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Monday, March 23, 2026

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने टीवी 9 नेटवर्क समिट को संबोधित किया

प्रधानमंत्री कार्यालय//प्रविष्टि तिथि: 23 MAR 2026 at  9:28 PM by PIB Delhi//Azadi Ka Amrit Mahotsav

आज, भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है 

भारत अब चुनौतियों से टकाराता है: प्रधानमंत्री

गल्फ से लेकर ग्लोबल वेस्ट तक और ग्लोबल साउथ से लेकर पड़ोसी देशों तक, 

भारत सभी के लिए भरोसेमंद साझेदार है: प्रधानमंत्री

जिसका आकलन किया जाता है, उसमें सुधार भी होता है और अंततः वह परिवर्तित भी होता है : प्रधानमंत्री

यह नया भारत है, यह अपने विकास के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली: 23 मार्च 2026:(PIB Delhi//मीडिया स्क्रीन डेस्क)::


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज ‘इंडिया एंड द वर्ल्ड’ विषय पर
आयोजित टीवी 9 समिट को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने विश्‍व की अभूतपूर्व और गंभीर परिस्थितियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाने के लिए टीवी 9 नेटवर्क की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “आज, विश्‍व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वह अभूतपूर्व और बेहद गंभीर हैं, और इन परिस्थितियों के बीच टीवी 9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है।”

संघर्षों से घिरी दुनिया में भारत की स्थिति के बारे में अपने उद्गार व्‍यक्‍त करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से प्रगति कर रही है। 2014 से पहले की परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए भारत नये आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद चुनौतियों के बढ़ने के बावजूद, 140 करोड़ देशवासी एकजुट रहे, जिससे भारत ने हर कठिनाई को पार किया। श्री मोदी ने कहा, “28 फरवरी के बाद इन 23 दिनों में भारत ने अपनी संबंध निर्माण क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और संकट प्रबंधन की क्षमता दिखाई है।”

बँटी हुई वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत की कूटनीतिक पहुँच के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत ने गल्फ से लेकर ग्‍लोबल वेस्‍ट तक, और ग्‍लोबल साउथ से लेकर पड़ोसी देशों तक अभूतपूर्व संबंध बनाए हैं, और खुद को सभी के लिए भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित किया है। भारत किसके साथ है, इस प्रश्‍न का साफ और स्पष्ट जवाब देते हुए श्री मोदी ने कहा, “हम भारत के साथ हैं, भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं और संवाद के साथ हैं।”

संकट के इस समय में जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ डगमगा रही हैं, भारत द्वारा पेश किए गए विविधीकरण और लचीलापन के मॉडल को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे ऊर्जा हो, उर्वरक हों या आवश्यक वस्तुएँ, यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं कि नागरिकों को कम से कम कठिनाइयों का सामना करना पड़े। श्री मोदी ने कहा, “भारत ने विविधीकरण और लचीलेपन का मॉडल पेश किया है, और यह सुनिश्चित करते हुए कि हमारे नागरिकों को कम से कम कठिनाइयों का सामना करना पड़े, हमने इस संबंध में निरंतर प्रयास किया है।”

पश्चिम एशिया संघर्ष के भारत पर प्रभाव के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने आज लोकसभा में दिए अपने वक्‍तव्‍य का उल्लेख करते हुए कहा कि यद्यपि युद्ध भौगोलिक रूप से भारत की सीमाओं से दूर है, फिर भी आज की परस्‍पर संबद्ध दुनिया में कोई भी देश युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता। श्री मोदी ने कहा, “यह संयम और संवेदनशीलता का समय है; जब देशवासी एकजुट होकर किसी संकट का सामना करते हैं, तो परिणाम हमेशा सार्थक होते हैं।”

प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित करते हुए कि दुनिया की उथल-पुथल के बावजूद भारत ने अपनी प्रगति की गति को बनाए रखा है, 28 फरवरी के बाद के 23 दिनों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने दिल्ली मेट्रो रेल के प्रमुख कॉरिडोर के लोकार्पण, सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर और नए कोटा हवाई अड्डे के शिलान्‍यास तथा मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा प्रदान किए जाने को रेखांकित किया। उन्होंने 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों को स्वीकृति दिए जाने, 1,500 मेगावाट नई क्षमता जोड़ने के लिए लघु जल विद्युत विकास योजना को मंजूरी दिए जाने, जल जीवन मिशन का 2028 तक विस्तार करने, पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि के सीधे हस्तांतरण और एमएसएमई व निर्यातकों के लिए 500 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा, “ये सभी कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।”

प्रबंधन के सिद्धांतों का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने प्रसिद्ध कहावत ‘जिसका आकलन किया जाता है, उसे प्रबंधित किया जाता है’ को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिसका आकलन किया जाता है, उसमें सुधार भी होता है और अंततः वह परिवर्तित भी होता है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि राजमार्ग निर्माण की गति 11–12 किमी/दिन से बढ़कर लगभग 30 किमी/दिन हो गई है; बंदरगाहों पर जहाजों का टर्नअराउंड समय 5–6 दिन से घटकर 2 दिन से भी कम हो गया है; पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या 400–500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है; एमबीबीएस सीटें 50–55 हजार से बढ़कर 1.25 लाख से अधिक हो गई हैं; बैंक खातों की संख्‍या 25 करोड़ से बढ़कर 80 करोड़ से अधिक हो गई है (जिनमें 55 करोड़ जन धन खाते शामिल हैं); और हवाई अड्डों की संख्या 70 से कम थी, जो बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। श्री मोदी ने कहा, “आज, भारत फास्‍ट ट्रैक पर है, आज, संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने वर्तमान में जारी महत्‍वपूर्ण परिवर्तनों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस असम में कभी गोलियों की आवाज़ सुनाई देती थी, आज वहाँ सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है; ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक क्षेत्रों का विकास हो रहा है; बिहार में पिछले दशक में 5 से अधिक नए पुलों का निर्माण हुआ है; और उत्तर प्रदेश मोबाइल फोन निर्माण के एक वैश्विक केंद्र में बदल हो चुका है। श्री मोदी ने कहा, “भारत अतीत में उत्‍पन्‍न हुए विकास असंतुलनों को भविष्य के अवसरों में बदल रहा है।”

पश्चिम बंगाल का रुख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत में यह संस्कृति, शिक्षा, उद्योग और व्यापार का केंद्र हुआ करता था। उन्‍होंने पिछले 11 वर्षों में पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण निवेशों का उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा, “देश हित को दल हित से ऊपर रखना आवश्यक है, क्योंकि राष्‍ट्र और उसका विकास राजनीति से ऊपर होता है।”

आज शहीद दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने सर्वोच्च बलिदान दिया था और आज डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती भी है। इस अवसर पर अपना संबोधन समाप्त करते हुए प्रधानमंत्री ने इन महान हस्तियों से प्रेरणा ली, जिन्होंने हमेशा देश को स्वयं से ऊपर रखा। उन्होंने इस बात पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि टीवी 9 समिट भारत के आत्मविश्वास तथा भारतीयों के प्रति दुनिया के भरोसे को और सशक्‍त करेगा। श्री मोदी ने कहा, “देश हित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाएगी।”

पीके/केसी/आरके//(रिलीज़ आईडी: 2244246) 

Friday, November 28, 2025

डीडी फ्री डिश पर लोकप्रिय क्षेत्रीय चैनलों अब और बढ़ेंगे

 सूचना और प्रसारण मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 28 NOV 2025 7:26 PM by PIB Delhi

प्रसार भारती ने विशेष पायलट पहल शुरू की

*डीडी फ्री डिश ने सूचना और शिक्षा तक पहुंच को मजबूत किया

*भारत भर में 65 मिलियन घरों तक पहुंच बनाई

*डीडी फ्री डिश 31 मार्च 2026 तक लाएगा नाइ क्रान्ति 

*नई पायलट पहल के तहत क्षेत्रीय भाषा चैनलों को मुफ्त एमपीईजी-4 स्लॉट प्रदान करेगा

नई दिल्लीः 28 नवंबर 2025:(पीआई बी दिल्ली//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन डेस्क)::

संकेतक फाईल फोटो 
प्रसार भारती डीडी फ़्री डिश प्लेटफ़ॉर्म पर एक पायलट योजना शुरू कर रही है, जिसके तहत लोकप्रिय क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल (अनुसूची आठ की भाषाएँ, हिंदी और उर्दू को छोड़कर), जिन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अनुमति और लाइसेंस प्राप्त है, को नए उन्नत एमपीईजी-4 स्ट्रीम्स पर उपलब्ध खाली डीडी फ़्री डिश स्लॉट्स के आवंटन के लिए आवेदन करने हेतु आमंत्रित किया गया है। अब तक प्रतिनिधित्व न किए गए और कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने के लिए प्रसार भारती का प्रयास, क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने सहित अन्य गतिविधियों के माध्यम से पहुंच, अवसर और जागरूकता में मौजूद अंतर को पाटने की प्रतिबद्धता से प्रेरित है।

कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बांग्ला, असमिया और ओड़िया भाषाओं के क्षेत्रीय चैनल, जो वर्तमान में डीडी फ़्री डिश प्लेटफ़ॉर्म पर अब तक प्रतिनिधित्व न किए गए और कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों को अन्य क्षेत्रीय भाषा चैनलों की तुलना में प्राथमिकता दी जाएगी। क्षेत्रीय समाचार चैनलों को गैर-समाचार क्षेत्रीय चैनलों की तुलना में प्राथमिकता दी जाएगी।

इन क्षेत्रीय चैनलों को पायलट आधार पर निःशुल्क स्लॉट आवंटित किए जाएँगे। यह आवंटन केवल 31.03.2026 तक की अवधि के लिए होगा।

डीडी फ़्री डिश का चैनल बुक़े विविध और समृद्ध है, जिसमें लगभग सभी शैलियों का प्रतिनिधित्व है। वर्तमान में डीडी फ़्री डिश पर कुल 482 टीवी चैनल उपलब्ध हैं (जिनमें 320 डीडी को -ब्रांडेड शैक्षणिक चैनल जैसे पीएम ई-विद्या और स्वयं प्रभा शामिल हैं) और 48 रेडियो चैनल भी शामिल हैं। दूरदर्शन चैनलों के अलावा, इस बुके में सामान्य मनोरंजन, समाचार, भक्ति, फ़िल्में, खेल आदि के निजी टीवी चैनल भी शामिल हैं।

