा व्योरा बताने की कृपया करें ताकि हम आपकी और से उनका नाम इस पुरस्कार सूची में डाल सकें!
अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं :-
मोहम्मद जोशी
महासचिव
मीडिया प्रेस क्लब 
09312014181
वॉर्डसप्प :- 08802818844
E-mail :-
mediapressclubdelhi@gmail.com

Thursday, July 21, 2016

Media Invitation from PIB

INVITATION

Dear Sir/Madam,

National Commission for Scheduled Castes has convened a meeting with Chief Secretaries, Secretaries (Home), Secretary Social Welfare and Director Generals of Police of the State Governments to discuss on the incidents of Atrocities on Scheduled Castes and utilization of Scheduled Castes Sub- Plan Funds.
Union Minister for Social Justice and Empowerment, Shri Thaawar Chand Gehlot will inaugurate.

Date:      July 21, 2016 (Thursday)

Time:      10:00 am

    Venue:    Hall No. 4, 1st floor, Vigyan Bhawan, New Delhi.

You are requested to cover the event.
            N.C. Joshi
To,
All Accredited correspondents /camerapersons
AIR, Doordarshan News, Photo Division

Monday, October 13, 2014

फारवर्ड प्रेस पर पुलिस एक्शन-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला

इस नाज़ुक मोड़ पर आप किसके साथ हैं?
फारवर्ड प्रेस पर पुलिस एक्शन के खिलाफ साहित्य और पत्रकारिता जगत में आक्रोश लगातार गर्माता जा रहा है। सोशल मीडिया के साथ साथ इस एक्शन से चिंतित कलमकार फोन पर भी एक दुसरे के सम्पर्क में हैं। आशा की जानी चाहिए कि यह मामला जल्द ही सुलझा लिया जायेगा पर अगर ऐसा नहीं हो पाया तो आक्रोश की आग बहुत जल्द देश के अन्य भागों में भी भड़क सकती है।  इस तरह के बहुत से विचार आपको सोशल मीडिया पर मिलेंगे। ये एक आईना हैं---न केवल समाज के लिए या किसी एक दाल के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए। आप इस अवसर पर कहाँ खड़े हैं।  जल्द फैसला कीजिये सवाल केवल फारवर्ड प्रेस का नहीं---बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का है। सोशल मीडिया पर आ रही प्रतिक्रियाओं में लोग तेज़ी से बढ़ रहे हैं। एक मित्र ने लिखा है:

Alok Kumar हिन्दुत्व और इस्लाम के ठेकेदारों किताबों को बैन करना बंद करो, अगर किताबों मे कुछ गलत लिखा है तो पढ़ने वाला तय करेगा , तुम तय नहीं करोगे हमारे लिए की हम क्या पढ़े और क्या नहीं। अगर तुम्हारी धार्मिक भावनाओ को ठेस पहुंचती है तो , सबसे पेहले अपने ये मंदिर, मस्जिद और चर्च बंद करो। इनके होने से हम नास्तिको की अधार्मिक भावनाओ को भी ठेस पहुंचती है .
पढ़े इन दो लिंको पर कैसे हिन्दुत्व और इस्लाम के ठेकेदार तय कर रहे हैं की हम क्या पढ़े और क्या नहीं .
link 1
http://www.telegraph.co.uk/.../Salman-Rushdie-says-he-may...
link 2
http://time.com/.../sex-lies-and-hinduism-why-a-hindu.../
ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि धर्म के इन ठेकेदारों को पता चल जाये की वे हम युवा पीढी का प्रतिनिधित्व नहीं करते, और हम ऐसे संकीर्ण मानसिकता के लोगों को जोकर से ज्यादा कुछ मानते भी नहीं .

Saturday, September 6, 2014

अब फिर लौट रहा है रेडियो का ज़माना

06-सितम्बर-2014 18:34 IST
प्रधानमंत्री ने रेडियो के जरिए जुड़ने के लिए लोगों से सुझाव मांगे
नई दिल्ली: 6 सितमबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//मीडिया स्क्रीन):
कभी  रेडियो का ही ज़माना था। रेडियो ने हिंदी-पंजाबी के साथ साथ अन्य भारतीय भाषाओं के गीत संगीत को भी दूर दूर तक पहुँचाया।  वर्ष 1984 में हुए ब्ल्यू स्टार आप्रेशन जैसी संवेदनशील कार्रवाई तक भी लोग रेडियो पर ही निर्भर थे। विविध भारती हो या तामील-ए-इरशाद या फिर बिनाका गीत माला लोग पूरे ध्यान से सुनते थे। रेडियो की फरमायश में अपना नाम बुलवाने की एक होड़ सी रहती थी। पोस्ट कार्डों के बंडलों के बंडल इस फरमायश के लिए पोस्ट किये जाते थे। आल इंडिया उर्दू सर्विस  (तामील-ए-इरशाद) शमीम कुरैशी, अज़रा कुरैशी, जालंधर की चन्द्रकिरण, हेमराज शर्मा, जानकीदास भारद्धाज  और रेडियो सिलोन के अमीन सयानी से मिलना एक सपना समझा जाता था। रेडियो के रिसेप्शन रूम में मनाही के बावजूद लोग इनसे  मिलते थे। घंटों इनका इंतज़ार करते थे। श्रोता क्लब बनाने का रिवाज सा हो गया था पर दूरदर्शन के बाद रेडियो का जादू कुछ कम  होने लगा।  फिर केबल का ज़माना आते ही इसे ग्रहण लग गया।  अब रेडियो में उतनी भीड़ नहीं होती। इसके बावजूद रेडियो का ज़माना फिर से लौट रहा है। उसके कई कारण है। रेडियो को अपने सिरहाने रख कर आँखें बंद करके सुना जा सकता है। उसके लिए काम छोड़ने की तो कतई कोई आवश्यकता नहीं। ऍफ़ एम और मोबाईल फोन में रेडियो सुनने की सुविधा ने इसकी खूबियों को दोबारा उजागर किया है।
  
