Saturday, December 30, 2023

श्री राम जी के भव्य मंदिर के लिए अक्षित कलश यात्रा

Saturday 30th December 2023 at 2019 

मोहाली के वेव एस्टेट वाले फव्वारा चौंक में होगा विशेष आयोजन 

मोहाली: 30 दिसंबर 2023: (कार्तिका कल्याणी सिंह//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन):: 

श्री अयोध्या में बनने वाले भगवान श्री राम जी के भव्य मंदिर को लेकर आध्यात्मिक माहौल में तेज़ी आ रही है। अस्सी के दशक की तरह फिर से सारा पर्यावरण राम-मय होता जा रहा है। इस राम मंदिर की भव्यता के साथ साथ आस्था तेई से बढ़ रही है। लोग इस मकसद के लिए पूजा अर्चना और के लिए तेज़ी से आगे बढ़ कर आ रहे हैं। इसी सिलसिले में के विशेष आयोजन रविवार को रखा गया है। मोहाली में अक्षित कलश यात्रा की सफलता के लिए लोग पूरी तरह से उत्साहित हैं। इस मौके पर मीडिया, लेखन और फोटोग्राफी से जुड़े लोगों के लिए भी विशेष निमंत्रण है। इस अवसर पर रचा जाने वाला लेखन और शायरी इत्यादि विशेष इतिहास रचा जा रहा है जिसकी कदर और कीमत आने वाले निकट भविष्य में महसूस होगी। 

जो इस दिव्य आयोजन के अहसासों की अनुभूति सहेजना चाहते हैं उन सभी को सूचित किया जाता है कि 31 दिसंबर 2023 दिन रविवार को मोहाली के वेव एस्टेट सैक्टर 85 एवं 99 के निवासीओ द्वारा वेव एस्टेट के फुवहारा चौक में सुबह 11:00 से 1:00 बजे तक किया जाएगा। आप सभी मीडिया वाले साथी सहयोगी इस कार्यक्रम की ऐतिहासिक कवरेज हेतु सादर आमंत्रित हैं। कृपया समय पर पहुँच कर कार्यक्रम की कवरेज करने की कृपालता करें। इसे मिस करने की गलती मत करें। 

आवश्यकता पड़ने पर भारतीय जनता पार्टी पंजाब के प्रदेश मीडिया सचिव हरदेव सिंह उभ्भा उपलब्ध रहेंगे ही। इन पलों को अपनी कलम और कैमरे में सहेजने वाले लोगों को मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन की तरफ से  भी विशेष तौर पर उत्साहित किया जाएगा। 

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नव वर्ष पर पंजाब मंडी बोर्ड में विशेष आयोजन

Saturday 30th December 2023 at 12:59 PM

     पहली जनवरी को डाला जाएगा भोग    

मोहाली: 30 दिसंबर 2023: (कार्तिका कल्याणी सिंह//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

एक ऐतिहासिक वर्ष 2023 हमें बहुत से अनुभव दे कर जा रहा है। आने वाला नया वर्ष 2024 आ रहा है। समय की इस वार्षिक तबदीली के इन तीन दिनों में जो लोग और संगठन पूजा पाठ को आवश्यक कर्तव्य समझते हुए धर्मकर्म की  तरफ ध्यान दे रहे हैं उनमें पंजाब मंडी बोर्ड भी एक है। नव वर्ष के अवसर पर पंजाब मंडी कार्यालय में श्री अखंड पाठ साहिब का आयोजन 

पंजाब मंडी बोर्ड के समस्त कर्मचारियों की तरफ से नव वर्ष का स्वागत रूहानियत के अंदाज़ में किया जा रहा है। आज शनिवार 30 दिसंबर को सुबह साढ़े दस बजे शुभारंभ किया गया। इस अखंड पाठ का भोग पहली जनवरी 2024 दिन सोमवार को सुबह 10:15 बजे डाला जाएगा ,नव वर्ष के लिए शुभकामनाओं की यह अरदास पंजाब मंडी बोर्ड के मुख्य कार्यालय पंजाब मंडी भवन में होगी। यह कार्यालय साहिबज़ादा अजीत सिंह नगर के सेक्टर 65 में स्थित है। पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन हरचंद सिंह बरसट और उनकी टीम के अन्य वरिष्ठ लोग भी इस शुभ अवसर पर गुरु की हज़ूरी में हाज़िर रहेंगे। 

गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने इसी वर्ष फरवरी के पहले सप्ताह में  जब छह बोर्डों और निगमों के अध्यक्ष और सात बाजार समितियों के प्रमुख नियुक्त किए थे तो उनमें हरचंद सिंह बरसट का नाम भी शामिल रहा। उन्होंने करीब तीन सप्ताह बाद फरवरी के आखिरी दिनों में अपना यह पद संभाल भी लिया था। 

श्री बरसट आम आदमी पार्टी के राज्य महासचिव भी हैं और पंजाब सरकार की साख को अधिक बेहतर बनाने के लिए अक्सर सक्रिय भी रहते हैं। इसके साथ ही वह धार्मिक मामलों में भी अपना योगदान देते रहते हैं। 

उन्होंने ने शहीदी सप्ताह के अवसर पर दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी, माता गुजरी जी और चार साहिबजादों के अतुलनीय बलिदान को नमन किया। सोमवार को पार्टी कार्यालय से जारी बयान में ‘आप’ नेता ने कहा कि दसवें गुरु और उनके पूरे परिवार ने मानवता और धर्म की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दी और पूरी दुनिया के लिए मिसाल कायम की।

अब वह नववर्ष के अवसर पर भी नए साल को सुस्वागतम कहने के लिए श्री अखंड पाठ का आयोजन करा रहे हैं। इसमें शामिल होने का निमंत्रण सभी को दिया गया है। 