प्रसार भारती का डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) प्लेटफ़ॉर्म "डीडी फ्री डिश" एक मुफ़्त प्रसारण प्लेटफ़ॉर्म है, जहाँ दर्शकों से कोई मासिक या वार्षिक सदस्यता शुल्क नहीं लिया जाता है। इस अनूठे और किफायती मॉडल ने डीडी फ्री डिश को सबसे बड़ा डीटीएच प्लेटफ़ॉर्म बना दिया है, जो दूरदराज, ग्रामीण, दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी लगभग 65 मिलियन घरों (क्रोम डेटा के अनुसार) तक पहुँचता है। डीडी फ्री डिश के माध्यम से, प्रसार भारती देश के सुदूर कोने तक गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क सूचना, शिक्षा और मनोरंजन प्रदान करके जनता को सशक्त बना रहा है, जिससे समाज के हाशिए पर पड़े और कमज़ोर वर्गों को भी लाभ मिल रहा है, जिससे लोक सेवा प्रसारण का उसका प्राथमिक उद्देश्य पूरा हो रहा है।

***//पीके/केसी/जीके/एसएस//(रिलीज़ आईडी: 2196081) 

Friday, July 25, 2025

फिल्म उद्योग में डिजिटल पायरेसी पर सख्ती शुरू

प्रविष्टि तिथि: 25 JUL 2025 at 6:09 PM by PIB Delhi

सरकार ने अंकुश लगाने के लिए किए सुदृढ़ उपाय

नई दिल्ली: 25 जुलाई 2025: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन डेस्क)::

संकेतक तस्वीर 
सरकार मनोरंजन से जुड़े रचनात्मक सेक्टर पर डिजिटल पायरेसी के प्रतिकूल प्रभाव के प्रति निरंतर सचेत है। इस महत्वपूर्ण समस्या पर ध्यान देने के लिए निम्नलिखित सुधार लागू किए गए हैं:

  • 2023 में सरकार ने डिजिटल पायरेसी के विरुद्ध उपायों को शामिल करने के लिए सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 में संशोधन किया।
  • इन संशोधनों में न्यूनतम 3 महीने का कारावास और 3 लाख रुपये के आर्थिक दंड की सख्त सजा शामिल है, जिसे 3 साल की कैद और लेखापरीक्षित सकल उत्पादन लागत के 5 प्रतिशत तक जुर्माना तक बढ़ाया जा सकता है।
  • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 6एए और 6एबी फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और प्रसारण पर रोक लगाती है।
  • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की नई जोड़ी गई धारा 7(1बी)(ii) सरकार को पायरेटेड सामग्री की मेजबानी के लिए मध्यस्थों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अधिकार देती है।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को कॉपीराइट धारकों या अधिकृत व्यक्तियों से शिकायतें प्राप्त करने तथा ऐसे कंटेंट होस्ट करने वाले मध्यवर्ती संस्थाओं को आवश्यक निर्देश जारी करने का अधिकार दिया गया है।
  • पायरेसी कार्यनीतियों को सुदृढ़ करने और समन्वित कार्य योजनाएं विकसित करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति गठित की गई है।
  • विश्व ऑडियो विजुअल एंटरटेनमेंट शिखर सम्मेलन (वेव्स) 2025 के दौरान डिजिटल पायरेसी से निपटने के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने हेतु एक प्रतियोगिता आयोजित की गई थी।

सरकार डिजिटल पायरेसी के खतरे को रोकने और भारत के इंटरटेनमेंट इको-सिस्टम की अखंडता की रक्षा के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों सहित संबंधित हितधारकों के साथ संपर्क में है।

सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने राज्यसभा में यह जानकारी दी।

***एमजी/एके/केसी/एसकेजे/एचबी//(रिलीज़ आईडी: 2148538) 

Sunday, October 27, 2024

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर में आकाशवाणी पुस्तकालय

प्रविष्टि तिथि: 27 OCT 2024 1:32 PM by PIB Delhi

उदघाटन में उपराष्ट्रपति के संबोधन का लिखित रुप (अंश)


जयपुर//नई दिल्ली: 27 अक्टूबर 2024: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन डेस्क)::

राजस्थान हाई कोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएम श्रीवास्तव एक बेहद विलक्षण व्यक्तित्व हैं। क्या शुरुआत की है आपने, दिवाली का तोहफा अपने तरीके से दे दिया। महोदय, इस बार के सदस्य के रूप में, मैं आभारी हूं।

माननीय जस्टिस इंदरजीत सिंह का काम करने का अपना तौर-तरीका है। मुझे अदालत में उनके समक्ष मिलने का अवसर नहीं मिला, लेकिन अदालत के बाहर, वह एक सज्जन व्यक्ति हैं।

एडवोकेट पवन शर्मा और एडवोकेट राज कुमार शर्मा, वह क्या कहते हैं जय और वीरू, इनको सब नुस्खे पता है। आज के दिन मेरा आना बहुत मुश्किल था| मैं कर्नाटक में था दो दिन, IIT जोधपुर का कार्यक्रम था, गुवाहाटी में मेरा कार्यक्रम है, पर यह ऐसे व्यक्ति को लेकर आ गए। रमेश शर्मा जी का निर्णय पहले कर लिया था, मुझे तो मोहर ही लगानी पड़ी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एडवोकेट भुवनेश शर्मा, मुझे बार काउंसिल ऑफ राजस्थान का सदस्य बनने का अवसर मिला है। एक नियम के कारण मैं अध्यक्ष नहीं बन सका और मैं बार काउंसिल ऑफ इंडिया का प्रतिनिधि नहीं बन सका। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट प्रहलाद शर्मा जी, अगर वे मौजूद नहीं है तो उनकी अनुपस्थिति में मैं उनका अभिनंदन करता हूं।

मेरे समय में मेट्रो-1, मेट्रो-2 जयपुर ज़िले में नहीं थे। मैं पुराने समय का व्यक्ति हूं, लेकिन ज़िला न्यायाधीशों, इस मौके पर मौजूद न्यायपालिका के सदस्यों से मैं कहना चाहता हूं कि मैं इस वक्त बेहद प्रभावित हूं।

जब मैं देश का उपराष्ट्रपति बना, तो पहले ही हफ्ते में मुझे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने आमंत्रित किया था। मैं काफी समय से उस बार का सदस्य रहा हूं। बल्कि वरिष्ठ अधिवक्ता नामित होने से कुछ समय पहले ही मैं उस बार का सदस्य बन गया। तो उस बार से मेरा संबंध लगभग तीन दशक या उससे अधिक का था। पर मैं तो आपका हूं और कहते हैं ना नाखून उंगलियों से अलग नहीं हो सकता।

मुझे इस बार ने बनाया है। मेरा परम सौभाग्य था कि मैंने ऐसे अधिवक्ता के कार्यालय को अपनी कर्मभूमि बनाया। स्वर्गीय एन एल टिबरेवाल, जिनके बहुत ऊंचे नैतिक मानक थे। मैं कहूंगा कि यह अब तक का सबसे ऊंचा स्थान है। जब ईमानदारी की बात आती है तो बिल्कुल भी समझौता नहीं करना चाहिए। उनके दफ्तर से कोई खाली हाथ नहीं गया। जिस दिन बहस करते थे, मौके पर फीस की बात नहीं करते थे। बहस के बाद ही करते थे, यह उनका सिद्धांत था। उन्होंने पेशे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को अपने बैंक बैलेंस से अधिक महत्व दिया और भगवान उनके प्रति बहुत दयालु थे। वह लंबे समय तक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नहीं रहे, शायद एक दशक तक रहे, लेकिन वह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बने, लगभग एक वर्ष तक कार्यवाहक राज्यपाल रहे। ऊपर वाला न्याय में कभी कमी नहीं रखता है।

जो काम आज हुआ है, वह दोतरफा हैं, कुछ उनमें विरोधाभास है। मैंने आज से दो दशक पहले दिल्ली से दो ट्रक रवाना किए, वह मेरी लाइब्रेरी थी। साल 1940 में , अगर मैं गलत नहीं हूं तो, ऑल इंडिया रिपोर्टर सुधांशु जी मेरे पास थे। शुरू से क्रिमिनल लॉ जनरल थी, सुप्रीम कोर्ट के मामले थे 1669 से, लेबर लॉ जनरल थे बहुत सारे।

उसके बाद मैं डिजिटलीकरण पर फोकस किया। मैंने अपने दफ्तर में मैंने कोई किताब नहीं रखी। हांलाकि तब टेक्नोलॉजी ज्यादा नहीं थी। आज के दिन टेक्नोलॉजी का आलम यह है, अगर हम कहें कि भारत एक-छठी जनसंख्या का घर हैं, वैश्विक डिजिटल लेनदेन का 5- प्रतिशत से ज्यादा लेनदेन हमारे देश में होता है। यदि आप इंटरनेट कंजंप्शन की बात करेंगे, तो एक भारतीय के लिए इंटरनेट कज़म्पशन की प्रति व्यक्ति डेटा खपत, चीन और अमेरिका दोनों को मिला दिया जाए, उसकी तुलना में भी अधिक है। हमारे यहां डिजिटल ट्रांजेक्शन तेज़ी से हो रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी सभी के डिजिटल लेनदेन मिला दिए जाएं, फिर भी हमारे उनसे चार गुना है। ऐसे भारत में इसकी शुरुआत का बहुत बड़ा मतलब है। मैं बार के नेतृत्व और बार के सदस्यों को भी बधाई देता हूं।

प्रौद्योगिकी को अपनाना अब विलासिता नहीं है, यह अब ज़रुरत नहीं, यह एकमात्र रास्ता है। आज के वक्त में नौजवान पीढ़ी इसका प्रयोग ज्यादा करती हैं। मेरी उम्र के लोग कम करेंगे। वे इस बात की सराहना करेंगे कि प्रौद्योगिकी का दायरा बढ़ गया है। एक नया इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन आ गया है। हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन में बहुत बड़े बदलाव के मुहाने पर हैं। पहले अंग्रेजी के शब्द हुआ करते थे। हकीकत में जो उनका डाइमेंशन है बहुत दूर तक ले जाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपकी बहुत मदद कर सकती है। बार के सदस्यों से मेरा अनुरोध है कि कार्य सत्र कराने चाहिए। ऐसे तकनीकी सत्र कराइए, जहां आपको इसके बारे में पता चले। जो समय आप इसमें लगाएंगे, आपको अंदाजा नहीं है कि आप आगे कितना समय बचा पाएंगे। आपकी गुणवत्ता बढ़ेगी और आपकी काबिलियत इसी चीज में है कि बदलाव के संकेतक बनो। जब यह सब कुछ अपने हाथ में है, उसको इस्तेमाल नहीं करना आपके खुद के साथ अन्याय होगा।

