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Friday, December 25, 2020

प्रेस आज़ादी पहले से कहीं ज़्यादा अहम,

  59 मीडियाकर्मियों की हत्याओं की निन्दा 

Unsplash/Jovaughn Stephens//एक प्रेस गतिविधि को कवर करते हुए एक वीडियो पत्रकार

23 दिसम्बर 2020//कानून और अपराध की रोकथाम

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संगठन (UNESCO) ने बताया है कि वर्ष 2020 के दौरान, अभी तक कम से कम 59 मीडियाकर्मी मारे गए हैं, जिनमें चार महिलाएँ भी हैं. संगठन ने बुधवार को ये आँकड़े जारी करते हुए, सूचना प्राप्ति और तथ्यात्मक पत्रकारिता को एक सार्वजनिक अच्छाई के रूप में क़ायम रखने के समर्थन में खड़े होने की पुकार भी लगाई.

यूनेस्को ने बुधवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि पिछले एक दशक के दौरान, औसतन, हर चार दिन में एक पत्रकार को अपनी ज़िन्दगी गँवानी पड़ी है. 

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्री अज़ूले ने कहा है कि अलबत्ता, वर्ष 2020 में, पत्रकारों की मौतों की संख्या तुलनात्मक रूप में सबसे कम रही है.

लेकिन ये भी सच है कि लोकतंत्र और मानवाधिकारों की हिफ़ाज़त के लिये, शायद ही पत्रकारिता की इतनी अहमियत रही हो, क्योंकि दुनिया, कोरोनावायरस और उसके आसपास मौजूद दुष्प्रचार व ग़लत जानकारी के फैलाव के वायरस से भी जूझ रही है.

सत्य की सुरक्षा

ऑड्री अज़ूले ने कहा है कि कोरोनावायरस महामारी, एक ऐसा सटीक तूफ़ान साबित हुई है जिसने दुनिया भर में प्रेस स्वतंत्रता को प्रभावित किया है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पत्रकारिता की सुरक्षा करना, दरअसल सत्य की हिफ़ाज़त करना है.

यूनेस्को की रिपोर्ट में कहा गया है कि लातीनी अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्रों में 22 – 22 पत्रकारों की हत्याएँ हुईं और इन क्षेत्रों को एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के साथ मिलाकर कहा जाए तो, पत्रकारों की सबसे ज़्यादा हत्याएँ हुई हैं. 

इसके बाद अरब क्षेत्र में 9 और अफ्रीका में 6 पत्रकारों की हत्याएँ हुईं.

यूनेस्को का कहना है कि पत्रकारों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों में, औसतन 10 में से 9 मामलों में, दंडमुक्ति यानि न्यायिक प्रक्रिया का अभाव दिखा है, हालाँकि वर्ष 2020 में कुछ बेहतरी देखने को मिली है.

वर्ष 2020 में पत्रकारों की सुरक्षा पर यूनेस्को महानिदेशक की ये रिपोर्ट, पत्रकारों के ख़िलाफ़ अपराधों में न्याय के अभाव को ख़त्म करने के अन्तरराष्ट्रीय दिवस के आसपास ही प्रकाशित ही है.

इस दिवस के अवसर पर उपलब्ध आँकड़ों में पिछले दो वर्षों के दौरान पत्रकारों की हत्याओं के तरीक़ों की गहराई से जानकारी मुहैया कराई गई है.

यूनेस्को की ये ताज़ा रिपोर्ट जारी किये जाने के अवसर पर ही, संगठन ने वैश्विक स्तर पर एक जागरूकता अभियान भी शुरू किया है जिसका नाम है – Protect Journalists. Protect the Truth – पत्रकारों की हिफ़ाज़त करें. सत्य को बचाएँ.

यूनेस्को का कहना है, “अब भी बहुत सी हत्याएँ होती हैं और कम घातक हमले व प्रताड़ना और परेशान किये जाने के मामले अब भी बढ़ रहे हैं."

"वर्ष 2020 में, पत्रकारों के सामने दरपेश ख़तरे और भी उजागर हुए हैं. मसलन, दुनिया भर में, ब्लैक लाइव्स मैटर - Black Lives Matter जैसे और इसी तरह के अन्य प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करते हुए उन्हें ज़्यादा ख़तरों का सामना करना पड़ा.”

प्रदर्शन ख़तरे

यूनेस्को ने वर्ष 2020 के आरम्भ में 65 देशों में हुए ऐसे 125 प्रदर्शनों की पहचान की थी  जिनमें पत्रकारों पर या तो हमले किये गए, या उन्हें गिरफ़्तार किया गया, और ये प्रदर्शन 1 जनवरी 2015 से लेकर 30 जून 2020 के बीच हुए.

इनमें से 21 प्रदर्शन वर्ष 2020 की पहली छमाही के दौरान हुए, लेकिन वर्ष 2020 के दूसरे हिस्से के दौरान पत्रकारों को गिरफ़्तार किये जाने या उन्हें हमलों का निशाना बनाए जाने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी देखी गई है.