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Friday, March 31, 2023

टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन

प्रविष्टि तिथि: 31 मार्च 2023 5:25 PM by PIB Delhi

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने प्रोत्साहन के लिए सिफारिशें जारी कीं

नई दिल्ली:31 मार्च 2023: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन//)::

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज "टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करने" के बारे में अपनी सिफारिशें जारी की हैं।

भारतीय प्रसारण क्षेत्र का डिजिटलीकरण 2012 में शुरू हुआ और मार्च 2017 तक यह काम देश भर में पूरा हो गया। इसने मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय विनिर्माताओं के विकास के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान किया। सरकार ने 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' जैसी पहलें शुरू की हैं और भारत को एक वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण केंद्र में परिवर्तित करने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है।

उपकरण विनिर्माण क्षेत्र में भारत की वास्तविक क्षमता का उचित रूप से आकलन करने और सरकार को सिफारिशों पर पहुंचने के उद्देश्य से प्राधिकरण ने भारतीय प्रसारण उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को आयात-निर्भर क्षेत्र से स्वदेशी विनिर्माण के वैश्विक केंद्र में परिवर्तित करने के लिए सक्षम बनाया है। प्राधिकरण ने स्वत: संज्ञान लेकर सभी हितधारकों की टिप्पणी प्राप्त करने के लिए 22-12-2021 को "टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करना" के बारे में एक परामर्श पत्र जारी किया था।

टिप्पणियाँ प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 19-01-2022 और उनके बारे में यदि कोई जवाबी-टिप्पणियाँ प्राप्त करने की तिथि 02-02-2022 तक थी, जिसे हितधारक के अनुरोध पर क्रमशः 09-02-2022 और 23-02-2022 तक बढ़ाया गया था। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण को हितधारकों से 16 टिप्पणियाँ और 01 जवाबी-टिप्पणी प्राप्त हुईं, जो भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इस संबंध में दिनांक 28-04-2022 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ओपन हाउस डिस्कशन भी आयोजित किया गया।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने परामर्श प्रक्रिया के दौरान हितधारकों से प्राप्त सभी टिप्पणियों और मुद्दों के आगे के विश्लेषण पर विचार करने के बाद नीचे दी गई अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दिया है:

ए-उभरती प्रौद्योगिकियों और सम्मिलन के युग के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करने और प्रसारण उपकरणों के लिए एक इको-सिस्टम बनाने का लक्ष्य रखने की आवश्यकता है। प्रसारण उपकरणों के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं या प्रसारण उपकरणों पर भी ध्यान केंद्रित करने के लिए मौजूदा उत्कृष्टता केंद्रों का उन्नयन किया जा सकता है।

बी-टेलीकॉम निर्यात संवर्धन समिति (टीईपीसी) या कुछ इसी तरह के संगठन को स्थानीय रूप से निर्मित प्रसारण उपकरणों के निर्यात को प्रोत्साहन प्रदान करने और सुविधा प्रदान करने के लिए सक्षम करना चाहिए।

सी-दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (टीईसी), दूरसंचार विभाग को सभी प्रसारण उपकरणों के परीक्षण और मानकीकरण के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए।

डी-सी-डॉट जैसे सार्वजनिक क्षेत्र में मौजूदा अनुसंधान एवं विकास केंद्रों को मजबूत करना। सार्वजनिक-निजी भागेदारी (पीपीपी) के माध्यम से उद्योग जगत की भागीदारी के साथ-साथ स्थानीय अनुसंधान एवं विकास ईकोसिस्टम का विकास करना चाहिये। प्रसारण क्षेत्र के लिए स्थानीय उत्पादों/प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान एवं विकास और विकास को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए 'प्रौद्योगिकी विकास कोष' बनाया जाना चाहिए। स्थानीय सीएएस के उपयोग को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान और विकास और मानकीकरण को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए ऐसे उपायों के परिणामों की समीक्षा करना चाहिए।

ई- स्थानीय अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से विकसित उत्पादों के लिए गो टू मार्केट रणनीति भी अपनाई जानी चाहिए। 

एफ- लीनियर सेट-टॉप बॉक्स को उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन-पीएलआई योजना के अंतर्गत शामिल किया जाना चाहिए।

जी- चिपसेट सहित प्रसारण उपकरण के लिए आवश्यक स्वदेशी घटकों की उपलब्धता की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत स्थानीयकरण स्तर निर्धारित करते समय स्थानीय घटकों की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक निवेश परिव्यय की समीक्षा सूक्ष्म, लघु और माध्यम उद्यम (एमएसएमई) द्वारा समय-समय पर पहचाने जा सकने वाले कुछ चयनित उपकरणों के लिए विनिर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करने के दृष्टिकोण से की जानी चाहिए।

एच- सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की तर्ज पर टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र के अन्य प्रासंगिक घटकों के स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन प्रदान करना चाहिए। स्थानीय रूप से प्राप्त घटकों/सेवाओं के प्रतिशत के संदर्भ में टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में विभिन्न उपकरण श्रेणियों के लिए 'स्थानीय विनिर्माण' के दायरे को परिभाषित किया जाना चाहिए।

जे- टेलीविजन प्रसारण क्षेत्र में स्थानीय विनिर्माण पर उनके प्रभाव के संबंध में मुक्त व्यापार समझौता-एफटीए और ऐसे समझौतों की समीक्षा की जानी चाहिए।

सिफारिशों के बारे में पूरी जानकारी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है।

**** एमजी/एमएस/एआर/एमकेएस/डीके//(रिलीज़ आईडी: 1912672) 

Thursday, March 23, 2023

पत्रकारिता बचाओ दिवस के मौके पर हुआ विशेष आयोजन

Thursday 23rd March 2023 at 07:55 PM

पत्रकारिता को दरपेश चुनौतियों और खतरों की हुई चर्चा 


चण्डीगढ
: 23 मार्च 2023: (कार्तिका सिंह//मीडिया स्क्रीन डेस्क)::