इससे जो बहुत बड़ी क्रांति देश में आई है। लंबे समय से बड़ी मांग उठ रही थी कि अंग्रेजों के कानून को हम कब तक ढोते रहेंगे, कब तक बर्दाश्त करते रहेंगे, उनका कानून उनको बचाने के लिए था। दंड विधान से न्याय विधान तक की यात्रा हमें औपनिवेशिक मानसिकता और औपनिवेशिक विरासत से मुक्त करने वाली एक महत्वपूर्ण यात्रा है। जुलाई से ये बदलाव तो लागू हो गए हैं। यह युवा वकीलों के लिए एक वरदान है। अब आप भी इस यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं।

यदि अगर आप ऐसा करेंगे और इसमें तकनीक का इस्तेमाल करेंगे तो आपको बहुत फायदा मिलेगा। जब ये तीन कानून पारित हुए तो मुझे काउंसिल ऑफ स्टेट्स, हाउस ऑफ एल्डर्स, उच्च सदन की अध्यक्षता करने का सौभाग्य मिला। 

एक बहुत ही सशक्त समिति ने प्रत्येक प्रावधान की जांच की, सूक्ष्म स्तर पर उसका विश्लेषण किया। मैं आपको यही कह सकता हूं कि मैं तो अंदाजा नहीं लगा सकता था।

*****//एमजी/आरपीएम/केसी/एनएस/डीके//(रिलीज़ आईडी: 2068667) 

Wednesday, September 18, 2024

मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए तैयार

सूचना और प्रसारण मंत्रालय//Posted On: 18 SEP 2024 3:27 PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE) की स्थापना को मिली मंजूरी 

*कैबिनेट ने एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स एंड एक्सटेंडेड रियलिटी (एवीजीसी-एक्सआर) के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) की स्थापना को मंजूरी दी

*आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए सरकार का क्रिएटर्स इकोनॉमी को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास

*एनसीओई भारत को अत्याधुनिक कॉन्टेंट प्रदान करने के कॉन्टेंट हब के रूप में स्थापित करके भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर बढ़ाएगा और विदेशी निवेश आकर्षित करेगा  


नई दिल्ली: 18 सितंबर 2024:(पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन डेस्क)::

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंपनी अधिनियम, 2013 के अधीन  धारा 8 कंपनी के रूप में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स एंड एक्सटेंडेड रियलिटी (एवीजीसी-एक्सआर) के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है, जिसमें फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और भारतीय उद्योग परिसंघ भारत सरकार के साथ भागीदार के रूप में उद्योग निकायों का प्रतिनिधित्व करेंगे। एनसीओई की स्थापना मुंबई, महाराष्ट्र में की जाएगी और यह देश में एक एवीजीसी कार्य बल की स्थापना के लिए केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री की वर्ष 2022-23 की बजट घोषणा के अनुसरण में है।

एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र आज मीडिया और मनोरंजन के पूरे क्षेत्र में अपरिहार्य भूमिका निभाता है, जिसमें फिल्म निर्माण, ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म, गेमिंग, विज्ञापन तथा  स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक क्षेत्रों सहित कई अन्य क्षेत्र शामिल हैं, इस प्रकार देश की विकास गाथा की समग्र संरचना को समेटे हुए है। तेजी से विकसित हो रही तकनीक और पूरे देश में इंटरनेट की बढ़ती पहुंच के साथ-साथ सबसे सस्ती डेटा दरों सहित, वैश्विक स्तर पर एवीजीसी-एक्सआर का उपयोग तेजी से बढ़ने को तैयार है।

एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना

इस तेज़ गति को बनाए रखने के लिए, देश में एवीजीसी-एक्सआर इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने के शीर्ष संस्थान के रूप में कार्य करने के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा रही है। एनसीओई शौकिया और पेशेवर दोनों को अत्याधुनिक एवीजीसी-एक्सआर तकनीकों के नवीनतम कौशलों से लैस करने के लिए विशेष प्रशिक्षण-सह-शिक्षण कार्यक्रम प्रदान करने के साथ-साथ,अनुसंधान एवं विकास को भी बढ़ावा देगा और कंप्यूटर विज्ञान, इंजीनियरिंग, डिजाइन और कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाएगा जो एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में बड़ी सफलताओं का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। यह राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र घरेलू उपयोग और वैश्विक आउटरीच दोनों के लिए भारत के आईपी के निर्माण पर भी व्यापक रूप से ध्यान केंद्रित करेगा, जिससे कुल मिलाकर भारत की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित कॉन्टेंट का सृजन होगा। इसके अलावा, एनसीओई, एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में स्टार्टअप और शुरुआती अवस्था वाली  कंपनियों को प्रोत्साहन देने के लिए उन्हें संसाधन प्रदान करते हुए एक इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में कार्य करेगा। साथ ही, एनसीओई केवल एक अकादमिक उत्प्रेरक के रूप में ही नहीं, बल्कि उत्पादन/उद्योग उत्प्रेरक के रूप में भी काम करेगा।

एनसीओई को एवीजीसी-एक्सआर उद्योग के विकास के लिए प्रेरक शक्ति के रूप में स्थापित किए जाने से यह देश के सभी हिस्सों के युवाओं के लिए रोजगार के सबसे बड़े स्रोतों में से एक के रूप में काम करेगा। इससे रचनात्मक कला और डिजाइन क्षेत्र को बहुत बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत पहल के लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हुए भारत को एवीजीसी-एक्सआर गतिविधियों का केंद्र बनाया जा सकेगा।

एवीजीसी-एक्सआर के लिए एनसीओई भारत को अत्याधुनिक कॉन्टेंट उपलब्ध कराने वाले कॉन्टेंट हब के रूप में स्थापित करेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ेगी और मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र के प्रति विदेशी निवेश आकर्षित होगा।

***//एमजी /एआर/ आरके/ डीके//(Release ID: 2056033)

Friday, March 31, 2023

टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन

प्रविष्टि तिथि: 31 मार्च 2023 5:25 PM by PIB Delhi

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने प्रोत्साहन के लिए सिफारिशें जारी कीं

नई दिल्ली:31 मार्च 2023: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन//)::

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज "टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करने" के बारे में अपनी सिफारिशें जारी की हैं।

भारतीय प्रसारण क्षेत्र का डिजिटलीकरण 2012 में शुरू हुआ और मार्च 2017 तक यह काम देश भर में पूरा हो गया। इसने मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय विनिर्माताओं के विकास के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान किया। सरकार ने 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' जैसी पहलें शुरू की हैं और भारत को एक वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण केंद्र में परिवर्तित करने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है।

उपकरण विनिर्माण क्षेत्र में भारत की वास्तविक क्षमता का उचित रूप से आकलन करने और सरकार को सिफारिशों पर पहुंचने के उद्देश्य से प्राधिकरण ने भारतीय प्रसारण उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को आयात-निर्भर क्षेत्र से स्वदेशी विनिर्माण के वैश्विक केंद्र में परिवर्तित करने के लिए सक्षम बनाया है। प्राधिकरण ने स्वत: संज्ञान लेकर सभी हितधारकों की टिप्पणी प्राप्त करने के लिए 22-12-2021 को "टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करना" के बारे में एक परामर्श पत्र जारी किया था।

टिप्पणियाँ प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 19-01-2022 और उनके बारे में यदि कोई जवाबी-टिप्पणियाँ प्राप्त करने की तिथि 02-02-2022 तक थी, जिसे हितधारक के अनुरोध पर क्रमशः 09-02-2022 और 23-02-2022 तक बढ़ाया गया था। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण को हितधारकों से 16 टिप्पणियाँ और 01 जवाबी-टिप्पणी प्राप्त हुईं, जो भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इस संबंध में दिनांक 28-04-2022 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ओपन हाउस डिस्कशन भी आयोजित किया गया।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने परामर्श प्रक्रिया के दौरान हितधारकों से प्राप्त सभी टिप्पणियों और मुद्दों के आगे के विश्लेषण पर विचार करने के बाद नीचे दी गई अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दिया है:

ए-उभरती प्रौद्योगिकियों और सम्मिलन के युग के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करने और प्रसारण उपकरणों के लिए एक इको-सिस्टम बनाने का लक्ष्य रखने की आवश्यकता है। प्रसारण उपकरणों के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं या प्रसारण उपकरणों पर भी ध्यान केंद्रित करने के लिए मौजूदा उत्कृष्टता केंद्रों का उन्नयन किया जा सकता है।

बी-टेलीकॉम निर्यात संवर्धन समिति (टीईपीसी) या कुछ इसी तरह के संगठन को स्थानीय रूप से निर्मित प्रसारण उपकरणों के निर्यात को प्रोत्साहन प्रदान करने और सुविधा प्रदान करने के लिए सक्षम करना चाहिए।

सी-दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (टीईसी), दूरसंचार विभाग को सभी प्रसारण उपकरणों के परीक्षण और मानकीकरण के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए।

डी-सी-डॉट जैसे सार्वजनिक क्षेत्र में मौजूदा अनुसंधान एवं विकास केंद्रों को मजबूत करना। सार्वजनिक-निजी भागेदारी (पीपीपी) के माध्यम से उद्योग जगत की भागीदारी के साथ-साथ स्थानीय अनुसंधान एवं विकास ईकोसिस्टम का विकास करना चाहिये। प्रसारण क्षेत्र के लिए स्थानीय उत्पादों/प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान एवं विकास और विकास को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए 'प्रौद्योगिकी विकास कोष' बनाया जाना चाहिए। स्थानीय सीएएस के उपयोग को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान और विकास और मानकीकरण को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए ऐसे उपायों के परिणामों की समीक्षा करना चाहिए।

ई- स्थानीय अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से विकसित उत्पादों के लिए गो टू मार्केट रणनीति भी अपनाई जानी चाहिए। 

एफ- लीनियर सेट-टॉप बॉक्स को उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन-पीएलआई योजना के अंतर्गत शामिल किया जाना चाहिए।

जी- चिपसेट सहित प्रसारण उपकरण के लिए आवश्यक स्वदेशी घटकों की उपलब्धता की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत स्थानीयकरण स्तर निर्धारित करते समय स्थानीय घटकों की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक निवेश परिव्यय की समीक्षा सूक्ष्म, लघु और माध्यम उद्यम (एमएसएमई) द्वारा समय-समय पर पहचाने जा सकने वाले कुछ चयनित उपकरणों के लिए विनिर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करने के दृष्टिकोण से की जानी चाहिए।