यूनेस्को का कहना है कि इनके अतिरिक्त, महिला पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा अब भी चिन्ता का एक बड़ा कारण है. “महिला पत्रकारों को, पत्रकारिता के उनके पेशे और लिंग के लिये हमलों का निशाना बनाया जाता है और महिला पत्ररकार, ख़ासतौर से लिंग आधारित प्रताड़ना और हिंसा का भी सामना करती हैं.”

Link

Unsplash/Jovaughn Stephens//एक प्रेस गतिविधि को कवर करते हुए एक वीडियो पत्रकार

Thursday, June 20, 2019

प्रेस निमंत्रण: जत्थेदार कुलदीप सिंह भोगल की मीडिया से भेंट 21 को

बहुप्रतीक्षित बाला साहिब हस्पताल के निर्माण पर होगी चर्चा 
नई दिल्ली: 19 जून 2019: (मीडिया स्क्रीन ब्यूरो):: 
वरिष्ठ अकाली नेता तथा सामाजिक कार्यकर्ता जत्थेदार कुलदीप सिंह भोगल, सिख कौम के बहुप्रतीक्षित बाला साहिब हस्पताल के निर्माण,विस्तार, आर्थिक स्रोत व  संचालन की राह में खड़े गतिरोध तथा उसके हल को लेकर जरूरी रोडमैप की मीडिया को जानकारी देंगे। 
समय: 2.30 बजे दोपहर, 21 जून 2019
स्थान: रशियन कल्चर सैंटर, फिरोजशाह रोड।

Sunday, December 9, 2018

विश्व मानवाधिकार दिवस के मौके पर कवरेज निमन्त्रण

9 दिसम्बर 2018 सांय 7:31 par पोस्ट किया  (WM)
करीब 1000 अति विशिष्ट लोग शामिल होंगे
सेवा में
संपादक महोदय/मुख्य संवाददाता/ डेस्क/ बियूरो चीफ
विषय अंतरराष्ट्रीय ह्यूमन राइट दिवस पर 1987 से आयोजित किया जाने वाला कार्यक्रम कवरेज करवाने हेतु
महोदय
आपको बताते हुए हमें ख़ुशी महसूस हो रही है कि विश्व मानवाधिकार दिवस के मौके पर देश को सभी के लिए समान न्याय और अधिकार प्राप्त हों जिसके लिए व्यवस्था परिवर्तन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम  का आयोजन दस दिसम्बर को प्रातः 10 बजे से किया जा रहा है, जिसमे अलग अलग देशों, प्रदेशों, संस्थाओं से करीब 1000 अति विशिष्ट लोग शामिल होंगे।

अतः कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कार्यक्रम कवरेज हेतु कृपया अपने सम्मानित मीडिया बैनर से रिपोर्टर एवं फोटोग्राफर को भेजने का कष्ट करें एवं स्वयं भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लें।

कार्यक्रम दिनांक-10 दिसम्बर
कार्यक्रम समय-प्रातः 11 बजे से
मीडिया हेतु समय-प्रातः 11 से 3 बजे
कार्यक्रम स्थल संसद मार्ग दिल्ली

कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से 3 बजे तक चलेगा।
उसके बाद सभी के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। शुरू हो किन्तु मीडिया को असुविधा न हो इसलिए कृपया 11 बजे पधारें ताकि किसी प्रकार की देरी न हो*

संपर्क
डॉ एम यू दुआ
नेशनल प्रेजिडेंट
आल इन्डिया ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन

मीडिया प्रभारी
9213247209

Tuesday, June 26, 2018

प्रेस निमंत्रण: नई दिल्ली: सुबह 10 बजे

7200 रेलवे कुली करेंगे प्रदर्शन 
साभार चित्र 
नई दिल्ली: 26 जून 2018: (मीडिया स्क्रीन सर्विस):अब कुली भी मैदान में हैं। देश विदेश का बहुत बड़ा मज़दूर वर्ग भी संघर्ष के लिए मैदान में आने को मजबूर हुआ है। व्हाटसप के बहुत से ग्रुपों में ज़िम्मेदार साथी नरेंद्र भंडारी ने पोस्ट डाली है कि कुली विरोध प्रदर्शन करेंगे।
हिन्द मज़दूर सभा के बैनर तले, सभा के महासचिव हरभजन सिंह सिधू जी के नेतृत्व में देश के 7200 रेलवे स्टेशन के रेलवे लाइसेंस पोर्टर्स (कुली) अपनी मांग को लेकर विशाल विरोध प्रदर्शन करेंगे। गौरतलब है कि इनका नाम तो बदल कर सहायक कर दिया गया था लेकिन इनकी जीवन शैली में से बोझ काम नहीं हो सका। बड़े लोगों की महंगी यात्रियों के दौरान उनके समान  का बोझ उठाने वाले यह मज़दूर वर्ग के लोग आज भी बता रहे हैं वित्तीय अंतराल की बढ़ती हुई खाई को। इस विरोध प्रदर्शन की कवरेज के लिए कोई दिक्क्त ए या जानकारी की ज़रूरत हो तो सम्पर्क नंबर भी नीचे दिया जा रहा है।
27 जून 2018
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से 10 बजे शुरू होकर 11 बजे संसद मार्ग पहुचेगी। 
हरभजन सिंह सिधू
महासचिव। हिन्द मज़दूर सभा
9811073602

Sunday, August 2, 2015

क्या अब शुरू है मीडिया में बदलाव?