इसके साथ ही चमत्कार हुआ है सरकार की तरफ से। इसकी आशा नहीं थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने इस तरफ विशेष तवज्जो दी है। पीआईबी की एक सूचना के मुताबिक प्रधानमंत्री श्री मोदी ने रेडियो के जरिए जुड़ने के लिए लोगों से सुझाव मांगे हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा है कि वे इस संबंध में अपने विचार माईगव प्‍लेटफॉर्म-www.mygov.in पर साझा करें। उम्मीद की जानी चाहिए कि अब रेडियो के अच्छे दिन आने वाले हैं। क्या आप रेडियो से जुड़ना चाहते हैं? अगर हाँ तो अब देर न कीजिये--तुरंत भेजिए अपने कीमती सुझाव। 
गौरतलब है कि रेडियो ने 1962, 1965  और 1971  में लोगों का मनोबल मज़बूत करने और सूचनाओं का आदान प्रदान करने में महत्वपूर्ण सूचना निभाई थी। सैनिक भाईयों के लिए फरमाइशी कार्यक्रम आज भी लोकप्रिय हैं। 
वि.कासोटिया/अर्चना/आरआरएस/एसएनटी-3569




Sunday, August 25, 2013

राष्ट्रीय मीडिया केंद्र: शुभारंभ पर यूपीए अध्यक्ष का भाषण

25-अगस्त-2013 17:35 IST
मीडिया और सरकार:दोनों के बीच आंतरिक विरोध की जरूरत नहीं
नई दिल्ली में 24 अगस्त 2013  का दिन एक ऐतिहासिक दिन था। ज्यों ही प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह ने नैशनल मीडिया सेंटर के उद्घाटन का पर्दा उठाया तो वहां मौजूद राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन सुश्री सोनिया गाँधी और सूचना व् प्रसारण मंत्री मुनीश तिवारी ने तालियाँ बजा कर अपना हर्ष व्यक्त किया। इस सुअवसर पर सूचना व प्रसारण मंत्रालय के सचिव बिमल शुल्क और पीआईबी की  प्रिंसिपल दयेरेक्त्र जनरल सुश्री नीलम कपूर भी नजर आ रही हैं।              फोटो: (PIB)
इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन सुश्री सोनिया गाँधी ने भी सम्बोधन किया।  इस मौके पर प्रधान मंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह, सूचना व प्रसारण मंत्रालय म्न्त्र्रे मुनीश तिवारी, मंत्रालय सचिव बिमल जुल्का भी मौजूद थे। (PIB)
यह कोई तुच्छ उपलब्धि नहीं है कि अनेक मुद्दों पर कितनी संतोषजनक और तेज सार्वजनिक बहस होती है। जाहिर है, सार्वजनिक बहस में परस्पर-विरोधी और विपरीत विचारों के लिए जगह होती है और भारतीय मीडिया निश्चित रूप से इस गुंजाइश को उपलब्ध न कराकर दोषी नहीं बन सकता। शायद कभी मीडिया चर्चा की भाषा और प्रतिष्ठा इच्छित जगह पहुंच जाए। मुझे यह भी मानना होगा कि मीडिया कभी-कभी राजनीतिक स्थापना को बेचैन कर देता है। शायद इसलिए हम किसी समय अपने विचारों को ज्यादा असरदार ढंग से आगे रखने में असमर्थ हो जाते हैं। 

आज हमें याद करना चाहिए कि संचार और सूचना की जरूरत सरकार की जिम्मेदारी जितनी बड़ी ही है। यह सही है कि मीडिया और सरकार प्रायः असहमत होते हैं। अखबारों के संपादकीय और मुख्य समाचारों पर दृष्टिकोण इस बात का प्रचुर प्रमाण उपलब्ध कराते हैं। लेकिन यह स्वस्थ हो सकता है तथा दोनों के बीच आंतरिक विरोध की जरूरत नहीं है। हम मीडिया की निगरानी वाली भूमिका और हमारी नीतियों एवं कार्यक्रमों की व्यवस्थित एवं सदाशयपूर्ण आलोचनाओं का का स्वागत करते हैं। हम मानते हैं कि कुछ ऐसी खामियां होंगी जो सामने लाने की जरूरत हैं। 