एच- सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की तर्ज पर टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र के अन्य प्रासंगिक घटकों के स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करना चाहिए। स्थानीय रूप से प्राप्त घटकों/सेवाओं के प्रतिशत के संदर्भ में टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में विभिन्न उपकरण श्रेणियों के लिए 'स्थानीय विनिर्माण' के दायरे को परिभाषित किया जाना चाहिए।

जे- टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में स्थानीय विनिर्माण पर उनके प्रभाव के संबंध में मुक्त व्यापार समझौता-एफटीए और ऐसे समझौतों की समीक्षा की जानी चाहिए।

सिफारिशों के बारे में पूरी जानकारी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है।

**** एमजी/एमएस/एआर/एमकेएस/डीके//(रिलीज़ आईडी: 1912672) 

Friday, January 6, 2023

28 क्षेत्रीय दूरदर्शन चैनल एचडी कार्यक्रम निर्माण में सक्षम होंगे

Posted On: 06 January 2023 at 3:52 PM by PIB Delhi

तेज़ी से फैलेगा आकाशवाणी और दूरदर्शन का दायरा 

बीआईएनडी योजना के तहत एफएम कवरेज का विस्तार 80 प्रतिशत से अधिक आबादी तक

नई दिल्ली: 06 जनवरी 2023: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

भारत सरकार ने सरकारी मीडिया से जुड़े सबसे पुराने संस्थानों आकाशवाणी और दूरदर्शन के विस्तार कार्य की घोषणाएं की हैं। इससे इनका दायरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाएगा। ऐसा होने से कवरेज का विस्तार जम्मू-कश्मीर की सीमाओं के साथ 76 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा और भारत-नेपाल सीमा के साथ इसका दायरा 63 प्रतिशत तक विकसित हो जाएगा। 

इस विस्तार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रसार भारती सुदूर, जनजातीय, एलडब्ल्यूई और सीमावर्ती क्षेत्रों में 8 लाख से अधिक डीडी डीटीएच रिसीवर सेटों का निःशुल्क वितरण भी करेगा। 

कैबिनेट ने 4 जनवरी, 2023 को ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के आधुनिकीकरण, उन्नयन और विस्तार के लिए 2539.61 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ "प्रसारण अवसंरचना नेटवर्क विकास (बीआईएनडी)" योजना को मंजूरी दी। यह योजना 2025-26 तक, अर्थात पांच साल की अवधि के लिए है। इस योजना में आकाशवाणी और दूरदर्शन की प्राथमिक परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें एफएम रेडियो नेटवर्क और मोबाइल टीवी कार्यक्रम निर्माण सुविधाओं के विस्तार और मजबूती पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिनके लिए 950 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं। इन परियोजनाओं को फास्ट-ट्रैक मोड पर पूरा किया जाएगा।

इस योजना का उद्देश्य एलडब्ल्यूई, सीमावर्ती और रणनीतिक क्षेत्रों में बेहतर अवसंरचना तैयार करना और सार्वजनिक प्रसारक की पहुंच को बढ़ाना है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दर्शक -  दोनों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का विकास तथा अधिक चैनलों को समायोजित करने के लिए डीटीएच प्लेटफॉर्म की क्षमता के उन्नयन के जरिये विविध सामग्री की उपलब्धता, दर्शकों के लिए उपलब्ध विकल्पों का विस्तार करेगी। योजना का उद्देश्य मुख्य रूप से एलडब्ल्यूई और आकांक्षी जिलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए टियर II और टियर-III शहरों में एफएम नेटवर्क का विस्तार करना है।

प्रसार भारती के दो प्रमुख स्तंभों में, आकाशवाणी, देश में 501 आकाशवाणी प्रसारण केंद्रों के माध्यम से 653 आकाशवाणी ट्रांसमीटरों (122 मीडियम वेव, 7 शोर्ट वेव और 524 एफएम ट्रांसमीटर) के साथ विश्व सेवा, पड़ोस सेवाएं, 43 विविध भारती चैनल, 25 रेनबो चैनल और 4 एफएम गोल्ड चैनल की सुविधा देते हुए अपने श्रोताओं को सेवाएं प्रदान करता है।      

दूरदर्शन अपने दर्शकों को 66 दूरदर्शन केंद्रों के माध्यम से 36 डीडी चैनलों का प्रसारण करता है, जो विभिन्न वितरण प्लेटफार्मों, जैसे केबल, डीटीएच, आईपीटीवी "न्यूजऑनएयर" मोबाइल ऐप, विभिन्न यूट्यूब चैनलों और 190+ देशों में वैश्विक उपस्थिति वाले अपने अंतरराष्ट्रीय चैनल डीडी इंडिया के माध्यम से कार्यक्रम प्रसारित करते हैं।

बीआईएनडी योजना के तहत निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियों की योजना बनाई गई है

आकाशवाणी

भौगोलिक क्षेत्र और आबादी के हिसाब से देश में एफएम कवरेज को क्रमशः 58.83 प्रतिशत और 68 प्रतिशत से बढ़ाकर 66.29 प्रतिशत और 80.23 प्रतिशत करना।

भारत-नेपाल सीमा पर आकाशवाणी के एफएम के कवरेज को मौजूदा 48.27 प्रतिशत से बढ़ाकर 63.02 प्रतिशत करना।

जम्मू एवं कश्मीर सीमा पर आकाशवाणी के एफएम के कवरेज को 62 प्रतिशत से बढ़ाकर 76 प्रतिशत करना।

30,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करने के लिए रामेश्वरम में 300 मीटर उंचे टावर पर 20 किलोवाट क्षमता का एक एफएम ट्रांसमीटर स्थापित किया जाएगा।

दूरदर्शन

प्रसार भारती के केन्द्रों में नवीनतम प्रसारण एवं स्टूडियो उपकरण स्थापित करके दूरदर्शन और आकाशवाणी के चैनलों को नया स्वरूप देना।

डीडीके विजयवाड़ा और लेह स्थित अर्थ स्टेशनों का 24 घंटे प्रसारण वाले चैनलों के रूप में उन्नयन।

प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह/कार्यक्रमों और वीवीआईपी कवरेज को कवर करने के लिए फ्लाई अवे यूनिटों की शुरुआत।

28 क्षेत्रीय दूरदर्शन चैनलों को हाई-डेफिनिशन प्रोग्राम प्रोडक्शन में सक्षम केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

पूरे दूरदर्शन नेटवर्क में 31 क्षेत्रीय समाचार इकाइयों को कारगर तरीके से समाचार एकत्र करने के लिए नवीनतम उपकरणों के साथ उन्नत एवं आधुनिक बनाया जाएगा।

एचडीटीवी चैनलों को अपलिंक करने हेतु डीडीके गुवाहाटी, शिलांग, आइजोल, ईटानगर, अगरतला, कोहिमा, इंफाल, गंगटोक और पोर्ट ब्लेयर के अर्थ स्टेशनों का उन्नयन और प्रतिस्थापन।

इस योजना की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं: 

देश के छह लाख वर्गमीटर से अधिक इलाके, मुख्य रूप से श्रेणी- II और श्रेणी - III शहरों, एलडब्ल्यूई और सीमावर्ती इलाकों तथा आकांक्षी जिलों में एफएम कवरेज को बढ़ाने के लिए 100 वाट  क्षमता वाले 100 ट्रांसमीटरों के अलावा 10 किलोवाट एवं उच्च क्षमता के 41 एफएम ट्रांसमीटर।

फ्री डिश की डीडी क्षमता को मौजूदा 116 चैनलों से बढ़ाकर लगभग 250 चैनलों तक पहुंचाना ताकि चैनलों का एक समृद्ध एवं विविध गुलदस्ता निशुल्क उपलब्ध कराया जा सके।

यहां यह बताना प्रासंगिक है कि डीडी फ्री डिश प्रसार भारती का फ्री-टू-एयर डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) प्लेटफॉर्म है, जिसके अनुमानित 4.30 करोड़ कनेक्शन हैं (फिक्की और ई एंड वाई रिपोर्ट 2022 के अनुसार) जो इसे भारत का सबसे बड़ा डीटीएच प्लेटफॉर्म बनाते हैं। डीडी फ्री डिश के दर्शकों को इस प्लेटफॉर्म के चैनल देखने के लिए किसी मासिक या वार्षिक शुल्क का भुगतान करने की जरूरत नहीं है। इस प्लेटफॉर्म के पास 167 टीवी चैनलों का समृद्ध गुलदस्ता है जिसमें 49 दूरदर्शन और संसद चैनल, प्रमुख प्रसारकों के 77 निजी टीवी चैनल (11 जीईसी, 14 मूवी, 21 समाचार, 7 संगीत, 9 क्षेत्रीय, 7 भोजपुरी, 1 खेल, 5 भक्ति चैनल, 3 विदेशी चैनल), 51 शैक्षिक चैनल और 48 रेडियो चैनल शामिल हैं।

आपदा या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में निर्बाध डीटीएच सेवा सुनिश्चित करने के लिए डीडी फ्री डिश डिजास्टर रिकवरी सुविधा की स्थापना।

सहज और कुशल निर्माण एवं प्रसारण के लिए फील्ड स्टेशनों की प्रसारण सुविधाओं का स्वचालन और आधुनिकीकरण। इसमें स्वचालित प्लेआउट सुविधाएं, न्यूज प्रोडक्शन प्रणाली के लिए समाचार कक्ष में कंप्यूटर प्रणाली, रियल टाईम प्रोडक्शन में संपादन और प्रसारण को पूरा करने के लिए फ़ाइल आधारित कार्य प्रवाह, नवीनतम स्टूडियो कैमरे, लेंस, स्विचर्स, राउटर्स आदि तथा पूरे देश भर में दूरदर्शन के फील्ड स्टेशनों के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रावधान शामिल हैं। यह क्षमता निर्माण उपाय दूरदर्शन को समय के अनुरूप प्रौद्योगिकी और आधुनिक टीवी स्टूडियो प्रोडक्शन की तकनीक से ताममेल करने में सक्षम बनाएगा।

मनोरंजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, युवा, खेल और अन्य सार्वजनिक सेवा सामग्री पर ध्यान देने के साथ क्षेत्रीय भाषाओं सहित समृद्ध सामग्री उपलब्ध करना।