....जब तुम एक ही news  को सारा दिन घुमा फिरा के दिखाते हो....

जब कोई इंसान या कोई वर्ग या कोई समाज खुद पर लतीफे कसने की हिम्मत दिखाए या अपनी गलतियों की स्वयं ही चर्चा शुरू कर दे तो समझ लो कि गलतियां सुधारने के बदलाव का स्वस्थ दौर शुरू हो चुका है। कुछ यही संकेत मिला है  प्रेस क्लब लुधियाना (रजि) की एक पोस्ट से। इस क्लब में अजय चौहान विराट (98153 65793 ने एक छोटी सी रचना पोस्ट की है आज रात्रि 10:46 जो मीडिया का व्यापारीकरण होने के बाद पैदा हुई थी। संवेदनहीन होते जा रहे मीडिया की संवेदना को फिर से जागृत करने का प्रशंसनीय कार्य किया है इस पोस्ट ने। देखिये और बताईये आपको कैसी लगी यह पोस्ट? आपके विचारों की इंतज़ार अब भी बनी रहेगी। --रेक्टर कथूरिया 
एक टी.वी. पत्रकार एक किसान का इंटरव्यू ले रहा था...  
पत्रकार : आप बकरे को क्या खिलाते हैं...??
किसान : काले को या सफ़ेद को...??

पत्रकार : सफ़ेद को..
किसान : घाँस..

पत्रकार : और काले को...??
किसान : उसे भी घाँस..

पत्रकार : आप इन बकरों को बांधते कहाँ हो...??
किसान : काले को या सफ़ेद को...??

पत्रकार : सफ़ेद को..
किसान : बाहर के कमरे में..

पत्रकार : और काले को...??
किसान : उसे भी बाहर के कमरे में...

पत्रकार : और इन्हें नहलाते कैसे हो...??
किसान : किसे काले को या सफ़ेद को...??

पत्रकार : काले को..
किसान : जी पानी से..

पत्रकार : और सफ़ेद को...??
किसान : जी उसे भी पानी से..

पत्रकार का गुस्सा सातवें आसमान पर, बोला : कमीने ! जब दोनों के साथ सब कुछ एक जैसा करता है, तो मुझे बार-बार क्यों पूछता है.. काला या सफ़ेद...???? 

किसान : क्योंकि काला बकरा मेरा है...
पत्रकार : और सफ़ेद बकरा...??
किसान : वो भी मेरा है... 

पत्रकार बेहोश... 
 होश आने पे किसान बोला अब पता चला कमीने जब तुम एक ही news  को सारा दिन घुमा फिरा के दिखाते हो हम भी  ऐसे ही दुखी होते है।