पत्रकारिता का ग्लैमर भी बढ़ा है लेकिन खतरे अभी भी कम नहीं हुए। पत्रकारिता पर नज़र आने वाले स्पष्ट हमले भी बढ़े हैं और छुपे हुए सूक्ष्म हमले भी तेज़ हुए हैं। इन सभी खतरों को लेकर जागरूक पत्रकारों के संगठन चिंतित हैं। इसका अहसास आज के आयोजनों से हुआ जो देश भर में किए गए थे। 

चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में स्थित प्लाज़ा मार्किट में आज मीडिया की चहल पहल रही। मौका था शहीदी दिवस का और आव्हान था पत्रकारिता बचाओ दिवस मनाने का।  बहुत से पत्रकारों ने आज इस आश्य के संकल्प भी लिए। चंडीगढ़ एंड हरियाणा जर्नलिस्ट यूनियन (रजि.) द्वारा इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन के आह्वान पर देश के महान शहीदों के बलिदान दिवस पर आज पत्रकारिता बचाओ (सेव जर्नलिज्म) दिवस मनाया। इस मौके पर और चंडीगढ़ के सेक्टर 17 स्थितप्लाज़ा मार्कीट ग्राउंड में ही में पत्रकारों की मांगों को लेकर धरना दिया गया और प्रदर्शन भी  किया गया। इस अवसर पर पंजाब व चंडीगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के सदस्य व पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। सीएचजेयू ने पत्रकारिता पर निरंतर बढ़ रहे संकट पर चिंता जताते हुए सरकार से पत्रकारों की मांगों को तुरंत पूरा करने की मांग भी की।

आज की इस बैठक में चंडीगढ़ एंड हरियाणा जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष राम सिंह बराड़, प्रदेश महासचिव सुरेंद्र गोयल, ललित धीमान, सतीश शर्मा, अख्तर फारूखी, रंजना शुक्ला, प्रवीण कुमार, कमलजीत सिंह, अजीत सिंह व इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव बलविंदर जम्मू, पीसीजेयू के प्रदेशाध्यक्ष बलबीर सिंह जंडू, बिंदु सिंह, जय सिंह छिब्बर,त्रिलोचन सिंह सहित अनेक वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे। यूनियन के नेताओं ने शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव को श्रद्धांजलि देते हुुए कहा कि शहीदे आजम भगत सिंह खूद एक पत्रकार थे और उनका जीवन हमेशा पत्रकारों को प्रेरणा देता रहेगा। इस बैठक के अवसर पर शहीदे आज़म भगत सिंह को एक पत्रकार के तौर पर भी याद किया गया। गौरतलब है कि उस समय की पत्रकारिता आज भी एक उदाहरण के तौर पर याद की जाती है। 

पत्रकारिता बचाओ दिवस मनाने के मकसद से बुलाई गई इस बैठक को संबोधित करते हुए आईजेयू के राष्ट्रीय महासचिव बलविंदर सिंह जम्मू ने कहा कि पत्रकारों की जायज मांगों की पिछले काफी समय से निरंतर अनदेखी हो रही है। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि पत्रकारों को कोरोना काल से पहले रेल यात्रा दौरान रियायती दरों पर यात्रा सुविधा मिलती रही है, जिसे कोरोना काल के दौरान अस्थाई तौर पर बंद किया गया था, लेकिन अब हालात सामान्य होने के बावजूद भी उसे अभी बहाल नहीं किया गया। इसे तुरंत बहाल किया जाए। पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र व राज्य स्तर पर पत्रकार संरक्षण कानून बनाए जाएं, ताकि पत्रकार अपना कर्तव्य बिना किसी दबाव व भय के पूरा कर सकें। प्रेस परिषद के स्थान पर मीडिया परिषद का गठन किया जाए और उसमें राष्ट्रीय स्तर की तमाम यूनियनों व संगठनों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। राष्ट्रीय स्तर की सभी यूनियनों व संगठनों को केंद्रीय मीडिया एक्रीडियेशन कमेटी व राज्य एक्रीडियेशन कमेटियों में प्रतिनिधित्व बहाल किया जाए। इससे मीडिया कर्मियों की मुश्किलें कुछ आसान हो सकेंगी। 

पत्रकारिता को दरपेश चुनौतियों की भी विस्तृत चर्चा हुई और मीडिया नेताओं ने कहा कि पत्रकारों पर देश भर में विभिन्न स्थानों पर झूठे मामले दर्ज करना बंद किया जाए। पत्रकारों को मुख्य धारा के कोरोना योद्वा मानते हुए कोरोना काल में मारे गए सभी पत्रकारों के परिवारों को उचित आर्थिक सहायता दी जाए। 

इसके साथ ही पीआईबी एक्रीडियेशन रूलज में से गैर जरूरी व पक्षपाती नियम व शर्तें हटाई जाएं। उन्होंने कहा कि देशभर में एक ऐसा माहौल कायम किया जाए, जिससे पत्रकार स्वतंत्रता के साथ निष्पक्ष होकर अपना कर्तव्य निभा सके। 

इन मांगों और चुनौतियों की चर्चा करते हुए बलविंदर सिंह जम्मू ने कहा कि आज प्रैस की स्वतंत्रता कसौटी पर लगी हुई है और भारतीय मीडिया दुनिया भर में 150वें स्थान पर पंहुच गया है। सीएचजेयू अध्यक्ष राम सिंह बराड़ ने कहा कि चंडीगढ़ एंड हरियाणा जर्नलिस्ट यूनियन ने काफी समय पहले यूनियन ने प्रदेश सरकार को पत्रकारों की मांगों बारे ज्ञापन सौंपे थे, लेकिन अभी तक उन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। पत्रकारों की जायज मांगों को तुरंत स्वीकार करके सरकार उन्हें राहत प्रदान करे।