त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं के साथ समाचार एकत्र करने की सुविधाओं को मजबूत बनाना और स्थानीय समाचार कवरेज की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में इसका विस्तार करना।

दृष्टिगत रूप से आकर्षक कार्यक्रमों के कंटेंट निर्माण के लिए ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी जैसी नई तकनीकों का समावेश।

उपग्रह ट्रांसपोंडरों के कुशल उपयोग के लिए स्पेक्ट्रम कुशल प्रौद्योगिकी के साथ मौजूदा अप-लिंक स्टेशनों को अपग्रेड करना।

ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन नेटवर्क में डेटा प्रवाह के प्रभावी प्रबंधन के साथ गवर्नेंस में दक्षता और पारदर्शिता लाना।

घरेलू और वैश्विक दर्शकों दोनों के लिए डिजिटल पहुंच में महत्वपूर्ण बढ़ोत्तरी करना।

दूरस्थ, जनजातीय, एलडब्ल्यूई और सीमावर्ती क्षेत्रों में 8 लाख से अधिक डीडी डीटीएच रिसीवर सेटों के मुफ्त वितरण की योजना बनाई गई है ताकि इन क्षेत्रों में दर्शकों को टेलीविजन और रेडियो सेवाओं का उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सके।

यह योजना प्रसारण उपकरणों की आपूर्ति और स्थापना से संबंधित विनिर्माण और सेवाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन भी करेगी। विभिन्न मीडिया क्षेत्रों के सामग्री उत्पादन क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी उपलब्ध होंगे।

*** एमजी/एएम/जेके/आर/आईपीएस/ओपी (रिलीज़ आईडी: 1889219)

Tuesday, December 20, 2022

भारत सरकार ने यूट्यूब पर हमला बोला

Posted On: 20 DEC 2022 12:02PM by PIB Delhi

यूट्यूब पर व्यापक पैमाने पर फैली फर्जी खबरों पर बोला हमला 


नई दिल्ली: 20 दिसंबर 2022: (पी.आई.बी.//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::

मीडिया के खिलाफ ज़रा सी भी बात हो तो हंगामा खड़ा होने लगता है लेकिन अगर मीडिया के नाम पर ही मनमाने ढंग की बातें फैलने लगें तो क्या होना चाहिए? बहुत ही बेखौफी से चल रहा था इस तरह का सिलसिला। बिना सिर पैर की बातें लगातार फ़ैल रहीं थी। दिलचस्प बात यह भी कि काफी देर से कुछ इसी तरह का यह सब हो रहा था। इसी बीच सरकार हरकत में आई और सामने आया सरकार का एक्शन। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की फैक्ट-चेक इकाई ने फर्जी खबरें फैलाने वाले तीन यूट्यूब चैनलों का भंडाफोड़ किया है। आप हैरान हो जाएंगे इन फर्जी खबरों की सुर्खियां पढ़ कर। मीडिया की प्रमाणिकता को बुरी तरह धूमिल करने के ऐसे प्रयास भी किसी गहरी साजिश का ही हिस्सा लगते हैं। 

पत्र सूचना कार्यालय की फैक्ट-चेक इकाई ने सर्वोच्च न्यायालय, भारत के मुख्य न्यायाधीश और भारत के प्रधानमंत्री के बारे में फर्जी वीडियो की कलई खोली और यह भी बताया कि इन वीडियो के लाखों दर्शक थे।  हर रोज़ दर्शकों के सामने मनमाना प्रचार मनमाने अंदाज़ में परोसा जा रहा था। लुभावने शब्दों में ऐसी बातें कि तुरंत यकीन हो जाए लेकिन जब वास्तविकता खंगालो तो सब कुछ आधारहीन। कुल मिला कर व्यापक स्तर का फ्राड समाज और सरकार की नाक के तले चल रहा था। ये लोग खुद को चैनल मालिक कहलाते हुए मनमाने प्रचार कर रहे थे। 

भारत निर्वाचन आयोग, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर भी पूरी तरह से झूठी खबरें प्रसारित की गईं। लोगों तक दिन दिहाड़े भ्रामक प्रचारपहुंच  रहा था और वो भी लगातार। यूटयूब की सुविधा और तकनोलोजी का इन लोगों ने जी भर का फायदा उठाया। मनमाने प्रचार किए और मनमानी बातें फैलाईं। लोग भी हैरान रह गए कि आखिर कौन है इनके पीछे। पत्र सूचना कार्यालय की फैक्ट-चेक इकाई ने पता लगाया है कि इन यूट्यूब चैनलों के 33 लाख सब्सक्राइबर हैं और इन्हें 30 करोड़ से अधिक बार देखा गया है

चालीस से अधिक फैक्ट-चेक श्रृंखला के क्रम में पत्र सूचना कार्यालय की फैक्ट-चेक इकाई (एफसीयू) ने यूट्यूब के ऐसे तीन चैनलों का भंडाफोड़ किया है, जो भारत में फर्जी खबरें फैला रहे थे। इन यूट्यूब चैनलों के लगभग 33 लाख सब्सक्राइबर थे। इनके लगभग सभी वीडियो फर्जी निकले; बहरहाल इन्हें 30 करोड़ से अधिक बार देखा गया है। अभी केवल तीन चैनलों का ही भंडाफोड़ हुआ है लेकिन वास्तव में इस तरह के लोगों और चैनलों की संख्या बहुत अधिक होगी। इन के नेटवर्क से भी कितने लोग जुड़े होंगें इसकी संख्या सामने आना भी अभी बाकी है। 

यह पहली बार है जब पत्र सूचना कार्यालय ने सोशल मीडिया पर व्यक्तियों द्वारा झूठी बातें फैलाने को मद्देनजर रखते हुए सभी यूट्यूब चैनलों की कलई खोलकर रख दी है। पत्र सूचना कार्यालय ने तथ्यों की जो पड़ताल की है, उसका विवरण इस प्रकार हैः

 क्र. सं.     यूट्यूब चैनल का नाम       सब्सक्राइबरों की संख्या     कितनी बार देखा गया

 1.           न्यूज हेडलाइन्स                      9.67 लाख                               31,75,32,290

 2.           सरकारी अपडेट                    22.6 लाख                                 8,83,594

3.           आज तक LIVE                      65.6 हजार                             1,25,04,177

यूट्यूब के उपरोक्त चैनल माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय मुख्य न्यायाधीश, सरकारी योजनाओं, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों, कृषि ऋणों को माफ करने आदि के बारे में झूठी और सनसनीखेज खबरें फैलाते हैं। इनमें फर्जी खबरें भी शामिल रहती हैं। उदाहरण के लिये इन फर्जी खबरों में सर्वोच्च न्यायालय यह आदेश देने वाला है कि भावी चुनाव मतपत्रों द्वारा होंगे; सरकार बैंक खाताधारियों, आधार कार्ड और पैन कार्ड धारकों को धन दे रही है; ईवीएम पर प्रतिबंध आदि खबरें शामिल हैं।

यूट्यूब के इन चैनलों के बारे में गौर किया गया कि ये फर्जी और सनसनीखेज थंबनेल लगाते हैं, जिनमें टीवी चैनलों के लोगो तथा उनके न्यूज एंकरों की फोटो होती है, ताकि दर्शकों को यह झांसा दिया जा सके कि वहां दिये गये समाचार सही हैं। इन चैनलों के बारे में यह भी पता लगा है कि ये अपने वीडियो में विज्ञापन भी चलाते हैं तथा यूट्यूब पर झूठी खबरों से कमाई कर रहे हैं।

पत्र सूचना कार्यालय की फैक्ट-चेक इकाई की कार्रवाई के क्रम में पिछले एक वर्ष में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक सौ से अधिक यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक कर दिया है। अभी जांचपड़ताल और आगे बढ़ी तो और नाम भी सामने आएंगे। देश की एकता, अखंडता साम्प्रदायिक सदभाव के खिलाफ भ्रामक प्रचार करने वाले चैनलों की संख्या अभी अलग से होगी। 

Monday, November 21, 2022

हर किसी को और सभी को आमंत्रण:

Posted On: 21st November 2022 at 6:52 PM by PIB Delhi

#NotJustIFFIMemeContest का शुभारंभ


गोवा
//नई दिल्ली: 21 नवंबर 2022: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

जब तक किसी बड़ी इवेंट के साथ आम लोग न जुड़ें तब तक वो इवेंट सही मायनों में बड़ी नहीं बनती। उसका आधार धरातल से जुड़े लोग ही बड़ा बनाते हैं। ग्राउंड ज़ीरो पर खड़े हो कर ही छुआ जा सकता है आसमान। ज़मीन से ही लग सकती है आकाश की तरफ बड़ी से बड़ी छलांग। यह निमंत्रण-यह घोषणा वास्तव में उससमाँ की तरफ एक सामूहिक छलांग भी है। 

यह कहा जाता है कि न तो आंख को देखकर तृप्ति मिलती है, न ही कान सुनकर संतुष्ट होता है। जीहां, हम इफ्फी का उत्सव मना रहे हैं, लेकिन हम जो देख रहे हैं, जो सुन रहे हैं महज उससे ही संतुष्ट नहीं हैं। हमारा कहने का मतलब यह है कि हमें अच्छी, शानदार और सुंदर चीजें सुनने और देखने को मिली हैं, लेकिन हम उतने से ही संतुष्ट नहीं हैं। हमारी आत्मा तृप्त नहीं हुई है। अनंत सिनेमाई प्रेरणा की हमारी ललक पूरी नहीं हुई है।

जीहां, ये दिल मांगे मोर मीम! अधिक रचनात्मक सामग्री। बड़ी संख्या में लोग न सिर्फ इफ्फी में प्रदर्शित की जा रही फिल्मों, बल्कि अन्य फिल्मों की सुंदरता के बारे में भी बातें कर रहे हैं। हममें से अधिकांश लोग इफ्फी के 53वें संस्करण में सम्मानित किए जा रहे फिल्म निर्माताओं के सपनों, संघर्षों और आकांक्षाओं से प्रेरित हो रहे हैं। हममें से कई लोग आश्चर्य, उत्साह, खुशी, अंतर्दृष्टि और इन सबसे बढ़कर इफ्फी से मिलने वाली प्रेरणा को साझा कर रहे हैं। लेकिन बातें सिर्फ इफ्फी तक ही सीमित नहीं है।

तो आइए हमारे साथ। पीआईबी में हम-पीआईबी आईएफएफआई कास्ट एंड क्रू - यहां एक मीम प्रतियोगिता शुरू कर रहे हैं जिसे हमने #NotJustIFFIMemeContest  का नाम दिया है।

यहां प्रस्तुत मात्र नियम भर नहीं हैं:

यहां केवल एक नियम है: अपनी अनंत अव्यक्त रचनात्मक क्षमता का उपयोग करें। हर कोई रचनात्मक है और हो सकता है। एक बेहतरीन मीम या बेहतरीन मीमों की एक श्रृंखला या बेहतरीन मीमों की श्रृंखलाओं की एक श्रृंखला प्रकाशित करें, जो लोगों को हंसने, कूदने, उछलने और एक दूसरे को गले लगाने, अपनी परेशानियों को भूलने और इन सबसे बढ़कर फिल्मों और जीवन से एक बार फिर से प्यार करने को प्रेरित करे।

हम नियम 1 को दोहराते हैं। आपके मीम लोगों को फिल्मों और जीवन से एक बार फिर से प्यार करने को प्रेरित करें।

अपने मीम को सोशल मीडिया पर प्रकाशित करें। सिर्फ हैशटैग #NotJustIFFIMemes का ही इस्तेमाल न करें यानी हैशटैग का इस्तेमाल करें, लेकिन सिर्फ हैशटैग का इस्तेमाल भर न करें बल्कि इस हैशटैग का इस्तेमाल करके अपने बेहतरीन और प्रेरक मीम साझा करें।

जरूरी नहीं कि सभी मीम अच्छे ही हों। प्रयोग करना रचनात्मकता की कुंजी है। हंसने से डरिए मत (हम आप पर नहीं हंसेंगे, बल्कि हम आपके साथ हंसेंगे, भले ही कोई हम पर हंसे!)