साथ ही, कार्यक्रमों, नीतियों, फैसलों और सूचना के प्रचार-प्रसार में सरकार और मीडिया के साझा हित हैं। ऐसे समय राष्ट्रीय प्रेस केंद्र जैसा संस्थान महत्वपूर्ण हो जाता है। मुझे उम्मीद है कि यह उस भागीदारी का प्रतिनिधित्व करेगा जिसमें दोनो पक्ष अपनी निर्धारित जिम्मेदारियां निभाने में समर्थ होंगे। 

मैं यह स्पष्ट करती हूं कि, हम महज सरकार के पाइंट बनाने के लिए प्रचार या प्रचार अभियानों के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन लोगों को अपने कानूनी और अन्य हक जानने का अधिकार है। उनहें सूचना हासिल करने का अधिकार है तथा उन्हें सूचना हासिल करने के बाद निर्णय लेने में सक्षम होने का अधिकार है। सिर्फ जागरूक और चेतन नागरिक ही उम्मीद कर सकता है कि सिस्टम अच्छे से काम करे और सरकार एवं राजनीतिक दलों को जिम्मेदार ठहरा सकता है। 

अंत में, यह याद रखिए कि जिस खूबसूरत इमारत का हम शुभारंभ कर रहे हैं वह सिर्फ ईंट और गारे से नहीं बनी हैं। यह आप, मीडिया प्रोफेशनलों, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों तथा अन्य पर है जो इसे लोगों की सेवा करने और उन्हें सशक्त बनाने के साधन के रूप में अमल में लाएंगे। मैं इस प्रयास में सफल होने के लिए आपको शुभकामना देती हूं। ” 

वि.कासोटिया/पी.के./एस.पी./एस.के./एस.एस./एस.बी.- 5803

Thursday, April 4, 2013

केन्‍द्रीय प्रैस प्रत्‍यायन समिति का पुनर्गठन

04-अप्रैल-2013 15:57 IST
समिति का कार्यकाल पहली बैठक की तारीख से दो वर्ष होगा
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सेन्‍ट्रल प्रैस एक्रेडिटेशन कमेटी (केन्‍द्रीय प्रैस प्रत्‍यायन समिति) का पुनर्गठन किया है। यह समिति आवेदनों पर विचार करके मीडिया के सदस्‍यों को प्रत्‍यायन प्रदान करने के लिए अनुमोदन करती है। इस समिति के सदस्‍यों के नाम हैं-

श्री हिमांशु चटर्जी (इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्‍टस), श्री बी.एम. शर्मा (ऑल इंडिया स्‍मॉल एंड मीडियम न्‍यूजपेपर्स फेडरेशन), श्री प्रमोद माथुर (वर्किंग न्‍यूज कैमरामेन्‍स एसोसिएशन), श्री सुरिन्‍दर कपूर (न्‍यूज कैमरामेन्‍स एसोसिएशन), सुश्री कूमी कपूर (एडिटर्स गिल्‍ड ऑफ इंडिया), श्री शाज़ी ज़मा (इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन), श्री स्‍वराज थापा (प्रैस एसोसिएशन), श्री मनोरंजन भारती (न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन), श्री सुप्रिया प्रसाद (ब्रॉडकास्‍ट एडिटर्स एसोसिएशन), श्रीमती मंगीपुडी अरूणा (एसोसिएशन ऑफ स्‍मॉल एंड मीडियम न्‍यूजपेपर्स ऑफ इंडिया), श्री त्‍यागराज (इंडियन फेडरेशन ऑफ स्‍मॉल एंड मीडियम न्‍यूजपेपर्स), श्री गीतार्थ पाठक (इंडियन जर्नलिस्‍टस यूनियन), श्री जगदीश यादव (एसोसिएशन ऑफ एक्रेडिटेड न्‍यूज कैमरामैन), श्री पद्मधर पति त्रिपाठी (ऑल इंडियन जर्नलिस्‍टस वेलफेयर एसोसिएशन), श्री राधेश्‍याम शर्मा (ऑल इंडिया न्‍यूजपेपर्स एडिटर्स कांफ्रेंस), श्री सुभाष निगम (नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्‍टस), श्री पंकज वोहरा, श्री निर्मल पाठक, सुश्री नीरजा चौधरी, सुश्री पल्‍लवी घोष, श्री विनोद अग्निहोत्री, श्री दिवाकर, श्री वर्गीस के. जॉर्ज, श्री सुनील गटाडे और श्री नवीन ग्रेवाल (नामांकित)। 