Tuesday, February 14, 2023

एकुपंक्चर के रहस्यों का पता लगा सकते हैं डा. ढींगरा से

पंजाब स्क्रीन में है डा. इंद्रजीत ढींगरा का विशेष आलेख 

लुधियाना:14 फरवरी 2023: (कार्तिका सिंह//मीडिया स्क्रीन डेस्क)::

आप पढ़ सकते हैं पंजाब स्क्रीन हिंदी में यहां क्लिक कर के
जब आज की तरह का आधुनिक चकाचौंध का दौर नहीं था उस समय नाम भी प्राचीन ढंग, तरीकों और उन  रिवाजों के हिसाब से रखे जाते थे जो उन दिनों आम हुआ करते थे। किसी का नाम होता था कनछेदी लाल तो किसी का नाम होता नकछेदी लाल। आज के युग में इस तरह के नामों का चलन बहुत निरथर्क सा लगता है लेकिन उस दौर के मुताबिक इनका गहरा अर्थ होता था।

ओशो एक जगह बताते हैं जब स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दवाएं ले कर भी ठीक नहीं होती थी तो लोग किसी सियाने/वैद/हकीम के पास पहुंचते और वह बताता कि इसका कान छिदवा दी जा इसका नाक छिदवा दो। छिदवाने की इस रस्म के बाद स्वास्थ्य की समस्या ठीक हो जाती। मैंने स्वयं भी ऐसे कई मामले देखे जब कुछ बच्चों और युवाओं का बुखार नाक या कान छिदवाने से ठीक पूरी तरह ठीक हो गया और हमेशां के लिए। वास्तव में इतनी सी औपचारिकता से शरीर के अंदर का सर्कट ठीक हो जाता था। शायद इसी ज्ञान ने बाद में एकुपंक्चर विज्ञान के तौर पर बहुत  विकास किया। एकुपंक्चर में भी केवल सुई चुभो कर शरीर की गंभीर बिमारिओं का इलाज किया जाता है। उत्तर भारत में सफलता से डाक्टर कोटनिस की स्मृति में शानदार अस्पताल चला रहे डाक्टर इंद्रजीत सिंह ढींगरा इस सिस्टम के बारे में बहुत ही पते की बातें बताते हैं। उनका अस्पताल लुधियाना के सलेम टाबरी इलाके में है और उनसे अपॉइंटमेंट ले कर मिला जा सकता है।  उन्होंने जो कुछ मीडिया को बताया उसे आप पढ़ सकते हैं पंजाब स्क्रीन हिंदी में यहां क्लिक कर के। 

आजकल जिस तेज़ी से नई नई बीमारियां बढ़ रही हैं और इनके साथ ही बेहद तेज़ी से बढ़ रही है दवाओं की बिक्री बउसे देखते हुए भविष्य कोई ज़्यादा सुंदर नज़र नहीं आता। पहले हर घर परिवार में सबसे ज़्यादा ज़रूरी रूटीन का समान हुआ करता था रसोई का राशन लेकिन आजकल सबसे ज़्यादा ज़रूरी हो गया है हर घर में परिवार के तकरीबन हर सदस्य के लिए दवाओं का बड़ा सा डिब्बा। 

दवाओं की इस जीवन भर चलने वाली नियमित ज़रूरत ने हर मध्यवर्गीय घर परिवार के बजट को बुरी तरह हिला रखा है। इसके बावजूद इस बात की कोई गारंटी नहीं कि कुछ सप्ताह या कुछ महीने दवाएं खाने के बाद मरीज़ पूरी तरह से तंदरुस्त हो जाएगा। दवाओं पर निर्भरता जीवन भर का अभिशाप बन चुकी है। अख़बारों और दुसरे मीडिया में बड़े बड़े विज्ञापन दवाओं की बिक्री के भी आने लगे हैं। ज़ाहिर है इतने बड़े पैमाने पर होने वाली विज्ञापनबाजी का सारा खर्च इन दवाओं की बिक्री से ही निकलता होगा। 

इस मुद्दे पर जल्दी ही हम आपके सामने लाएंगे कुछ नए खोजपूर्ण आलेख और वीडियोज़ लेकिन फ़िलहाल आप पढ़ सकते हैं एकुपंक्चर के संबंध में डाक्टर इंद्रजीत सिंह ढींगरा से हुई बात पर आधारित जानकारी। इस आलेख से आपको मिल सकेगी उस थरेपी की जानकारी जो आपको निश्चित इलाज के बाद पूरी तरह ठीक होने का वायदा भी दे सकती है। बस क्लिक कीजिए यहां और पढ़ लीजिए सारी जानकारी। 

Thursday, January 19, 2023

नहीं रहे मित्र कुलदीप सिंह कोकी लेकिन छोड़ गए कई सवाल

Monday:16th January 2023 at 03:47 PM Via Mobile call 

पत्रकारों की आर्थिकता मज़बूत बनाने लिए समाज भी आगे आए   


लुधियाना: 18 जनवरी 2023: (रेक्टर कथूरिया//मीडिया स्क्रीन ऑनलाइन)::