इस प्रतियोगिता की कोई अंतिम तिथि नहीं है। हम उन मीम बनाने वाले को पुरस्कार प्रदान करेंगे, जो वैसे मीम के साथ सामने आएं जो हमें न सिर्फ आभार जताने बल्कि सराहने और पुरस्कार प्रदान करने की दृष्टि से पर्याप्त प्रेरक लगें।

विजेताओं की कोई निश्चित संख्या नहीं है। हम अपने सामर्थ्य के अनुरूप उन लोगों को पुरस्कृत करेंगे, जो शानदार मीम के साथ सामने आते हैं और जिनके मीम हमें काफी प्रेरक लगें।

पुरस्कार क्या होंगे? हम वैसे पुरस्कार देंगे जो आपको फिल्मों और जीवन से प्यार करने या फिल्मों और जीवन के प्रति आपके प्यार को और बढ़ाने को प्रेरित करे, ताकि ... आप ऐसे मीम बनाते रहें और फिल्मों व इफ्फी के प्रति अपने प्यार को साझा करते रहें, चाहे आप इस प्रतियोगिता को जीतें या नहीं !

तो, अब और इंतजार मत कीजिए। अब सोचना शुरू कीजिए! हम आपके द्वारा बनाए जाने वाले मीम को देखने के लिए और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते। शुरू कीजिए। अभी। तत्काल!

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/notjust5T63.jpg

***  एमजी/एएम/आर/एसके    (रिलीज़ आईडी: 1877838)

Wednesday, July 7, 2021

न्‍यूजऑनएयर रेडियो लाइव-स्ट्रीम ग्‍लोबल रैंकिंग

 07-जुलाई-2021 17:16 IST

जर्मनी और कुवैत ने शीर्ष 10 में अपनी जगह बनाई 

एआईआर न्‍यूज 24x7 अब एक पायदान ऊपर

Courtesy Photo
दुनिया के शीर्ष देशों (भारत को छोड़कर), जहां ‘न्यूजऑनएयर एप’ पर ऑल इंडिया रेडियो लाइव-स्ट्रीम सबसे लोकप्रिय हैं, की नवीनतम रैंकिंग में फिजी 5वें स्थान से ऊपर चढ़कर दूसरे पायदान पर पहुंच गया है, जबकि सऊदी अरब ने शीर्ष 10 में अपनी वापसी कर ली है। कुवैत और जर्मनी ने शीर्ष 10 में अपनी जगह बना ली है, जबकि फ्रांस और न्यूजीलैंड अब शीर्ष 10 में नहीं हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका अब भी नंबर 1 बना हुआ है।

एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत ऑल इंडिया रेडियो की तेलुगू और तमिल लाइव-स्ट्रीम सेवाएं संयुक्त राज्य अमेरिका में लोकप्रिय हैं, जबकि एआईआर पंजाबी सेवा ब्रिटेन में लोकप्रिय है।

विश्व स्तर पर (भारत को छोड़कर) शीर्ष एआईआर स्ट्रीम की रैंकिंग में आए बड़े बदलावों के तहत एआईआर न्‍यूज 24x7 सातवें पायदान से एक स्‍थान ऊपर चढ़कर छठे पायदान पर पहुंच गई है, जबकि एआईआर तमिल छठे पायदान से काफी नीचे खिसक कर 10वें पायदान पर आ गई है।

आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) की 240 से भी अधिक रेडियो सेवाओं का ‘न्यूजऑनएयर एप’ पर सीधा प्रसारण (लाइव-स्ट्रीम) किया जाता है, जो प्रसार भारती का आधिकारिक एप है। ‘न्यूजऑनएयर एप’ पर उपलब्‍ध आकाशवाणी की इन स्ट्रीम के श्रोतागण बड़ी संख्या में हैं जो न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में 85 से भी अधिक देशों में और विश्‍व भर के 8000 शहरों में भी हैं।

यहां भारत के अलावा उन शीर्ष देशों की भी एक झलक पेश की गई है, जहां ‘न्यूजऑनएयर एप’ पर एआईआर लाइव-स्‍ट्रीम सबसे लोकप्रिय हैं; दुनिया के बाकी हिस्सों में ‘न्यूजऑनएयर एप’ पर उपलब्‍ध आकाशवाणी की शीर्ष स्ट्रीम की भी एक झलक पेश की गई है। आप इसका देश-वार विवरण भी देख सकते हैं। ये समस्‍त रैंकिंग 16 जून से लेकर 30 जून, 2021 तक के पाक्षिक आंकड़ों पर आधारित हैं। इस डेटा में भारत शामिल नहीं है।

शीर्ष रेडियो स्‍ट्रीम की ग्‍लोबल रैंकिंग देखने के लिए अंग्रेजी का अनुलग्‍नक यहां क्लिक करें

Saturday, April 3, 2021

बंधुआ मजदूरों के मुद्दे पर पंजाब के किसानों को दोषी नहीं कहा

 03-अप्रैल-2021 16:16 IST

मीडिया में छपी रिपोर्टों को भ्रामक कहा 


नई दिल्ली
: 03 अप्रैल 2021: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन)::

पंजाब के सीमावर्ती गाँवों में बंधुआ मजदूरों के मुद्दे पर पंजाब के किसानों को दोषी नहीं ठहराया गया। गृह मंत्रालय ने केवल ‘‘मानव तस्करी सिंडिकेट’’ के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। 

मीडिया के एक वर्ग ने गलत तरीके से बताया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को पत्र लिखकर राज्य के किसानों के खिलाफ कथित रूप से गंभीर आरोप लगाए हैं। ये समाचार रिपोर्ट भ्रामक हैं और पंजाब के चार संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में विगत दो वर्षों की अवधि में उभरने वाली सामाजिक-आर्थिक समस्या के बारे में एक साधारण अवलोकन की विकृत और अतिसंपादकीय राय प्रस्तुत करते हैं, जिसे संबंधित सीएपीएफ द्वारा इस मंत्रालय के संज्ञान में लाया गया है। गृह मंत्रालय hपहले तो इस मंत्रालय द्वारा किसी विशेष राज्य या राज्यों को जारी किए गए पत्र के लिए कोई प्रयोजन नहीं बताया जा सकता है क्योंकि यह कानून और व्यवस्था के मुद्दों पर नियमित संचार का हिस्सा है। सभी राज्यों में एक संवेदनशील अभ्यास करने के अनुरोध के साथ यह पत्र केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव को भी भेजा गया है, जिसका उद्देश्य कमजोर पीड़ितों का शोषण करने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसना है।

दूसरे, पत्र के बारे में कुछ तथ्‍यों की पूरी तरह से असंबंधित संदर्भ से तुलना की गई है ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि गृह मंत्रालय ने पंजाब के किसानों के खिलाफ "गंभीर आरोप" लगाए हैं और इसे वर्तमान में चल रहे किसान आंदोलन से भी जोड़ा गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से और केवल यह कहा गया है कि "मानव तस्करी सिंडिकेट्स" द्वारा मजदूरों को किराए पर लिया जाता है और अधिक श्रम को निकालने के लिए ड्रग्स के लालच द्वारा उनके "शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य" को प्रभावित करने के साथ- साथ उनके साथ "अमानवीय व्यवहार किया जाता है"।

गृह मंत्रालय ने तेजी से बढती इस समस्या की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार से "इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए उपयुक्त उपाय करने" का केवल अनुरोध किया है।

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एनडब्‍लू/आरके/पीके/एडी/डीडीडी