Wednesday, June 24, 2015

मीडिया फिर संवेदनशील संघर्ष के दौर में

लगातार बढ़ रही है जन मीडिया और कार्पोरेट मीडिया में खायी 
लुधियाना: 23 जून  2015  (रेक्टर कथूरिया//मीडिया स्क्रीन):
मीडिया फिर संवेदनशील संघर्ष के दौर में है।  देश और दुनिया के अलग अलग हिस्सों में यह संघर्ष फैसलाकुन दौर की और बढ़  रहा है। सबसे अधिक दबाव मीडिया की उस विधा से जुड़े पत्रकारों पर है जिन्हे मुख्य धारा मीडियासे जुड़े लोग पत्रकार ही नहीं मानते।  सोशल मीडिया से जुड़े ब्लागरों/पत्रकारों पर लगातार दमन हो रहा है। उनकी हत्याएं की जा रही हैं। उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है लेकिन दुखद इत्तफ़ाक़ कि मुख्य धारा का मीडिया जाने अनजाने उस पाले में जा खड़ा हुआ है जहाँ ब्लागरों और सोशल मीडिया पत्रकारों के हत्यारे खड़े हैं। शाहजहाँपुर में जगेंद्र सिंह को जला कर मार दिया जाता है और उसके कुछेक तथाकथित संगी साथी उसकी शहादत पर द्रवित होने की बजाये जलाने वालों से मिलीभगत करते हैं और गुपचुप तरीके से  कहते हैं वह तो पत्रकार था ही नहीं। उस जघन्य हत्या को लेकर संघर्ष के लिए बहुत ही कम पत्रकार आगे आते हैं जिनका ज़मीर अभी मरा नहीं था वो इस बात पर अड़ गए कि हम अपने साथी जगेंद्र के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगें।  सत्य और सिद्धांत की जीत हुई और शहीद जगेंद्र सिंह के परिवार को इन्साफ दिलाने के लिए बड़ी बड़ी अख़बारों ने सम्पादकीय लिखे और मुख्यमंत्री अखिलेश को खुद आगे आना पड़ा। यह घटना एक वानगी मात्र है। 
वास्तव में इस तरह का घटनाक्रम पूरे विश्व में जारी है। मीडिया जाने अनजाने दो भागों में बंट चूका है और यह विभाजन रेखा लगातार गहरी होती जा रही है।
दूसरी तरफ जन मीडिया अपने सिद्धांत पर चलने के कारण मुश्किलों के बावजूद लोकप्रिय हो रहा है। आम जनता से जुडी समस्यायों को लगातार उजागर करता हुआ यह जन मीडिया उस बड़े मीडिया के लिए खौफ भी बन रहा है को बड़े बड़े घोटालों और बड़ी बड़ी जन समस्यायों को छूना भी उचित नहीं समझता क्यूंकि उससे विज्ञापन नहीं मिलते।  बहुत ही कम संसधानों के बावजूद इसका जनाधार बढ़ता जा रहा है।  दूसरी ओर कार्पोरेट मीडिया अपने कार्पोरेट घरानों और सियासी निशानों के नफा नुक्सान की गिनती मिनती करता हुआ खबरों का चयन करता है। इस नफे नुक्सान के चक्र में पिस रही है आम जनता जो अपनी खबर के साथ विज्ञापन नहीं दे पाती और वह लगातार ज़ुल्म की चक्की में पिसती चली जा रही है। 
इस विभाजन रेखा को और गहरा किया जा रहा है संगठनों के नाम पर। पदों को बाँट कर इसे अपने हाथ में भी किया जा रहा है। पंजाब में चुनावी वर्ष से एन पहले इस तरह के अंगठनों का निर्माण और पदों का बटवारा कुछ गहरे संकेत दे रहा है जिन्हें समझने की ज़रूरत है।
कलमकारों के दरम्यान पैदा की जा रही इस साजिशी फुट और कन्फ्यूज़न  का असर पंजाब, यूपी और अन्य भागों में भी देखने को मिल रहा है। पंजाब के जाने माने पत्रकार गौतम जालंधरी के नाम से एक संदेश सोशल मीडिया पर लगातार देखने को मिल रहा है। इस संदेश में गौतम जी ने कुछ सवाल उठाये हैं जिन्हें यहाँ भी दिया जा रहा है।
क्या आप भी पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए बन रहे "वर्किंग जर्नलिस्ट क्लब" के मेंबर बने हैं पर आपको भी इन सवालों का जवाब नहीं मिल रहा 
1. क्लब के मेंबर्स कौन हैं ? मेम्बरशिप देने के क्या मापदंड रखे गए ? 200 मेंबर्स की लिस्ट जारी क्यों नहीं की गयी ?
2. कितने और कौन से मेंबर्स की  रजामंदी से इस पारदर्शी स्क्रूटिनी कमेटी का चयन हुआ ? क्या मापदंड रखे गए ?
3. पहले दिन से ही वर्किंग जर्नलिस्ट ओनली का ढिंढोरा पीटने वाले लोगों ने नॉन वर्किंग जर्नलिस्ट को कमेटी में कैसे शामिल कर लिया ?
4. केवल मेम्बरशिप फॉर्म चेक करने के लिए बनाई स्वयंभू नेताओं की इस कमेटी को क्लब के इलेक्शन और मेम्बरशिप फीस तय करने का अधिकार किसने दिया ?
5. अभी तक इस लोकतान्त्रिक स्क्रूटिनी कमेटी ने अपनी सारी मीटिंग चोरी छुपे क्यों की ? अगर यह क्लब ट्रांसपेरेंट हैं तो ऐसा पर्दा क्यों रखा जा रहा है? 
दोस्तों जिन लोगों ने पारदर्शिता और डेमोक्रेसी का हवाला देकर  तानाशाही से स्क्रूटिनी कमेटी बना दी ,चुनाव की डेट फाइनल कर ली,मेम्बरशिप फीस तय कर ली तो क्या गारंटी है कि वे लोग निष्पक्ष चुनाव करवाएंगे ? क्या गारंटी है इस क्लब के होने वाले प्रधान,सेक्रेटरी,चेयरमैन पहले से ही "फिक्स" नहीं हैं?
आपसे गुजारिश है कि इसी तरह चुप बैठ कर खुद के साथ ही हो रहे षडयंत्र के भागीदार ना बनें।
अपना शोषण न होने दें और अपनी आवाज जरूर उठाएं। इस मेसेज पर कमेंट जरूर करें और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें 
हम पत्रकार हैं लाचार नहीं। आपके सुझाव / सवाल अपेक्षित हैं।
भवदीय - गौतम जालंधरी,जर्नलिस्ट
‪+91 81 46 200161‬

पोस्ट स्क्रिप्ट: एक पुराना शेयर याद आ गया-हीरो की डायरी में पढ़ा था.…-----
माना कि तबाही में कुछ हाथ है दुश्मन का;
पर चाल क्यामतकी अपने भी तो चलते हैं। 