आज बाद दोपहर ही पता चला कि पत्रकार कुलदीप जी नहीं रहे। पुराने मित्र और सुख दुःख के साथी रहे अजय कोहली जी ने उनके देहांत की खबर दी। उन्होंने और कुछ अन्य मित्रों ने बताया कि सुबह तक ठीक लग रहे थे। साढ़े सात बजे तक तो अपनी अख़बार मालवा प्वाइंट के लिंक सोशल मीडिया पर पोस्ट भी करते रहे। इसी बीच सुबह ही 09 और 09:30 के दरम्यान ही अचानक उनकी तबियत बिगड़ी। कहने लगे चक्कर से आ रहे हैं। उन्हें फवारा चौंक वाले न्यूरो अस्पताल पहुँचाया गया लेकिन अस्पताल के अंदर पहुँचने से पहले ही वह इस दुनिया से जा चुके थे। सुबह करीब 11 बजे तक उनके न रहने की खबर सभी मित्रों को मिलनी शुरू हुई। वरिष्ठ पत्रकार मित्र अश्वनी जेतली ने भी बहुत से लोगों को सूचित किया। 

बहुत दुखद है कुलदीप जी का यूं चले जाना। हम सभी मित्र प्यार से उन्हें कोकी कहा करते थे। हर रोज़ अक्सर मिलने मिलाने वाले और उनके ज़्यादा नज़दीक रहने वाले मित्रों ने बताया कि कामकाज को लेकर आजकल बहुत बेहद चिंतित थे। उसी चिंता और टेंशन के चलते शायद दिमाग की नाड़ी फट गई। बाद में उनके बेटे दमनप्रीत  सिंह ने  भी ब्रेन हैमरेज की पुष्टि की।  

अभी शायद उम्र के साठ साल ही मुश्किल से पूरे कर पाए थे कि मौत उन्हें देखते ही देखते हमसे छीन ले गई। हम सभी का स्नेही मित्र हमारे दरम्यान नहीं रहा। आर्थिक तंगियों के बावजूद ज़रूरत  पड़ने पर मित्रों का हर संभव सहायक साबित होना। जेब खाली होने पर भी संकटग्रस्त मित्र के लिए कोई रास्ता सुझा देना। खुद को भी अगर कभी कोई बेबसी जैसी हालत घेर ले तो भी दोस्तों को कठिन घड़ियों में हौंसला देना शायद कुलदीप को ही आता था। कोई खुद को तीसमारखां समझ कर कुछ ज़्यादा ही हवा करने लगे तो उसकी हवा पल भर में निकालना भी कुलदीप के लिए चुटकी का काम रहता। किसी की बात पर आशंका होनी तो झट से मोबाईल निकालना औए बात की पुष्टि कर के हकीकत का पता लगा लेना। 

ज़िंदगी और वक्त ने उन्हें बहुत जाने माने लोगों से मिलवाया और बहुत बड़े बड़े घटनाक्रमों का साक्षी भी बनाया।समाज और सियासत में जिन लोगों ने कई कई बार आंधियों के खिलाफ स्टैंड ले कर दिखाया था उनका साथ भी कुलदीप जी को मिलता रहा। क्लीन शेव्ड रहे लेकिन पंथ और सिख धर्म के हर दर्द से अवगत रहते थे। सिख शहादत पत्रिका पर उनका नाम भी प्रिंट लाईन में छपता रहा। कई कई दुर्लभ किताबों का अनुवाद भी हिंदी और अंग्रेज़ी से किया और करवाया। 

किसी को कोई भी समस्या हो तो उनके कंप्लेंट सैल का दरवाज़ा हमेशां उनके लिए खुला रहता। नैशनल रोड पर स्थित काली सी बिल्डिंग--सूर्य आर्केड की सीढ़ियां चढ़ कर उनका दफ्तर आ जाता था। जेब की हालत कैसी भी हो, माहौल का मिजाज़ कुछ भी हो वह अपने पास आने वाले हर व्यक्ति की आवभगत करते और उसका दुःख दर्द सुनते। कोशिश करते संकट का समाधान भी तुरंत बता सकें। 

घर को चलाने में पिता का साथ देते थे। इसी म्हणत मशक्कत ने उनका बचपन भी उनसे छीन लिया था। उनके बचपन का वह मासूम सा चेहरा भी अब तक याद है मुझे। सर पर जुड़ा और उस पर रबड़ के साथ सफ़ेद रुमाल किसी फूल की तरफ सजा लगता था। जब गली मोहल्ले के अन्य बच्चे खेल रहे होते तब वह पिता की प्रिंटिंग प्रेस पर मेहनत कर रहे होते। कभी कंपोज़िंग, कभी फर्मा बांधना और उठवाना, कभी प्रिंटिंग प्रेस पर काम करना। बस साड़ी उम्र काम में ही निकल गई। 

गौरतलब है कि छोटी सी उम्र में ही पिता के साथ लुधियाना के प्रसिद्ध पुराने इलाके इस्लामगंज//अमरपुरा में प्रिंटिंग प्रेस के ज़रिए मेहनत मुशक्कत करते हुए उनकी शख्सियत का दृश्य रह रह कर आंखों के सामने उभर रहा है। उन दिनों पत्र-पत्रिकाओं की छपाई के लिए एक एक अक्षर--एक एक मात्रा जोड़ कर कोई खबर या रचना तैयार होती थी। फिर उन सभी रचनाओं को जोड़ कर पूरा पेज बांधा जाता था और उसके बाद सभी पेज जोड़ कर कोई अख़बार या किताब छपा करती थी। 

उनके पिता बच्चों से बहुत सख्ती के साथ काम करवाया करते थे। उनके भाई भी पूरा सहयोग देते थे। प्रिंटिंग प्रेस नीचे वाले ग्राउंड फ्लोर पर चला  करती थी ऊपर रिहायश हुआ करती थी। थोड़ी थोड़ी देर बाद ऊपर से चाय बन कर आती रहती।  फिर कोशिश होती चाय भी खाली न हो। साथ बिस्कुट या कुछ और भी रहता। साथ ही उनके पिता बातों बातों में अपने सभी क्लाइंटस को बिठाए रखते। बिजली चली जाती तो सब को  मुसीबत ही लगती। कुछ देर के लिए काम रुक सा जाता। अँधेरे में भी कुलदीप कम्पोजिंग करते रहते। अतीत के वे सभी दृश्य अब इतने सालों बाद ज़हन में घूमने लगे हैं। ऐसा लगता है जैसे कोई फिल्म कल्पना के पर्दे पर चल रही हो। 