Friday, September 11, 2020

दूरदर्शन के 58 साल//ऐसा अतीत जिसे भूलना आसान नहीं

 विशेष सेवा और सुविधाएँ 15-September, 2017 19:07 IST
 दूरदर्शन का आज भी कोई सानी नहीं है 
 विशेष लेख                                                                                  *प्रदीप सरदाना 
टेलीविजन का आविष्कार यूँ तो जॉन एल बिलियर्ड ने 1920 के दौर में ही कर दिया था।  लेकिन भारत में यह टीवी तब पहुंचा जब 15 सितम्बर 1959 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने दिल्ली में एक प्रसारण सेवा दूरदर्शन का उद्घाटन किया। हालांकि तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह दूरदर्शन, यह टीवी आगे चलकर जन जन की जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाएगा। आज यह टीवी रोटी कपड़ा और मकान के बाद लोगों की चौथी ऐसी जरुरत बन गया है कि जिसके बिना जिंदगी मुश्किल और सूनी सी लगती है।
लेखक प्रदीप सरदाना 
अब वही दूरदर्शन अपने जीवन के 58 बरस पूरे कर चुका है। इतने बरसों में दूरदर्शन का,टीवी का अपने देश में इतना विकास हुआ है कि इसे देखना जीवन की एक आदत ही नहीं जरुरत बन गया है। हालांकि शुरूआती बरसों में दूरदर्शन का विकास बहुत धीमा था. शुरूआती बरसों में इस पर आधे घंटे का नाम मात्र प्रसारण होता था। पहले इसे स्कूली शिक्षा के लिए स्कूल टेलीविजन के रूप में शुरू किया गया।  लेकिन इसका 500 वाट का ट्रांसमीटर दिल्ली के मात्र 25 किमी क्षेत्र में ही प्रसारण करने में सक्षम था।  तब सरकार ने दिल्ली के निम्न और माध्यम वर्गीय क्षेत्र के 21 सामुदायिक केन्द्रों पर टीवी सेट रखवाकर इसके प्रसारण की विशेष व्यवस्था करवाई थी। ऐसे में तब दूरदर्शन से कोई बड़ी उम्मीद भला कैसे रखी जा सकती थी। हालाँकि जब 15 अगस्त 1965 को दूरदर्शन पर समाचारों का एक घंटे का नियमित हिंदी बुलेटिन आरम्भ हुआ तब दूरदर्शन में लोगों की कुछ दिलचस्पी बढती दिखाई दी। इसके बाद दूरदर्शन पर 26 जनवरी 1967 को किसानों को खेती बाड़ी आदि की ख़ास जानकारी देने के लिए दूरदर्शन पर ‘कृषि दर्शन’ नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया गया। इसी दौरान दूरदर्शन पर नाटकों का प्रसारण भी शुरू किया गया। लेकिन दूरदर्शन की लोकप्रियता में बढ़ोतरी तब हुई जब इसमें शिक्षा और सूचना के बाद मनोरंजन भी जुड़ा।
असल में जब 2 अक्टूबर 1972 को दिल्ली के बाद मुंबई केंद्र शुरू हुआ तो मायानगरी के कारण इसका फिल्मों से जुड़ना स्वाभाविक था। मनोरंजन के नाम पर दूरदर्शन पर 70 के दशक की शुरुआत में ही एक एक करके तीन शुरुआत हुईं। एक हर बुधवार आधे घंटे का फ़िल्मी गीतों का कार्यक्रम चित्रहार शुरू किया गया। दूसरा हर रविवार शाम एक हिंदी फीचर फिल्म का प्रसारण शुरू हुआ। साथ ही एक कार्यक्रम ‘फूल खिले हैं गुलशन गुलशन’ भी शुरू किया गया। इस कार्यक्रम में फिल्म अभिनेत्री तब्बसुम फिल्म कलाकारों के इंटरव्यू लेकर उनकी जिंदगी की फ़िल्मी बातों के साथ व्यक्तिगत बातें भी दर्शकों के सामने लाती थीं। तब देश में फिल्मों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ चुकी थी। लेकिन सभी के लिए सिनेमा घर जाकर सिनेमा देखना संभव नहीं था,ऐसे में जब यह सब दूरदर्शन पर आया तो दर्शकों की मुराद घर बैठे पूरी होने लगी। यूँ यह वह दौर था जब 1970 में देश भर में मात्र 24838 टीवी सेट थे। जिनमें सामुदायिक केन्द्रों में सरकारी टीवी सेट के साथ कुछ अधिक संपन्न व्यक्तियों के घरों में ही टीवी होता था। ऐसे में तब अधिकांश मध्यम वर्ग के लोग भी अपने किसी संपन्न पडोसी या रिश्तेदार के यहाँ जाकर बुधवार का चित्रहार और रविवार की फिल्म देखने का प्रयास करते थे।
                          सीरियल युग से आई टीवी में क्रांति 
समाचार, चित्रहार और फिल्मों के बाद दूरदर्शन में दर्शकों की दिलचस्पी तब बढ़ी जब दूरदर्शन पर सीरियल युग का आरम्भ हुआ। यूँ तो दूरदर्शन पर कभी कभार सीरियल पहले से ही आ रहे थे।  लेकिन सीरियल के इस नए मनोरंजन ने क्रांति का रूप तब लिया जब 7 जुलाई 1984 को ‘हम लोग’ का प्रसारण शुरू हुआ।  निर्मात्री शोभा डॉक्टर, निर्देशक पी कुमार वासुदेव और लेखक मनोहर श्याम जोशी के ‘हम लोग’ ने दर्शको पर अपनी ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि हमारे सामाजिक परिवेश, दिनचर्या और आदतों तक में यह बड़ा परिवर्तन साबित हुआ, जिससे हम सब की दुनिया ही बदल गयी। ‘हम लोग’ के कुल 156 एपिसोड प्रसारित हुए लेकिन इसका आलम यह था कि जब इसका प्रसारण होता था तब कोई मेहमान भी किसी के घर आ जाता था था तो घर वाले उसकी परवाह न कर अपने इस सीरियल में ही मस्त रहते थे। लोग शादी समारोह में जाने में देर कर देते थे लेकिन ‘हम लोग’ देखना नहीं छोड़ते थे।   ‘हम लोग’ और दूरदर्शन की लोकप्रियता का प्रमाण इस बात से भी मिलता है कि सन 1970 में देश में जहाँ टीवी सेट की संख्या 24838 थी ‘हम लोग’ के बाद 1984 में वह संख्या 36,32,328 हो गयी।
‘हम लोग’ का दर्शकों पर जादू देख दूरदर्शन ने 1985 में ही हर रोज शाम का दो घंटे का समय विभिन्न सीरियल के नाम कर दिया। जिसमें आधे आधे घंटे के 4 साप्ताहिक सीरियल आते थे। सभी सीरियल को 13 हफ्ते यानी तीन महीने का समय दिया जाता था। उसके बाद वह जगह किसी नए सीरियल को दे डी जाती थी। सिर्फ किसी उस सीरियल को कभी कभार 13 और हफ़्तों का विस्तार दे दिया जाता था, जो काफी लोकप्रिय होता था या फिर जिसकी कहानियां कुछ लम्बी होती थीं। इस दौरान दूरदर्शन पर बहुत से ऐसे सीरियल आये जिन्होंने दर्शकों पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी। लेकिन दूरदर्शन की इस लोकप्रियता को तब और भी पंख लग गए जब दूरदर्शन ने 1987 में ‘रामायण’ महाकाव्य पर सीरियल शुरू किया। फिल्म निर्माता रामानंद सागर द्वारा निर्मित निर्देशित ‘रामायण’ सीरियल ने टीवी की लोकप्रयता को एक दम एक नया शिखर प्रदान कर दिया। जब रविवार सुबह ‘रामायण’ का प्रसारण होता था तो सभी सुबह सवेरे  उठकर, नहा धोकर टीवी के सामने ‘रामायण’ देखने के लिए ऐसे बैठते थे जैसे मानो वे मंदिर में बैठे हों। ‘रामायण’ के उस प्रसारण के समय सभी घरों में टीवी के सामने होते थे तो घरों के बाहर सुनसान और कर्फ्यू जैसे नज़ारे दिखते थे। बाद में ‘रामायण’ की लोकप्रियता से प्रभावित होकर दूरदर्शन ने अगले बरस एक और महाकाव्य ‘महाभारत’ का प्रसारण शुरू कर दिया। फिल्मकार बीआर चोपड़ा द्वारा बनाए गए इस सीरियल ने भी जबरदस्त लोकप्रियता पायी।
दूरदर्शन के पुराने लोकप्रिय सीरियल को याद करें तो हम लोग, रामायण और महाभारत के अतिरिक्त ऐसे बहुत से सीरियल रहे जिन्होंने सफलता,लोकप्रियता का नया इतिहास लिखा। जैसे यह जो है जिंदगी, कथा सागर, बुनियाद, वागले की दुनिया,खानदान, मालगुडी डेज़, करमचंद, एक कहानी,श्रीकांत, नुक्कड़, कक्का जी कहिन, भारत एक खोज, तमस, मिर्ज़ा ग़ालिब,निर्मला, कर्मभूमि, कहाँ गए वो लोग, द सोर्ड ऑफ़ टीपू सुलतान, उड़ान, रजनी, चुनौती, शांति, लाइफ लाइन ,नींव, बहादुर शाह ज़फर, जूनून, स्वाभिमान, गुल गुलशन गुलफाम, नुपूर, झरोखा, जबान संभाल के, देख भाई देख,तलाश और झांसी की रानी आदि।
                        एक ही चैनल ने बरसों तक बांधे रखा
यह निश्चय ही सुखद और दिलचस्प है कि आज चाहे देश में कुल मिलाकर 800 से अधिक उपग्रह-निजी चैनल्स का प्रसारण हो रहा है। जिसमें मनोरंजन के साथ समाचार चैनल्स भी हैं तो संगीत, सिनेमा, खेल स्वास्थ्य, खान पान, फैशन, धार्मिक, आध्यात्मिक और बच्चों के चैनलस भी हैं तो विभिन्न भाषाओँ और प्रदेशों के भी। लेकिन एक समय था जब अकेले दूरदर्शन ने यह सारा ज़िम्मा उठाया हुआ था। दूरदर्शन का एक ही चैनल समाचारों से लेकर मनोरंजन और शिक्षा तक की सभी कुछ दिखाता था। जिसमें किसानों के लिए भी था बच्चों और छात्रों के लिए भी, नाटक और फ़िल्में भी थीं तो स्वास्थ्य और खान पान की जानकारी के साथ कवि सामेलन भी दिखाये जाते थे और नाटक भी। मौसम का हाल होता था और संगीत का अखिल भारतीय कार्यक्रम भी। क्रिकेट, फुटबाल सहित विभिन्न मैच का प्रसारण भी होता था तो स्वंत्रता और गणतंत्र दिवस का सीधा प्रसारण भी। धरती ही नहीं अन्तरिक्ष तक से भी सीधा प्रसारण दिखाया जाता था जब प्रधानमन्त्री के यह पूछने पर कि ऊपर से भारत कैसा दिखता है, तब भारतीय अन्तरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के ‘सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दुस्तान हमारा, कहने पर पूरा देश गर्व से रोमांचित हो गया था। बड़ी बात यह है कि दूरदर्शन के इस अकेले चैनल ने सही मायने में सन 1990 के बाद के कुछ बरसों तक भी अपना एक छत्र राज बनाए रखा। यूँ कहने को दूरदर्शन का एक दूसरा चैनल 17 सितम्बर 1984 को शुरू हो गया था। लेकिन सीमित अवधि और सीमित कार्यक्रमों वाला यह चैनल दर्शकों पर अपना प्रभाव नहीं जमा पाया जिसे देखते हुए इसे कुछ समय बाद बंद कर देना पड़ा। बाद में 2 अक्टूबर 1992 में जहाँ जी टीवी से उपग्रह निजी हिंदी मनोरंजन चैनल की देश में पहली बड़ी शुरुआत हुई वहां 1993 में दूरदर्शन ने मेट्रो चैनल की भी शुरुआत की। तब निजी चैनल्स के साथ मेट्रो चैनल को भी बड़ी सफलता मिली और दर्शकों को नए किस्म के नए रंग के सीरियल आदि काफी पसंद आये। लेकिन उसके बाद देश में सभी किस्म के चैनल्स की बाढ़ सी आती चली गयी। इससे दूरदर्शन को कई किस्म की चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। पहली चुनौती तो यही रही कि एक पब्लिक ब्रॉडकास्टर होने के नाते दूरदर्शन के सामजिक जिम्मेदारियां हैं। दूरदर्शन मनोरंजन के नाम पर निजी चैनल्स की तरह दर्शकों को कुछ भी नहीं परोस सकता।
दूरदर्शन की महानिदेशक सुप्रिया साहू भी कहती हैं- यह ठीक है कि दूरदर्शन एक पब्लिक ब्रोडकास्टर है लेकिन मैं समझती हूँ कि यह सब  होते हुए भी दूरदर्शन अपनी भूमिका अच्छे से निर्वाह कर रहा है। दूरदर्शन का आज भी दर्शकों में अपना अलग प्रभाव है, दूरदर्शन अपने दर्शकों को साफ सुथरा और उद्देश्य पूर्ण मनोरंजन तो प्रदान कर ही रहा है लेकिन दर्शकों को जागरूक करने की भूमिका में दूरदर्शन सभी से आगे है। बड़ी बात यह है देश में कुछ निजी चैनल्स मनोरंजन और समाचारों के नाम पर जो सनसनीखेज वातावरण तैयार करते हैं दूरदर्शन हमेशा इससे दूर रहकर स्वस्थ और सही प्रसारण को महत्व देता है। हाँ  दूरदर्शन के सामने जो चुनौतियाँ हैं उनसे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन दूरदर्शन के इस 58 वें स्थापना दिवस पर मैं सभी को यह विश्वास दिलाती हूँ कि आज दूरदर्शन अपनी सभी किस्म की चुनौतियों से निबटने के लिए स्वयं सक्षम है। आज हमारे पास विश्व स्तरीय तकनीक है हम दुनियाभर में जाकर अपने एक से एक कार्यक्रम बनाते हैं और दिखाते हैं.निजी चैनल जिन मुद्दों पर उदासीन रहते हैं वहां हम उस सब पर बहुत कुछ दिखाते हैं, जैसे किसानों पर, स्वच्छता पर, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर। कला पर संस्कृति पर। आज दूरदर्शन के देश में कुल 23 चैनल्स हैं जिनमें 16 सेटेलाइट्स चैनल हैं और 7 नेशनल चैनल्स। जिससे दूरदर्शन आज महानगरों से लेकर छोटे नगरों,कस्बों और गाँवों तक पूरी तरह जुड़ा हुआ है। हमारे कार्यक्रम तकनीक और कंटेंट दोनों में उत्तम हैं। इस सबके बाद भी यदि कहीं कोई कमी मिलती है तो हम उसे दूर करेंगे। समय के साथ अपने कार्यक्रमों की निर्माण गुणवत्ता में जो आधुनिकीकरण करना पड़ेगा, उसे भी हम करेंगे। कुल मिलाकर उद्देश्य यह है कि हम अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों से भी पीछे नहीं हटेंगे और दर्शको का दूरदर्शन में भरोसा भी कायम रखेंगे।”
दूरदर्शन में दर्शकों का भरोसा कायम रहे इससे अच्छी बात क्या हो सकती है। मेरा तो दूरदर्शन से अपना भी व्यक्तिगत लगाव है। पहला तो इसलिए ही कि मैं भी देश के लाखों करोड़ों लोगों की तरह  बचपन से दूरदर्शन को देखते हुए बड़ा हुआ हूँ। लेकिन इसके साथ दूरदर्शन से मेरा विशेष और अलग लगाव इसलिए भी है कि मैंने ही देश में सबसे पहले दूरदर्शन पर नियमित पत्रकारिता शुरू की। सन 1980 के दशक के शुरुआत में ही मुझे इस बात का अहसास हो गया था कि दूरदर्शन जल्द ही घर का एक सदस्य बन जाएगा। जब दूरदर्शन पर ‘हम लोग’ से भी पहले ‘दादी माँ जागी’ नाम से देश का पहला नेटवर्क सीरियल शुरू हुआ तो मैंने उसकी चर्चा देश के विभिन्न हिस्सों में दूर दराज तक होते देखी। मुझे लगा कि एक सीरियल एक ही समय में पूरे देश में यदि देखा जाएगा तो यह टीवी मीडिया क्रांति ला देगा। तब हम कोई फिल्म देखते थे तो वह अलग अलग समय में अलग अलग दिनों में देखते थे मगर रात 8 या 9 बजे राष्ट्रीय प्रसारण वाला सीरियल एक साथ एक ही समय में पूरा देश देख लेता था। उसके बाद उसमें दिखाए दृश्य अगले दिन सभी की चर्चा का विषय बने होते थे। यह ठीक है कि अब अलग अलग सैंकड़ों चैनल्स आने से स्थितियों में बदलाव हुआ है लेकिन दूरदर्शन ने देश को एक साथ जोड़ने, लोगों को जागरूक करने, शिक्षित करने और उन्हें मनोरंजन प्रदान करने का जो कार्य किया है उसका आज भी कोई सानी नहीं है।
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*लेखक पिछले लगभग 40  वर्षों से राजनीति, संचार,  स्वास्थ्य, परिवहन, पर्यटन, जल, शिक्षा आदि के साथ सिनेमा और टीवी जैसे विषयों पर भी देश के लगभग सभी प्रतिष्ठित समाचार पत्र पत्रिकाओं में नियमित लिख रहे हैं। लेखक टीवी पर नियमित लिखने वाले देश के पहले पत्रकार भी है। 
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Saturday, June 13, 2020

वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता ‘मेरा जीवन, मेरा योग’

13th June 2020 10:14AM  PIB Delhi
 प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि 21 जून, 2020 तक बढ़ाई  
नई दिल्ली: 13 जून 2020: (पीआईबी)::
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा हाल ही में घोषित वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता ‘मेरा जीवन, मेरा योग’ के लिए प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि 21 जून, 2020 तक बढ़ा दी गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह वैश्विक प्रतियोगिता आयुष मंत्रालय और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) द्वारा छठे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है।

इससे पहले इस प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2020 तय की गई थी। यह तिथि बढ़ाने के लिए देश-विदेश से मांग की जा रही थी, ताकि योग बिरादरी को वीडियो तैयार करने के लिए अधिक समय मिल सके। भारी मांग को ध्‍यान में रखते हुए ही मंत्रालय और आईसीसीआर ने प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस यानी 21 जून तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री ने 31 मई को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र को संबोधित करते हुए सभी से वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता ‘मेरा जीवन, मेरा योग’ में भाग लेने का आह्वान किया था। यह प्रतियोगिता लोगों के जीवन पर योग के उल्‍लेखनीय परिवर्तनकारी प्रभावों पर फोकस करती है और यह छठा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने से जुड़ी विभिन्‍न उत्‍कृष्‍ट गतिविधियों में से एक अहम गतिविधि के रूप में उभर कर सामने आई है।

इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों को 3 योगाभ्यासों (क्रिया, आसन, प्राणायाम, बंध या मुद्रा) का 3 मिनट की अवधि वाला वीडियो अपलोड करना होगा, जिसमें इस आशय का एक लघु वीडियो संदेश भी शामिल करना होगा कि योगाभ्यासों से किस तरह उनके जीवन में उल्‍लेखनीय सकारात्‍मक परिवर्तन हुए हैं। वीडियो को प्रतियोगिता के हैशटैग #MyLifeMyYogaINDIA और उपयुक्त श्रेणी के हैशटैग के साथ फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम या माईगव प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा सकता है। इसमें भागीदारी के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश आयुष मंत्रालय के योग पोर्टल (https://yoga.ayush.gov.in/yoga/) पर उपलब्‍ध हैं।

यह प्रतियोगिता दो चरणों में होगी। प्रथम चरण में देश-वार वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिताएं शामिल हैं, जिनके विजेताओं का चयन देश के स्तर पर किया जाएगा। इसके बाद वैश्विक पुरस्कार विजेताओं का चयन किया जाएगा जिन्हें विभिन्न देशों के विजेताओं में से चुना जाएगा। यह प्रतियोगिता लोगों के जीवन पर योग के उल्‍लेखनीय परिवर्तनकारी प्रभावों का पता लगाने का एक अहम प्रयास है, जिसके बारे में प्रत्येक प्रतिभागी स्‍वयं के द्वारा प्रस्‍तुत किए जाने वाले वीडियो में बताएंगे।

इस प्रतियोगिता के लिए प्रतिभागियों द्वारा प्रविष्टियों को तीन श्रेणियों के तहत प्रस्तुत किया जा सकता है जिनमें युवा (18 वर्ष से कम आयु), वयस्क (18 वर्ष से अधिक उम्र) और योग प्रोफेशनल शामिल हैं और इसके साथ ही ये श्रेणियां पुरुष एवं महिला प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग होंगी। भारत के प्रतिभागियों के मामले में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार पाने वालों को प्रथम चरण में प्रत्येक श्रेणी के लिए 1 लाख रुपये, 50,000 रुपये और 25,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा, जबकि वैश्विक पुरस्कार प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार पाने वालों के लिए 2500 डॉलर, 1500 डॉलर और 1000 डॉलर के होंगे।  

आयुष मंत्रालय ने सभी को बढ़ी हुई अवधि का उपयोग करने और बिना अधिक विलंब किए वीडियो प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया है। (PIB)
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Wednesday, June 13, 2018

14 जून, 2018 के लिए मीडिया निमंत्रण

 स्थान:तीसरा तल,सम्मेलन कक्ष,निर्माण भवन,नई दिल्ली
 महोदय/महोदया,
आप निम्नलिखित कार्यक्रम को कवर करने के लिए सादर आमंत्रित हैं:
कार्यक्रम
:
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जे. पी. नड्डा  राज्यों के साथ आयुष्मान भारत-एनएचपीएम के कार्यान्यन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करेंगे। 
दिनांक
:
14 जून, 2018 (बृहस्पतिवार)  
समय
:
शाम 3.15 बजे
स्‍थान
:
तीसरा तल,सम्मेलन कक्ष,निर्माण भवन,नई दिल्ली
 भवदीय
(डॉ. मनीषा वर्मा)