इस समिति का कार्यकाल इसकी पहली बैठक की तारीख से दो वर्ष होगा। 


मीणा/शुक्‍ल/यशोदा- 1712

Tuesday, March 19, 2013

खबरों को गलत बताया

19-मार्च-2013 12:43 IST
प्रधानमंत्री कार्यालय ने टू-जी मामले पर हिन्‍दू में छपी खबर को गलत बताया प्रधानमंत्री कार्यालय ने कल के हिन्दू समाचार पत्र में छपी उन खबरों को गलत बताया है कि जिनमें कहा गया है कि उसने टू-जी मामले से पहले 2007 में तत्‍कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा की कार्रवाइयों से सहमति जतायी थी। जिन दस्तावेजों के आधार पर खबर लिखी गई है, उनमें कोई नई सूचना नहीं थी और वे पहले से ही पब्लिक डोमेन में मौजूद थे। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी नोट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने महसूस किया था कि इस मामले का दूरसंचार विभाग द्वारा ट्राई और अन्‍य के साथ विस्‍तार से विचार-विमर्श करने की जरूरत है। 

बयान के अनुसार प्रधानमंत्री ने महसूस किया था कि इस विषय पर ट्राई और अन्‍य विभागों के साथ सलाह किए बिना कोई फैसला करना उचित नहीं होगा, इसीलिए प्रस्‍ताव को अनौपचारिक सुझाव के रूप में भेजा गया था। लेकिन इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कोई निर्देश जारी किया गया था। नोट में प्रस्‍ताव था कि नये ऑपरेटरों से सामान्‍य शुल्‍क लेकर ‘थ्रेशहोल्‍ड स्‍तर’ तक स्‍पेक्‍ट्रम आवंटन किया जा सकता है। उसके बाद उन लोगों के बीच बाकी बचे स्‍पेक्‍ट्रम की नीलामी की जा सकती है जिनके पास न्‍यूनतम सीमा तक ही स्‍पेक्‍ट्रम हैं। 

प्रधानमंत्री संसद में इसके बारे में स्थिति पहले ही स्‍पष्‍ट कर चुके हैं और प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई थी। 

मीणा/शुक्‍ल/मधुप्रभा-1434

कॉपीराइट नियम 2013

18-मार्च-2013 19:48 IST
वैधानिक लाइसेंस के वास्‍ते नए नियम उपलब्‍ध कराए गए
मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्‍च शिक्षा विभाग की कॉपीराइट डिविजन ने 14 मार्च, 2013 को कॉपीराइट नियम, 2013 अधिसूचित कर दिए हैं। कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के मौजूदा प्रावधानों में संशोधन तथा कॉपीराइट संशोधन अधिनियम, 2012 के तहत नए प्रावधानों की शुरुआत (जो 21 जून, 2012 को प्रभावी हुए थे) कॉपीराइट नियम, 1958 में संशोधन के लिए आवश्‍यक हो गई थी। नियमों का मसौदा 28 अगस्‍त, 2012 को कॉपीराइट कार्यालय की वेबसाइट पर जारी किया गया था। इस पर सभी हितधारकों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए थे। सुझाव देने की अंतिम तिथि 20 सितंबर, 2012 थी। मंत्रालय ने नियमों के मसौदे पर सुझाव के लिए विभिन्‍न हितधारकों और कॉपीराइट विशेषज्ञों के साथ 8 अक्‍तूबर, 2012 को बैठक की। 

कॉपीराइट नियम 2013 के तहत शामिल संस्‍करण और साहित्यिक एवं संगीत कार्य के प्रसारण और ध्‍वनि रिकार्डिंग के लिए वैधानिक लाइसेंस के वास्‍ते नए नियम उपलब्‍ध कराए गए हैं। 

विविध कार्यों के वास्‍ते कॉपीराइट के पंजीकरण के लिए शुल्‍क तथा कॉपीराइट बोर्ड के निर्देशों/आदेशों के तहत कॉपीराइट के रजिस्‍ट्रार की ओर से जारी किए गए लाइसेंस के लिए शुल्‍क कॉपीराइट नियम 2013 के तहत बढ़ाए गए हैं। प्र‍त्‍येक कार्य के पंजीकरण के लिए न्‍यूनतम शुल्‍क 50 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है तथा अधिकतम शुल्‍क 600 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है। लाइसेंस के लिए शुल्‍क प्रति कार्य 200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये और अधिकतम शुल्‍क 400 रुपये प्रति कार्य से बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दिया गया है। शुल्‍क की नई संरचना नियमों की दूसरी अनुसूची के तहत उपलब्‍ध कराई गई है जो कॉपीराइट नियम 2013 के लागू होने की तिथि अर्थात 14 मार्च, 2013 से प्रभावी होंगे। नियमों की प्रति कॉपीराइट कार्यालय की वेबसाइट (copyright.gov.in) पर उपलब्‍ध कराई गई है। 