सत्तर का दशक शायद उस समय समाप्त हो चुका था। अस्सी का दशक शुरू भी हो चुका था। अस्सी के दशक का यह वही दौर था जब पंजाबी में भी आधुनिक प्रिंटिंग अपना रंग ढंग ज़ोरशोर से दिखाने की दस्तक दे रही थी। कम्प्यूटर के ज़रिए कॉमसेट की आधुनिक कम्पोज़िंग चर्चा का विषय बन गई थी। ऑफसेट की तेज़ रफ़्तार प्रिंटिंग हम सभी को हैरान करने लगी थी। 

छोटी प्रिंटिंग प्रेस बस छोटे छोटे जॉब वर्क तक सिमटने लगी थी। लगता था यह सब जल्द ही अतीत बन जाएगी लेकिन सलेमटाबरी और नाली मोहल्ला में अभी भी उनकी झलक मिल जाती है। उस दौर की कई मशीनें ज़ोर शोर से बहुत से लोगों का रोज़गार बनी हुई हैं। इसके बावजूद इस दौर में कइयों की किस्मत पर मंदहाली ने दस्तक दी। कुलदीप कोकी के पिता की प्रिंटिंग प्रेस पर भी इस का असर पड़ा। लेकिन आर्थिक मंदहालियों से जूझते हुए भी उन्होंने न तो कभी अच्छे साहित्य का अध्यन ही छोड़ा और न ही सृजन का सिलसिला बंद होने दिया। इसके साथ ही नई तकनीक से भी वाकिफ होते रहे। सीमित से संसाधनों के बावजूद वह किसी न किसी बहाने मीडिया में सक्रिय रहे। यह सक्रियता पैसे कमाने के लिए नहीं थी बल्कि एक मिश्र को लेकर थी। वह बड़े बड़े समूहों में रह कर और उनसे दूर हो कर भी इस मिशन को समर्पित रहे। 

आज उनके जाने की खबर सुन कर मन बहुत उदास हो गया है।

फिर बहुत से सवाल उठ रहे हैं क्या यही है ज़िंदगी? कभी भी किसी भी वक्त किसी मित्र से बिछड़ जाना और कुछ न कर पाना!

कितने बेबस से हैं हम लोग हैं।  मित्रों  देखते रहते हैं लेकिन उन्हें बचाने का कोई ठोस कदम नहीं उठा सकते। समाज को राह दिखने वाला मीडिया अभी तक अंधेरे में है। 

जो वास्तविक ज़िंदगी में काम करते हैं लेकिन तिकड़मबाज़ी नहीं करते वे क्यूं इतने गुमनाम रह जाते हैं। क्यूं  उन पर खुशहाली की कृपा नहीं होती? लक्ष्मी क्यूं उन पर मेहरबान नहीं होती? हम दोनों के एक नज़दीकी मित्र बलवीर सिद्धू (पंजाबी अख़बार-जस्टिस न्यूज़ के मालिक,संपादक और प्रकाशक) ने बताया कि बार उन्हें सरकारी कार्डों और फायदों के लिए कहा लेकिन वह हर बार हंसते हुए बात को टाल जाते। यूं लगने लगता जैसे वह उनकी ख़ामोशी और रहस्यमय हंसी में शायद एक पुराना गीत गुनगुना रहे हों--

सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी

सच है दुनिया वालों कि हम हैं अनाड़ी!

अब कुलदीप कोकी जी हमारे दरम्यान नहीं रहे। ज़िंदगी भर संघर्ष करने वाला शख्स अब मौत की आगोश में  चला गया। सब संघर्ष बीच में ही छूट गए। सभी इरादे भी अधर में ही रह गए। लेकिन उनका जाना बहुत से सवाल छोड़ गया है कि क्या यह सब यूं ही चलता रहेगा? मेहनत, मुशक्कत, ईमानदारी और प्रतिबद्धता इसी तरह दम तोड़ती रहेगी। 

सत्ता बदलती रहती है लेकिन सरकारों को चाहिए कि कलमकारों को मान्यता, सहायता और आवश्यक सहयोग देने के लिए नियमों को आसान करे। जान सम्पर्क विभाग की शक्तियों को बढ़ाया जाए। कलमकारों की तलाश के लिए एक विशेष सैल बनाया जाए जो अपने स्तर पर खोज करके सही लोगों को सत्ता की तरफ से बनती सहायता दे सके। कलमकारों के स्वास्थ्य की जाँच और अवस्य्हक उपचार तो हर छह महीने बाद होना ही चाहिए। नियमों की सख्ती की बजाए असली कलमकार बचने की तरफ पहल होनी चाहिए।  

यह सब लिखते हुए मैं उनकी कमज़ोरियों, खामियों और मजबूरियों से भी अवगत हूं लेकिन जब तक समाज कलमकारों के प्रति उदासीन और गैर-ज़िम्मेदार बना रहेगा तब तक यह सब होता रहेगा। हमारे पत्रकार, लेखक, बुद्धिजीव, कलाकार अलप आयु में ही दम तोड़ते रहेंगे। 

जब यह समाज अपनी वाहवाही के  आयोजन करता है तो उस समय आयोजक लोग चाय बनाने वाले को भी पैसे देते हैं, चाय परोसने और ले कर आने वाले  को भी पैसे दिए जाते हैं, दरियां बिछाने और कुर्सियां लाने लेजाने वालों को भी पैसे मिलते हैं लेकिन उसकी कवरेज के लिए दूर दराज से पहुंचे मीडिया वालों कोआयोजक नहीं  पूछते कि उनके वाहन में पैट्रोल है या नहीं? 