Saturday, February 8, 2014

ब्लूस्टार को जनरल शाहबेग का "महंगा बदला" बताया इण्डिया टुडे ने

संत भिंडरांवाले को बताया ग्रंथी और विद्रोही गुट का नेता 
लुधियाना: ब्लू स्टार आपरेशन में ब्रिटिश दखल की बात उठी तो सिख समाज के साथ साथ मीडिया में भी एक फिर तूफ़ान आ गया।  इसके साथ ही शुरू हुई सिख समाज के दर्द को भुनाने की एक और नयी कोशिश। क्यूंकि व्यापारी समाज के लिए हर बात  एक व्यापार  आंसुयों का व्यापर, जज़बात का व्यापार और खबरों का सिलसिला भी अब एक व्यापार बन गया है। कहा कुछ जाता है पर उसका छुपा मकसद कुछ और ही होता है।   बात को घुमा फिरा कर अर्थों का अनर्थ।  इण्डिया टुडे  (हिंदी)  नाज़ुक और संवेदनशील मामले को एक बार फिर सनसनी का आवरण औड़ाते हुए बहुत से नए तथ्य सामने लाने का दावा करता महसूस होता है।  इस आवरण स्टोरी में जहाँ कुछ काम की बातें भी हो सकती हैं वहीँ पत्रिका के इरादे छुपे नहीं रह सके। पत्रिका ने अपना पक्षपात एक बार फिर ज़ाहिर कर  दिया है। जहाँ पत्रिका ने गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी की ओर से स्थापित  दमदमी टकसाल के चौहदवें उत्तराधिकारी संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले को एक "तेज़तर्रार ग्रंथी" बताया है वहीँ ब्लू स्टार ऑपरेशन को सही करार देने के प्रयास में यह भी कहा है कि उसके नेतृत्व में सिखों के एक विद्रोही गुट ने "जंग" छेड़  रखी थी और 1981 से 1984 तक 100 से अधिक आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान ले ली थी। यह भी कहा कि भिंडरांवाला अपने हथियारबंद साथियों के घेरे में सिखों के सबसे पवित्र गुरुद्धारे में छिपा बैठा था। इस पत्रिका की इस आवरण कथा का चालाक लेखक यह नहीं बताता कि अगर समस्या केवल सवर्ण मंदिर में ही थी तो पंजाब के अन्य 36 गुरुद्धारों में सैनिक एक्शन क्यूँ किया गया?  क्या इतना बड़ा मीडिया हाऊस नहीं जानता कि सिखों के लिए वे अन्य गुरुद्धारे भी बहुत महत्वपूर्ण और पवित्र थे और रहेंगे।
आगे जाकर इण्डिया टुडे इंदिरा गांधी को बेहद संवेदनशील साबित करने के प्रयास में कहता है कि इंदिरा गांधी ने आपरेशन सनडाऊन की उस परियोजना को केवल इस लिए रद्द कर दिया था क्यूंकि उसमें अधिक नुक्सान होने का खतरा था। गौरतलब है कि इस योजना के अंतर्गत  हेलीकाप्टरों और स्पेशल ट्रेंड कमांडोज़ के ज़रिये होना था और  संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले का अपहरण किया जाना था।
अपनी इस सारी "सच्ची कहानी" में पत्रिका ने यही प्रभाव देने का प्रयास किया कि जैसे वहाँ हमला करने गए सेनिक तो बेचारे सिखों का शिकार हो रहे थे। पत्रिका ने कहीं नहीं कहा कि इंदिरा गांधी ने इस एक्शन के लिए श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी पर्व का दिन क्यूँ चुना? वहाँ उस पावन दिवस पर माथा टेकने गए श्रद्धालुयों में बच्चे भी थे--महिलाएं भी और बज़ुरग भी---उनमें से किसी के  नहीं थे। सेना ने उन को भी निशान बनाया जिसकी हकीकत एक बार नहीं बहुत बार मीडिया में आ चुकी है। इसके बावजूद इण्डिया टुडे बताता है कि जब इंदिरा गांधी को खबर मिली कि बहुत बड़ी संख्या में सैनिक और असैनिक मरे गए हैं तो इंदिरा गांधी के मुँह से निकला"हे भगवान"। इसके साथ ही स्व्तंत्र भारत के इस इतने बड़े युद्ध के वास्तविक कारणों पर पर्दा डालने ले नापाक प्रयास में इण्डिया टुडे इसे जनरल शाहबेग सिंह का एक व्यक्तिगत बदला बताता है।  पत्रिका ने लिखा है-"सेना के नायक रह चुके शाबेग ने सेना से बहुत महंगा बदला लिया।"
फिर भी इस पत्रिका को बड़े पैमाने पर पढ़ा जाना चाहिए ख़ास तौर पर सिख सियासत और सिख इतिहास से जुड़े कलमकारों और पाठकों दोनों को।  तभी इस तरह साज़िशी कलमों का जवाब कलम से दिया जा सकेगा। आपके विचारों की इंतज़ार बनी रहेगी। चुनावी मौसम है इसलिए इस तरह के बहुत से नए मामले सामने आएंगे सनसनी के आवरण मेंलपेटे हुए तांकि आम लोगों को दाल रोटी का सच भूला रहे, क्रांति का सच भूला रहे--सियासतदानों के घोटालों का सच भूला रहे---और लोग उलझे रहे साम्प्रदायिक टकरावों में। इस तरह के मामले जनता का ध्यान असली सच से हटाने की साज़िश मात्र हैं। -रेकटर कथूरिया 
ब्लू स्टार को जनरल शाहबेग का महंगा बदला बताया इण्डिया टूडे ने 