वि कासौटिया/प्रदीप -1424

Tuesday, March 12, 2013

मीडिया: कोयले की दलाली से कोयले के व्यापार तक

बड़ी-बड़ी बहस चलाने वाला मीडिया चुप्पी साधे खड़ा है
भारत में कोयला घोटाले ने एक बार फिर तथाकथित लोकतांत्रिक संस्थाओं के चेहरे से नकाब हटाने के काम किया है। एक लाख छियासी हजार करोड़ की कोयले की दलाली में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ पक्ष-विपक्ष के कई नेता तो कटघरे में हैं ही, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दम भरने वाला समाचार मीडिया भी इससे अछूता नहीं है। इस घोटाले में दैनिक भास्कर चलाने वाली कंपनी डीबी कॉर्प लिमिटेड, प्रभात खबर की मालिक कंपनी ऊषा मार्टिन लिमिटेड, लोकमत समाचार समूह और इंडिया टुडे समूह में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले आदित्य बिड़ला समूह का नाम सामने आया है। छोटी-छोटी बातों पर बड़ी-बड़ी बहस चलाने वाला सरकारी और कॉरपोरेट मीडिया इन कंपनियों की करतूत पर या तो चुप्पी साधे खड़ा है या खबर को घुमा-फिराकर पेश कर रहा है।
इसी मार्च में सरकारी ऑडिटर, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में कोयला खदान आवंटन में हुई गड़बड़ी सामने आई तो इसमें कई मीडिया कंपनियों के शामिल होने की चर्चाएं भी थीं। आखिरकार इंटर मिनिस्टीरियल ग्रुप (अंतर मंत्रिमंडलीय समूह) की बैठक में यह साफ हो गया कि कौन-कौन सी मीडिया कंपनियां इस घोटाले में शामिल हैं। इस घटना से एक बार फिर यह भी छिपा नहीं रहा है कि किस तरह कॉरपोरेट मीडिया जनता के साथ धोखेबाजी करता है। पहले भी टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले और कॉमनवेल्थ घोटाले में मीडिया की आपराधिक भूमिका सामने आ चुकी है। यह इस बात का भी उदाहरण है कि किस तरह भारतीय लोकतंत्र का प्रहरी (वॉच डॉग) खुद लूट में शामिल होकर लोकतंत्र का मजाक बना रहा है। सीएजी की रिपोर्ट से पता चलता है कि दो हजार चार से दो हजार नौ के दौरान हुए कोयला खदानों के आवंटन में भारी घोटाला किया गया। रिपोर्ट कहती है कि सरकार ने को औने-पौने दामों में कोयला खदानों को निजी कंपनियों के हवाले कर दिया। इस भ्रष्टाचार से सरकारी खजाने को एक लाख छियासी हजार करोड़ की रकम का नुकसान हुआ। यह घोटाला इस बात का भी पुख्ता सबूत है कि देश के बहुराष्ट्रीय व्यापारी घराने सरकारी नीतियों को मन मुताबिक तोडऩे-मोडऩे में किस तरह जुटे हुए हैं।

यह बात जग जाहिर है कि विज्ञापन और अन्य प्रलोभनों के चलते समाचार मीडिया लगातार पूंजीपतियों के हाथ की कठपुतली बना रहता है। पूंजीपति भी अपने पक्ष में जनमत बनाने और सत्ता पर प्रभाव जमाने में मीडिया की भूमिका से अनजान नहीं हैं, इसलिए कई पूंजीपति सीधे मीडिया को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं। कोयला घोटाले में फंसी कंपनियों ने भी इसी रणनीति के तहत मीडिया को अपने कब्जे में लिया है, उनके गैरकानूनी काम इस बात की खुलेआम गवाही देते हैं। यह कॉरपोरेट मीडिया का ही कमाल है कि कोयला घोटाले की पोल खुलने के बाद भी बहस सिर्फ कोयला खदानों के आवंटन में हुई गड़बड़ी पर केंद्रित है। यह सवाल नहीं उठाया जा रहा है कि आखिर कोयला खदानों को निजी हाथों में सौंपने की जरूरत ही क्या है? इस तरह के नीतिगत सवाल कॉरपोरेट मीडिया के खिलाफ जाते हैं इसलिए वह मरे मन से सिर्फ आवंटन का सवाल उठा रहा है (ऐसा करना उसकी विश्वसनीयता को बरकरार रखने के लिए जरूरी है)।