अगर कोई मजबूरी वश मांग भी ले तो उसे दे भी देते हैं लेकिन बाद में बदनाम करते हैं।  कोई सरकार से विज्ञापन मांग ले तो उसे सरकारिया कह कर बुरा भला कहते हैं लेकिन स्वयं की ज़िम्मेदारी का अहसास कभी नहीं करते। कवरेज की खबरों के ज़रिए अधिक से अधिक स्पेस और टाइमं बटोरने वाले ये चालाक लोग भी कलमकारों के जल्द देहांत के लिए कम ज़िम्मेदार नहीं हैं। सभी पत्रकार संगठनों को इस तरफ भी ध्यान देना होगा। 

आखिर में गोपाल दास नीरज जी का शेयर याद आ रहा है:

वो और ही थे जिन्हें थी ख़बर सितारों की;

मेरा ये देश तो रोटी की ही ख़बर में रहा - गोपालदास नीरज

स्नेह के साथ// बिछड़े हुए मित्रों की यादों के साथ//बिछड़ने की कगार पर खड़े और बहुत से कलमकारों के जाने के अंदेशे की चिंता के साथ आप सभी का--रेक्टर कथूरिया

Monday, January 9, 2023

यह सब प्रसारण कोड के खिलाफ हैं--सूचना और प्रसारण मंत्रालय

प्रविष्टि तिथि: 09 JAN 2023 2:38 PM by PIB Delhi

परेशान करने वाले दृश्यों  पर टीवी चैनलों को किया सुचेत 

*रक्तमय, शवों, शारीरिक हमले की तस्वीरें दर्दनाक और प्रोग्राम कोड के खिलाफ हैं

*चैनलों द्वारा सोशल मीडिया से लिए जाने वाले हिंसक वीडियो में कोई संपादन नहीं किया जा रहा है

*टीवी रिपोर्ट बच्चों पर मनोवैज्ञानिक असर डालती हैं, पीड़ितों की निजता का हनन करती हैं

नई दिल्ली: 9 जनवरी 2023: (पीआईबी//मीडिया स्क्रीनऑनलाइन)::

पिछले कुछ दश्कों में टी वी ख़बरों और टीवी सीरियलों ने अपनी अलग जगह बनाई है। फिल्मों के पैटर्न पर ही इन्हें बनाया भी जाता रहा है। टीवी सीरियलों ने फिल्मों के बराबर कद भी निकाला और  इनमें काम करने वालों ने अपनी अलग पहचान भी बनाई। इससे बहुत से लोगों को रोज़गार भी मिला। टीवी की दुनिया फिल्मों की तरह ही रोज़गार और एक्सपोज़र के बहुत से सुअवसर लेकर भी आई लेकिन इसके साथ ही लोगों की मानसिक सेहत के साथ जाने अनजाने खिलवाड़ भी हुआ। लोग घरों और परिवारों से टूट कर इन सीरियलों में काम करने वाले पात्रों के साथ जुड़ते चले गए। 

अपनी वास्तविक ज़िंदगी की मुसीबतों, चुनौतियों और ज़िम्मेदारियों को भूल कर इन सीरियलों के पत्रों और परिवारों की चिंता बहुत ज़्यादा करने लगे। इसके साथ ही इन सीरियलों के दर्शकों में अवसाद, उदासी, चिंता और निराशा भी बढ़ने लगी। जब तक सरकारी टीवी अर्थात दूरदर्शन था तब तक काफी हद तक सब कुछ बहुत ज़िम्मेदारी से होता रहा। निजी चैनलों के आने सब नीतियां और आदर्श व्यापर और कारोबार की भेंट चढ़ गए। 

सीरियलों के बाद खबरों के प्रसारण में भी खबरों को सनसनीभरी कहानी की तरह दिखने का रिवाज तेज़ी से बढ़ा।  खबरों के प्रसारण में भी ज़रूरी एहतियात काम होती चली गई। अब इस सब का गंभीर नोटिस लिया है सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने। 

टीवी सीरियलों के परिणामों का गंभीर नोटिस लेते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज सभी टेलीविजन चैनलों को दुर्घटनाओं, मौतों और महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों के खिलाफ होने वाली हिंसा सहित हिंसा की विभिन्न घटनाओं की वैसी रिपोर्टिंग के खिलाफ एक परामर्श जारी किया है, जो “अरुचिकर और अशोभनीय" होती हैं। मंत्रालय द्वारा यह परामर्श टेलीविजन चैनलों द्वारा विवेकहीनता दर्शाए जाने के कई मामलों के संज्ञान में आने के बाद जारी किया गया है।

इस संबंध में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि टेलीविजन चैनलों ने लोगों के शवों और रक्तरंजित घायल लोगों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित लोगों को बेरहमी से पीटे जाने, एक शिक्षक द्वारा पिटे जा रहे एक बच्चे के लगातार रोने – चिल्लाने की तस्वीरें/वीडियो धुंधला किए या उन्हें दूर के शॉट्स में दिखाने की सावधानी बरतते बगैर उन हरकतों को घेरकर और भी भयानक बनाते हुए निकट के शॉट्स में कई मिनटों तक बार-बार दिखाए हैं। यह बात भी प्रकाश में आई है कि ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग का यह तरीका दर्शकों के लिए अरुचिकर और उन्हें परेशान करने वाला है। गौरतलब है कि बच्चों से लेकर बज़ुर्गों तक इनका भावुक असर बहुत गहराई से अपना प्रभाव छोड़ता रहा। 