Monday, December 9, 2013

छत्तीससगढ़ में पत्रकार कल्याण कोष

मीडिया स्क्रीन में हम मीडिया से जुड़ी जानकारी अक्सर देते रहते हैं। इसी सिलसिले में इस बार प्रस्तुत है छत्तीसगढ़ में जारी पत्रकार कल्याण कोष  विवरण। इसे आप छत्तीसगढ़ मेल में भी पढ़ सकते हैं। 
छत्तीसगढ़ पत्रकार कल्याण कोष नियम 2001
छत्तीसगढ़ राजपत्र
प्राधिकार से प्रकाशित  


क्रमांक 17,   रायपुर, शुक्रवार, दिनांक 27 अप्रैल 2001 - वैशाख 7, शक 1923

छत्तीसगढ़ पत्रकार कल्याण कोष नियम 2001
जनसम्पर्क विभाग
मंत्रालय, डी.के.एस. भवन, रायपुर
रायपुर, दिनांक 27 अप्रैल 2001

   क्रमांक 1176 एच./जसंसं/2001.-छत्तीसगढ़ पत्रकार कल्याण समिति के विधान के अधीन छत्तीसगढ़ पत्रकार कल्याण कोष के उद्देश्यों को पूरा करने के लिये प्रबंध समिति अपने कार्य संचालन के लिए नीचे दी गयी नियमावली बनाती है, अर्थात :-

   नियम (1) नाम-यह नियम छत्तीसगढ़ पत्रकार कल्याण कोष नियम 2001 कहलायेंगे.

   नियम (2) पत्रकारों के कल्याण के लिये शासन द्वारा आबंटित राशि का वितरण इन नियमों के अनुसार किया जायेगा.

   नियम (3) पत्रकार कल्याण कोष का आहरण और संवितरण जनसंपर्क संचालक अथवा उनके द्वारा  नामजद अधिकारी द्वारा किया जायेगा.

   नियम (4) पात्रता-छत्तीसगढ़ के श्रमजीवी पत्रकार और ऐसे पत्रकार जिन्हें समिति सहायता के लिये पात्र समझती है और उन पर आश्रित परिवार के सदस्य इस निधि से सहायता पाने के पात्र होंगें.

   नियम (5) सहायता निम्नलिखिल स्थितियों में दी जा सकेगी :-

   (क) नियम 4 से उल्लिखित पत्रकार अथवा उनके परिवार के सदस्यों को लंबी अथवा गंभीर बीमारी या दुर्घटना में आहत होने पर इलाज के लिये.

   (ख) किसी दैवी विपत्ति से पीड़ित होने पर.

   (ग) पत्रकारिता के क्षेत्र में कम से कम 30 वर्ष की सेवा करने के बाद वृध्दावस्था में विपन्नता के कारण.

   (घ) नियम (4) में उल्लेखित श्रमजीवी पत्रकार की मृत्यु हो जाने पर यदि उस परिवार के पास आजीविका का कोई साधन न हो.

नोट - (परिवार से आशय यथास्थिति पति/पत्नी आश्रित  माता-पिता और नाबालिक बच्चों से है)

   नियम (6) सहायता की राशि-पत्रकार कल्याण निधि से एक वर्ष में एक व्यक्ति को एक बार कम से कम 5,000 रूपए एवं अधिकतम 50,000 (पचास हजार) रूपये की सहायता दी जा सकेगी.
टीप -विशेष परिस्थितियों में जनसंपर्क संचालक को यह अधिकार होगा कि समिति की दो बैठकों के बीच के अंतराल में वे इस सीमा तक सहायता स्वीकृत कर सकें. ऐसे प्रकरण समिति की अगली बैठक में कार्योत्तर अनुमोदन के लिये रखे जाएंगे.

   नियम (7) सहायता प्राप्त करने का तरीका - (क) सहायता प्राप्त करने के लिये परिशिष्ट एक में निर्धारित प्रपत्र पर संबंधित श्रमजीवी पत्रकार/परिवार के सदस्य को आवेदन करना होगा.

   (ख) लेकिन यदि अशक्त होने के कारण सहायता प्राप्त करने के इच्छुक पत्रकार/परिवार के सदस्य निर्धारित प्रपत्र में आवेदन नहीं भर सकें तो उन्हें निकट से जानने वाले दो पत्रकार उनकी ओर से आवेदन कर सकेंगे.

   (ग) विशेष परिस्थितियों में समिति स्वविवेक से सहायता स्वीकृत कर सकेगी.

टीप :- नियम 6 की टीप के अधीन नियम 7 क ख ग के अंतर्गत जनसंपर्क संचालक द्वारा सहायता सव्ीकृत की जा सकेगी.

   नियम (8)-प्राप्त आवेदन पत्रों पर समिति का निर्णय अंतिम होगा.

   नियम (9)  व्याख्या-नियम की व्याख्या के संबंध में शासन का निर्णय अंतिम होगा.