कोयला घोटाले में शामिल चार मीडिया कंपनियों का जायया लिया जाए तो यह बात साबित हो जाएगी कि किस तरह कॉरपोरेट, मीडिया और सरकार को चला रहे हैं। इससे कॉरपोरेट साजिशों को समझना भी और आसान होगा। पहले बात करते हैं लोकमत समूह की। यह अखबार अपने प्रसार के हिसाब से मराठी का सबसे बड़ा अखबार है। महाराष्ट्र के कई जिलों से इसका प्रकाशन होता है। मराठी के अलावा हिंदी में भी लोकमत समाचार प्रकाशित होता है। इस कंपनी का रिश्ता मुकेश अंबानी-राघव बहल-राजदीप सरदेसाई से भी है, मराठी न्यूज चैनल आइबीएन-लोकमत इसका उदाहरण है। लोकमत के मालिक विजय दर्डा कांग्रेस पार्टी के सांसद भी हैं और कंपनी के दूसरे मालिक और विजय के भाई राजेंद्र दर्डा महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार में शिक्षा मंत्री हैं। विजय दर्डा पत्रिकारिता के उसूलों की धज्जियां उड़ाते हुए पत्रकार, व्यापारी और राजनीतिज्ञ एक साथ हैं। उन्हें 1990-91 में फिरोज गांधी मेमोरियल अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म मिल चुका है। इसके अलावा 1997 में जायंट इंटरनेशनल जर्नलिज्म अवॉर्ड और दो हजार छह में ब्रिजलालजी बियानी जर्नलिज्म अवॉर्ड भी मिला हुआ है।

विजय दर्डा मीडिया मालिकों के प्रभाव वाली संस्था ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन के अध्यक्ष रहने के अलावा इंडियन न्यूज पेपर सोसायटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ये दोनों संस्थाएं मीडिया मालिकों के प्रभाव और उनका हित देखने वाली संस्थाएं हैं। दर्डा साउथ एशियन एडिटर्स फोरम के अध्यक्ष रहकर भी उसे धन्य कर चुके हैं। भारत में प्रेस की नैतिकता को बनाये रखने वाली संस्था प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआइ) के सदस्य रहकर भी उन्होंने पत्रकारीय नैतिकता की रक्षा की है! वल्र्ड न्यूज पेपर एसोसिएशन के सदस्य होने के साथ और भी कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों के सदस्य हैं। कुल मिलाकर पत्रकारिता के नाम पर मालिक होकर भी जितने फायदे हो सकते हैं उन्होंने दोनों हाथों से बटोरे हैं। फिर, कोयले पर तो उनका हक बनता ही था! जब पेड न्यूज का मामला जोर-शोर से उठ रहा था तब लोकमत का नाम उसमें सबसे ऊपर था। अब कोयला घोटाले में भी विजय दर्डा और राजेंद्र दर्डा आरोपी कंपनी जेडीएस यवतमाल कंपनी के मालिक/डायरेक्टर होने के साथ ही दूसरी आरोपी कंपनी जैस इंफ्रास्ट्रक्चर के भी सात फीसदी के मालिक हैं।

दूसरी मीडिया कंपनी है दैनिक भास्कर अखबार को प्रकाशित करने वाली कंपनी डीबी कॉर्प लिमिटेड। दैनिक भास्कर के उत्तर भारत के सात राज्यों से कई संस्करण प्रकाशित होते हैं। यह हिंदी का दूसरा सबसे बड़ा अखबार है। डीबी स्टार, बिजनेस भास्कर, गुजराती में दिव्य भास्कर और अहा जिंदगी पत्रिका भी इसी के प्रकाशन हैं। चार राज्यों से निकलने वाले अंग्रेजी अखबार डीएनए में भी इसकी हिस्सेदारी है। भोपाल के गिरीश, रमेश, सुधीर और पवन अग्रवाल कंपनी के मालिक हैं। पिछले कुछ वर्षों में दैनिक भास्कर मीडिया बाजार में अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को किनारे लगाते हुए बड़ी तेजी से उभरा है। मार्केटिंग का हर हथकंडा अपनाते हुए इसने उत्तर भारत में अपने लिए एक खास जगह बनाई है लेकिन इसके कर्मचारियों और पत्रकारों पर छंटनी की तलवार हमेशा लटकी रहती है। प्रबंधन की नीतियों के मुताबिक उनकी नौकरी कभी भी छीनी जा सकती है। डीबी कॉर्प के चार भाषाओं में प्रकाशित होने वाले अखबारों के उनहत्तर संस्करण और एक सौ पैंतीस उप-संस्करण जनता के बीच पहुंचते हैं। कंपनी माई एफएम नाम से देश के सत्रह शहरों से रेडियो भी संचालित करती है।