इस मामले में दिए गए इस परामर्श में विभिन्न दर्शकों पर इस तरह की रिपोर्टिंग से पड़ने वाले असर पर प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है कि ऐसी खबरों का बच्चों पर विपरीत मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ सकता है। परामर्श ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया है कि इसमें निजता के हनन का एक महत्वपूर्ण मुद्दा भी है जो संभावित रूप से निंदनीय और मानहानि करने वाला हो सकता है। 

उल्लेखनीय है कि आमतौर पर घरों में परिवार के सभी वर्ग के लोगों-वृद्ध, मध्यम आयु वर्ग, छोटे बच्चे आदि और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोगों-के साथ देखा जाने वाला एक मंच होने के नाते, टेलीविजन प्रसारकों पर जिम्मेदारी और अनुशासन की एक खास भावना पैदा करते हैं, जिन्हें प्रोग्राम कोड और विज्ञापन कोड में संकलित किया गया है। इसे विस्तार से पढ़ा जाए तो बहुत कुछ स्पष्ट भी हो जाता है। 

मंत्रालय ने यह पाया है कि ज्यादातर मामलों में वीडियो सोशल मीडिया से लिए जा रहे हैं और प्रोग्राम कोड के अनुपालन और निरंतरता सुनिश्चित करने के संपादकीय विवेक एवं संशोधनों के बिना प्रसारित किए जा रहे हैं।

हाल ही में प्रसारित ऐसे कंटेंट के उदाहरणों की सूची नीचे दी गई है:

हाल ही में 30 दिसंबर 2022 को दुर्घटना में घायल हुए एक क्रिकेटर की दर्दनाक तस्वीरें और वीडियो बिना धुंधला किए दिखाये गये।

इसी तरह 28 अगस्त 2022 को एक पीड़ित के शव को घसीटते एक व्यक्ति और चारों ओर खून के बिखरे छींटे तथा पीड़ित के चेहरे पर केंद्रित एक दर्दनाक फुटेज दिखाया गया।

यह सिलसिला काफी देर से जारी है। कुछ महीने पूर्व ही 06 जुलाई 2022 की एक दर्दनाक घटना में बिहार के पटना स्थित एक कोचिंग कक्षा में एक शिक्षक को पांच वर्ष के एक बच्चे को बेरहमी से तब तक पीटते हुए देखा जा सकता है जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गया। क्लिप को म्यूट किए बिना चलाया गया था जिसमें दया की भीख मांगते बच्चे की दर्दनाक चीखें सुनी जा सकती हैं और इसे 09 मिनट से अधिक समय तक दिखाया गया।

इससे पहले 04 अप्रैल 2022 को एक पंजाबी गायक के मृत शरीर की दर्दनाक तस्वीरों को बिना धुंधला किए दिखाया गया।

इस तरह 25 मई 2022 को असम के चिरांग जिले में एक व्यक्ति द्वारा दो नाबालिग लड़कों को डंडे से बेरहमी से पीटने की दिल दहला देने वाली घटना को दिखाया गया। वीडियो में उस शख्स को बेरहमी से लड़कों को लाठी से पीटते देखा जा सकता है। क्लिप को बिना धुंधला या म्यूट किए चलाया गया जिसमें लड़कों के रोने की दर्द भरी आवाज साफ सुनाई दे रही है।

16 मई 2022 को कर्नाटक के बागलकोट जिले में एक महिला अधिवक्ता के साथ उसके पड़ोसी ने बेरहमी से मारपीट की, जिसे बिना संपादन के लगातार दिखाया गया।

दक्षिण भारत में ही 04 मई 2022 को तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के राजापलायम में एक व्यक्ति को अपनी ही बहन की हत्या करते हुए दिखाया गया है।

इसी तरह 01 मई 2022 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक व्यक्ति को पेड़ से उल्टा लटका कर पांच लोगों द्वारा बेरहमी से लाठियों से पीटने की घटना के बारे में दिखाया गया।

12अप्रैल 2022 को एक दुर्घटना में पांच शवों के दर्दनाक दृश्य लगातार बिना धुंधला किए दिखाए गए।

11 अप्रैल 2022 की एक घटना में केरल के कोल्लम में एक व्यक्ति को अपनी 84 वर्षीय मां पर बेरहमी से हमला करते, उसे घसीटते हुए और लगातार बेरहमी से पीटते हुए लगभग 12 मिनट तक बिना धुंधला किए दिखाया गया।

07 अप्रैल 2022 को बंगलुरू में एक बूढ़े व्यक्ति द्वारा अपने बेटे को आग लगाने का एक बेहद परेशान कर देने वाला वीडियो दिखाया गया। बूढ़े व्यक्ति द्वारा माचिस की तीली जलाकर उसे अपने बेटे पर फेंके जाने का असंपादित फुटेज बार-बार प्रसारित किया गया।

22 मार्च 2022 को असम के मोरीगांव जिले में एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़के की पिटाई का वीडियो बिना धुंधला या म्यूट किए चलाया गया जिसमें लड़के को बेरहमी से पीटे जाने के दौरान रोते और गिड़गिड़ाते हुए सुना जा सकता है।

इस तरह के प्रसारण पर चिंता जताते हुए और इसमें शामिल व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए और बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों सहित टेलीविजन चैनलों के दर्शकों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने सभी निजी टेलीविजन चैनलों को कड़ाई से यह सलाह दी है कि वे अपनी प्रणाली और मृत्यु सहित अपराध, दुर्घटना एवं हिंसा की घटनाओं की रिपोर्टिंग के तौर - तरीकों को प्रोग्राम कोड के अनुरूप बनायें।

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****** एमजी/एएम/आर/डीवी         (रिलीज़ आईडी: 1889817)