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार
सी.के. खेतान, अपर सचिव

प्रपत्र परिशिष्ट एक
आवेदन - पत्र
(1) आवेदक का  पूरा नाम
(2) आवेदक के पिता/पति का नाम
(3) आवेदक का पता
(4) पत्रकारिता के क्षेत्र में आवेदक की सेवा की संक्षिप्त जानकारी

नोट- आश्रितों द्वारा आवेदन किये जाने पर दिवंगत पत्रकार की सेवाओं का संक्षिप्त विवरण दिया जाये.
(5) समस्त स्रोतों से आवेदक /आश्रितों की आय
(6) परिवार के आश्रित सदस्यों के बारे में निम्नानुसार जानकारी दें :-

---------------------------------------------------------------
   क्र.        नाम        आयु        संबंध        सभी स्रोतों से वार्षिक आय
   (1)        (2)        (3)        (4)            (5)

---------------------------------------------------------------

(7) अपने/पति/पत्नी अथवा परिवार के आश्रित सदस्यों के पास, यदि कोई हो तो, अचल संपत्ति का विवरण और उससे होने वाली वार्षिक आय.
(8) प्रयोजन जिसके लिये सहायता अपेक्षित है.
(9) यदि अन्य किसी कोष से सहायता मिली हो तो उसकी जानकारी.
(10) अन्य जानकारी ..........................................................
(11) स्थान और दिनांक ...................................................
 

जहां श्रमजीवी पत्रकार/आश्रित खुद आवेदन नहीं करते एवं उसके बदले उन्हें जानने वाले दो पत्रकार आवेदन करते हैं, तो दोनों के हस्ताक्षर होंगे और बिंदु 10 के तहत यह स्पष्ट बतायेंगे कि किन परिस्थितियों में आवेदक/आश्रित आवेदन नहीं कर रहे हैं।

नोट- आवेदन प्रपत्र में निर्दिष्ट सभी बिंदुओं पर सुवाच्च अक्षरों में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए
हस्ताक्षर

(आवेदक का पूरा नाम)

Date:  5 March 2007 - 6:52pm         

छत्तीससगढ़ में पत्रकार कल्याण कोष 

Thursday, April 4, 2013

केन्‍द्रीय प्रैस प्रत्‍यायन समिति का पुनर्गठन

04-अप्रैल-2013 15:57 IST
समिति का कार्यकाल पहली बैठक की तारीख से दो वर्ष होगा
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सेन्‍ट्रल प्रैस एक्रेडिटेशन कमेटी (केन्‍द्रीय प्रैस प्रत्‍यायन समिति) का पुनर्गठन किया है। यह समिति आवेदनों पर विचार करके मीडिया के सदस्‍यों को प्रत्‍यायन प्रदान करने के लिए अनुमोदन करती है। इस समिति के सदस्‍यों के नाम हैं-

श्री हिमांशु चटर्जी (इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्‍टस), श्री बी.एम. शर्मा (ऑल इंडिया स्‍मॉल एंड मीडियम न्‍यूजपेपर्स फेडरेशन), श्री प्रमोद माथुर (वर्किंग न्‍यूज कैमरामेन्‍स एसोसिएशन), श्री सुरिन्‍दर कपूर (न्‍यूज कैमरामेन्‍स एसोसिएशन), सुश्री कूमी कपूर (एडिटर्स गिल्‍ड ऑफ इंडिया), श्री शाज़ी ज़मा (इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन), श्री स्‍वराज थापा (प्रैस एसोसिएशन), श्री मनोरंजन भारती (न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन), श्री सुप्रिया प्रसाद (ब्रॉडकास्‍ट एडिटर्स एसोसिएशन), श्रीमती मंगीपुडी अरूणा (एसोसिएशन ऑफ स्‍मॉल एंड मीडियम न्‍यूजपेपर्स ऑफ इंडिया), श्री त्‍यागराज (इंडियन फेडरेशन ऑफ स्‍मॉल एंड मीडियम न्‍यूजपेपर्स), श्री गीतार्थ पाठक (इंडियन जर्नलिस्‍टस यूनियन), श्री जगदीश यादव (एसोसिएशन ऑफ एक्रेडिटेड न्‍यूज कैमरामैन), श्री पद्मधर पति त्रिपाठी (ऑल इंडियन जर्नलिस्‍टस वेलफेयर एसोसिएशन), श्री राधेश्‍याम शर्मा (ऑल इंडिया न्‍यूजपेपर्स एडिटर्स कांफ्रेंस), श्री सुभाष निगम (नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्‍टस), श्री पंकज वोहरा, श्री निर्मल पाठक, सुश्री नीरजा चौधरी, सुश्री पल्‍लवी घोष, श्री विनोद अग्निहोत्री, श्री दिवाकर, श्री वर्गीस के. जॉर्ज, श्री सुनील गटाडे और श्री नवीन ग्रेवाल (नामांकित)। 