डीबी कॉर्प का धंधा सिर्फ मीडिया ही नहीं है। इसकी मौजूदगी और भी कई धंधों में है। भारतीय बाजार के रेग्युलेटर सेक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने इस कंपनी की वित्तीय स्थिति के बारे में कहा है कि इसके पास उनहत्तर अन्य कंपनियों का मालिकाना भी है। जिनमें खनन, ऊर्जा उत्पादन, रियल एस्टेट और टैक्सटाइल जैसे कई धंधे शामिल हैं। कहा जाता है कि कंपनी ने भोपाल में जो मॉल बनाया है वैसा भव्य मॉल एशिया में और कहीं नहीं है। मुनाफा कमाने के लिए जहां भी इस कंपनी को रास्ता दिखता है ये वहीं चल पड़ती है और रास्ते में कोई दिक्कत आ गई तो मीडिया का इतना बड़ा साम्राज्य किस दिन के लिए है! डीबी कॉर्प के कामों को आगे बढ़ाने में दैनिक भास्कर लगातार उसके साथ रहता है। जहां-जहां कंपनी को धंधा करना होता है वहां से वो अखबार निकालना नहीं भूलती ताकि जनमत और सत्ता को साधने में आसानी रहे। कोयला घोटाले में नाम आने से पहले ही छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जनता के विरोध के बावजूद भाजपा सरकार ने इसे 693.2 हेक्टेयर जमीन स्वीकृत कर दी, वहां जनता का आक्रोश फूट पड़ा और आखरिकार छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पाया कि कंपनी ने पर्यावरण के मानकों का बुरी तरह उल्लंघन किया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि आगे से इस कंपनी को पर्यावरण मानकों को लेकर हरी झंडी न दी जाए। हाईकोर्ट में कंपनी के खिलाफ याचिका डालने वाले डीएस मालिया का कहना है कि दैनिक भास्कर ने उनके तथ्यों को झुठलाने के लिए अपने अखबार के कई पृष्ठ रंग डाले और सही खबर को दबाने के लिए हर संभव कोशिश की। दैनिक भास्कर ने राहुल सांस्कृत्यायन के ‘भागो नहीं, दुनिया को बदलो’ की तर्ज पर ‘अपने लिए जिद करो, दुनिया बदलो’ की टैग लाइन चुनी है। जिस तरह से भास्कर देश के संसाधनों की लूट में शामिल है उससे जाहिर है कि वह कैसी बेशर्म जिद का शिकार है! लोकमत समाचार की तरह ही यह कंपनी भी पेड न्यूज छापकर अपना नाम कमा चुकी है! पेड न्यूज पर भारतीय प्रेस परिषद की परंजॉय गुहा ठकुरता और के श्रीनिवास रेड्डी वाली रिपोर्ट में इन दोनों कंपनियों का नाम दर्ज है।

कोयले की दलाली में शामिल तीसरा अखबार प्रभात खबर है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से इसके कई संस्करण निकलते हैं। इसका प्रकाशन उन्नीस सौ चौरासी में खनन उद्योग से जुड़ी कंपनी उषा मार्टिन लिमिटेड ने शुरू किया। उषा मार्टिन समूह के और भी कई धंधे हैं। अपने राजनीतिक संपर्कों के लिए पहचाने जाने वाले हरिवंश उन्नीस सौ नवासी से इसके संपादक हैं। चंद्रशेखर के प्रधानमंत्रित्व काल में वह प्रधानमंत्री ऑफिस में पब्लिक रिलेशन का काम भी कर चुके हैं। ऊषा मार्टिन कंपनी का मुख्य धंधा बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में ही चलता है। कंपनी पर आरोप लगता रहा है कि इस इलाके में अपने धंधे के पक्ष में माहौल बनाने के लिए ही उसने अखबार का भी सहारा लिया है। कोयला घोटाले में नाम आने से इस सच्चाई पर पक्की मोहर लग जाती है।

चौथी दागी कॉरपोरेट आदित्य बिड़ला समूह है। यह एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी है जिसका धंधा देश-विदेश में कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। यह समूह खाद, रसायन सीमेंट रीटेल, टेलीकॉम जैसे अनगिनत धंधों से जुड़ा हुआ है। हिंडाल्को, आइडिया सेल्यूलर और अल्ट्राटेक सीमेंट इसकी कुछ कंपनियों के नाम हैं। इस समूह ने अरुण पुरी के लिविंग मीडिया इंडिया ग्रुप में 27.5 फीसदी की हिस्सेदारी है। अरुण पुरी इंडिया टुडे के विभिन्न प्रकाशनों और टीवी टुडे समूह के चैनलों के मालिक हैं, जिनमें आजतक और हेडलाइंस टुडे जैसे चैनल भी शामिल हैं। आदित्य बिड़ला समूह ने मीडिया में क्यों पैसा लगाया है इसके लिए किसी शोध की जरूरत नहीं है!

जिन भी कंपनियों का नाम कोयला घोटाले में आया है क्या उनसे उम्मीद की जा सकती है कि वे अपने मालिकाने वाले मीडिया में कोयला घोटाले को सही तरह से रिपोर्ट कर पाएंगे? इस सरल से सवाल के जवाब को आज का मीडिया परिदृश्य काफी कठिन बना देता है जिससे हकीकत पर हमेशा के लिए पर्दा पड़ा रहे। बाजार अर्थव्यवस्था जन-पक्षधर नियमों को ढीला किए बिना चल ही नहीं सकती। सरकारें भी कॉरपोरेट दबाव में मीडिया नियमन के सवाल को लगातार अनदेखा करती रहती हैं। इस मौके का फायदा उठाते हुए बड़े-बड़े बिजनेस समूह मीडिया को खरीदकर उसकी आड़ में अपने बाकी धंधों को चमका रहे हैं। उन्हें ऐसा कदम उठाने से रोकने वाला कोई कानून नहीं है, यही वजह है कि चावल से लेकर सीमेंट का धंधा करने वाली और बिल्डरों से लेकर कोयला बेचने वाली कंपनियां तक मीडिया में पैसा लगा रही हैं। नई आर्थिक नीतियों को अपनाने और तथाकथित सूचना क्रांति के अस्तित्व में आने के बाद सरकारें निजी कंपनियों के सामने ज्यादा आत्मसमर्पण की मुद्रा में हैं। कॉरपोरेट अपराधों के खिलाफ कोई नियम बनाने से उन्हें लगता है कि इससे देश की विकास दर मंदी पड़ जाएगी, विदेशी निवेश घट जाएगा।

वैसे आजादी के बाद से ही व्यापारिक घरानों द्वारा मीडिया को इस्तेमाल करने की शुरुआत हो चुकी थी, इसलिए उस दौरान भारतीय प्रेस को जूट प्रेस भी कहा जाता था। टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स जैसे अखबारों के मालिक तब जूट मिलें चलाया करते थे। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और उनके रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन जूट प्रेस की आलोचना करते रहे लेकिन उन्होंने कभी मीडिया में दूसरे धंधों के मालिकों के आने के खिलाफ कोई नियम नहीं बना पाए। बाद में भारतीय प्रेस को स्टील प्रेस भी कहा जाने लगा क्योंकि टाटा जैसी कंपनी का तब के प्रभावशाली अखबार द स्टेट्समैन में पैसा लगा था। इसी तरह इंडियन एक्सप्रेस के मालिक रामनाथ गोयनका ने भी पिछली सदी के साठ के दशक में इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की थी। ये कंपनियां हमेशा से अपने व्यापारिक हितों की रक्षा व उन्हें बढ़ाने के लिए मीडिया का इस्तेमाल करती रही हैं। कुछ समय पहले जिस तरह मुकेश अंबानी की कंपनी रियायंस इंडस्ट्रीज ने नेटवर्क 18 और तेलुगू अखबार समूह इनाडु का अधिग्रहण किया है उसे भी इसी क्रम में देखा जा सकता है। इसी तरह कहा जाता है कि कई मीडिया कंपनियों में मुकेश के भाई अनिल अंबानी और रतन टाटा का भी पैसा लगा हुआ है।

भारत में मीडिया के मालिकाने पर बात करते हुए इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है कि बड़ी पूंजी का मीडिया पर कब्जा बढ़ता जा रहा हैं। अखबार, टेलीविजन, रेडियो और इंटरनेट से लेकर सभी प्रकार के मीडिया को वे अपने नियंत्रण में ले रहे हैं। मीडिया संकेंद्रण और एकाधिकार की यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे छोटी पूंजी के बल पर निकलने वाले स्वतंत्र समाचार मीडिया को खत्म कर रही है। मीडिया के मालिकाने का केंद्रीकरण लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। इसका उपाय यही है कि क्रास मीडिया होल्डिंग यानी एक ही मीडिया कंपनी के सभी तरह के मीडिया में पैसा लगाने पर रोक लगाई जाए। बहुसंस्करणों पर रोक हो। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पूंजीवादों देशों में भी मीडिया में पूंजी निवेश को लेकर कोई न कोई नियम हैं लेकिन भारत सरकार इस मामले में अब तक सोयी हुई है। फिलहाल देश के प्रिंट मीडिया पर 9 बड़े मीडिया घरानों का प्रभुत्व हो चुका है। टाइम्स (ऑफ इंडिया) समूह, हिंदुस्तान टाइम्स समूह, इंडियन एक्सप्रेस समूह, द हिंदू समूह, आनंद बाजार पत्रिका समूह, मलयाला मनोरमा समूह, सहारा समूह, भास्कर समूह और जागरण समूह ने लगभग पूरे मीडिया बाजार पर कब्जा कर रखा है। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्टार इंडिया, टीवी 18, एनडीटीवी, सोनी, जी समूह, इंडिया टुडे समूह और सन नेटवर्क का बोलबाला है। यही हाल रहा तो जल्दी ही देश में पूरी तरह से मीडिया एकाधिकार (मोनोपली) के हालात पैदा हो सकते हैं। दो हजार नौ में टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राइ) ने क्रॉस मीडिया ऑनरशिप संकेंद्रण को लेकर अपनी चिंता जताई थी। अपने आधार पत्र में उसने सख्त नियम बनाने की वकालत भी की थी लेकिन कमजोर राजनीतिक इच्छा शक्ति की वजह से इसको लेकर कोई ठोस कानून नहीं बन पाया है।

जिस तरह कई मीडिया समूहों के नाम कोयला घोटाले में आये हैं उससे सबक लेते हुए ऐसे नियम बनाने की जरूरत है जिससे देश में मीडिया स्वामित्व को अन्य उद्योगों से मालिकाने से स्वतंत्र रखा जा सके।

(समयांतर)


मीडिया की काली करतूत//अमलेन्दु उपाध्याय