इस समिति का कार्यकाल इसकी पहली बैठक की तारीख से दो वर्ष होगा। 


मीणा/शुक्‍ल/यशोदा- 1712

Monday, February 4, 2013

मीडिया जगत में लोकप्रिय: मोबाइल रेडियो रूस

14.10.2009, 17:19
रेडियो रूस के प्रसारण 17 की जगह 39 भाषाओं में 
रेडियो रूस एक नई परियोजना शुरू कर रहा है जिसे नाम दिया गया है–“मोबाइल रेडियो रूस”। अब रेडियो रूस के प्रसारण मोबाइल टेलिफ़ोन पर भी सुने जा सकते हैं।
दुनिया में हर उस जगह पर जहाँ टेलिफ़ोन सेवा उपलब्ध है रेडियो रूस के श्रोता 17 भाषाओं में रेडियो रूस के प्रसारण सुन सकते हैं। इसके लिए आपको अपने अपने टेलिफ़ोन पर एक विशेष प्रोग्राम लोड करना होगा जो रेडियो रूस के श्रोताओं को निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।इस समय “मोबाइल रेडियो रूस” के कार्यक्रम मोबाइल विन्डोज़ के आधार पर कार्यरत स्मार्ट फ़ोनों के लिए उपलब्ध हैं लेकिन जल्दी ही रेडियो रूस के प्रसारण 17 की जगह 39 भाषाओं में सभी तरह के सेलफ़ोनों पर सुने जा सकेंगे। आप अपने फ़ोन पर “मोबाइल रेडियो रूस” का प्रोग्राम सेट कर लीजिए फिर हम हमेशा आपके साथ होंगे।
आपको कम्प्यूटर पर रेडियो रूस की वेबसाईट खोलकर exe फ़ाईल पर जाकर यह विशेष प्रोग्राम लोड करना है।
इसके लिए सबसे पहले आप exe फ़ाईल को वेबसाईट से अपने कम्प्यूटर पर डाउनलोड कर लीजिए।
फिर ActiveSync प्रोग्राम की मदद से अपने सेलफ़ोन को कम्प्यूटर के साथ जोड़िए और exe फ़ाईल को अपने सेलफ़ोन पर लोड कर लीजिए।
इसके बाद इस फ़ाईल को खोलकर इसमें दी गई हिदायतों के अनुसार प्रोग्राम लोड कीजिए।
प्रोग्राम लोड करने के लिए cab फ़ाईल का इस्तेमाल करना होगा।

सबसे पहले cab फ़ाईल को अपने कम्प्यूटर पर डाउनलोड करिए और उसे कम्प्यूटर पर save यानी सुरक्षित कर लीजिए।
उसके बाद cab फ़ाईल को खोलकर उस में दी गईं हिदायतों का पालन कीजिए।
प्रोग्राम का उपयोग करने के लिए हिदायतें:
यह ज़रूरी है कि आपके स्मार्टफ़ोन को इन्टरनेट से जोड़ना सम्भव हो। इसके बाद प्रोग्राम स्टार्ट कीजिए और वह भाषा चुनिए जिसमें आपको प्रसारण सुनना है। मेनू में प्रसारणों की पूरी सूची दी गई है।
 (रेडियो रूस से साभार)

मोबाइल रेडियो रूस

Wednesday, January 30, 2013

मीडिया के लिए दिशा- निर्देश

30-जनवरी-2013 16:51 IST
मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा विधानसभा चुनाव, 2013
निर्वाचन आयोग ने लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 126 का हवाला देते हुए कहा है कि इस धारा के तहत मतदान के 48 घंटे के पहले टेलीविजन या अन्‍य माध्‍यमों से चुनाव चर्चा नहीं की जा सकती। आयोग ने मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा विधानसभा चुनाव, 2013 के संदर्भ में यह कहा है। 

उल्‍लेखनीय है कि ऐसी शिकायतें मिली थीं कि टेलीविजन चैनल समाचारों और अन्‍य कार्यकम्रों के दौरान चुनाव चर्चा करके लोकप्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 126 की अवहेलना करते हैं। इसके अलावा धारा 126ए के तहत एक्‍जिट पोल और उनके नतीजे भी प्रतिबंधित हैं। निर्वाचन आयोग टीवी/रेडियो चैनल और केबल नेटवर्क से आग्रह करता है कि वे मतदान के 48 घंटे के दौरान ऐसा कोई कार्यक्रम प्रस्‍तुत न करें जिससे धारा 126 का उल्‍लंघन होता हो। संबंधित टीवी और रेडियो चैनल मतदान संबंधी प्रसारण की अनुमति के लिए राज्‍य/जिला/स्‍थानीय अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं ताकि वे आदर्श आचार संहिता का पालन करते हुए कार्यकम्र पेश कर सकें। संबंधित सक्षम अधिकारी शांति व्‍यवस्‍था और अन्‍य मामलों को ध्‍यान में रखते हुए उपरोक्‍त अनुमति दे सकता है। 

निर्वाचन आयोग ने मीडिया का ध्‍यान भारतीय प्रेस परिषद के दिशा निर्देशों की तरफ भी दिलाया है जिनके तहत मीडिया को निष्‍पक्ष रूप से चुनाव की खबरें पेश करनी हैं। मीडिया को यह भी आदेश दिया गया है कि वह जाति, धर्म, समुदाय और भाषा पर आधारित किसी प्रकार की खबर नहीं देगा। इसके अलावा मीडिया पर यह पाबंदी भी है कि वह किसी भी उम्‍मीदवार या राजनीतिक दल के बारे में बढा-चढाकर कोई रिपोर्ट नहीं देगा। 
(PIB)  मीडिया के लिए दिशा- निर्देश
मीणा/अरुण/अखलद-364